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विज्ञापन और हिंदी भाषा

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1DS008 4

Course Coordinator(s)    Dr. Geeta Pandey 

Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No 

Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

How does the course link with the vision of AUD? 

How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered? 
 

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

 भारत में लोकतंत्र की स्थापना के बाद से ही हिंदी साहित्य की बुनावट में कई परिवर्तन देखे जा सकते हैं। एक तरफ जहां सामाजिक-साहित्यिक  आंदोलनों और विमर्शों ने हिंदी साहित्य की दशा और दिशा बदलने का महत्वपूर्ण कार्य किया, वहीं विज्ञान और नई तकनीकों ने भी हिंदी के पारंपरिक प्रारूप को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदी के इस बदलते प्रारूप में सिनेमा, मीडिया से लेकर कई अन्य माध्यमों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जिसमें विज्ञापन भी आरम्भ से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। विज्ञापन का इतिहास भले ही इन नवीन तकनीकों से कही पुराना रहा हो लेकिन अपने विकासक्रम में इसने हिंदी साहित्य में अनदेखा न किए जाने वाली उपस्थिति को दर्ज किया है।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • विज्ञापन और हिंदी भाषा पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञापन की दुनिया और उसमें हिंदी भाषा की भूमिका के महत्व से अवगत कराना है। 
  • इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों के भीतर विज्ञापन की तकनीकों, भाषा की प्रभावशीलता, और संचार माध्यमों की समझ विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। 
  • इस  पाठ्यक्रम को वैकल्पिक कोर्स के रूप में पढ़ाए जाने से न केवल विद्यार्थियों को विज्ञापन के इतिहास के साथ उसके विकासक्रम को समझने में मदद मिलेगी 
  • उनमें विज्ञापन के विभिन्न पक्षों से जुड़ा कौशल भी विकसित किया जा सकेगा।  
  • यह एक रोजगारोन्मुख कोर्स भी होगा ।  

Course Outcomes:  Course Outcomes describe what students are expected to know and be able to do by the end of a specific course. Each CO should be clearly observable and measurable. Mention 4-6 course outcomes.  At the end of the course, students will be able to:

  • CO1: विज्ञापन के इतिहास, विकास और महत्व का ज्ञान होना।
  • CO2: विज्ञापन के प्रकार, माध्यम (टीवी, रेडियो, प्रिंट, डिजिटल) और उनकी विशेषताओं का ज्ञान होना।
  • CO3:  विज्ञापन में हिंदी भाषा के स्वरूप, प्रकार व भाषागत सीमाओं का ज्ञान होना।
  • CO4:  विज्ञापन की सैद्धांतिक प्रक्रिया व समस्याओं का ज्ञान होना।
  • CO5:  विज्ञापन और हिंदी भाषा के बीच व्यावहारिक प्रशिक्षण और अभ्यास का जो आन होना।   

Modules and Readings

मॉड्यूल -1 विज्ञापन : स्वरूप और अवधारणा

इस पाठ्यक्रम के प्रथम मॉड्यूल में विद्यार्थी विज्ञापन के इतिहास और विकासक्रम की एक संक्षिप्त रूपरेखा से परिचित हो सकेंगे। विज्ञापन की परिभाषाओं और अन्य सैद्धांतिक पक्षों को इस मॉड्यूल के अंतर्गत विश्लेषित करने का प्रयास किया जाएगा। विज्ञापन के विभिन्न प्रकार, माध्यमों और उनकी विशेषताओं व महत्व का ज्ञान इस मॉड्यूल में दिया जाएगा। साथ ही यह मॉड्यूल विज्ञापन के विशिष्ट उद्देश्य के रूप में उन प्रेरणा सिद्धांतों को भी विश्लेषित करने का प्रयास करेगा, जिनका प्रयोग विज्ञापनों में उपभोक्ता की जरूरतों, इच्छाओं और व्यवहार को समझने के लिए किया जाता है।

विज्ञापन में भाषा के उपयोग द्वारा उपभोक्ता पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करना इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य रहेगा।

निर्धारित विषय-

  • विज्ञापन : अर्थ तथा परिभाषाएं
  • विज्ञापन का महत्व और वैशिष्टय
  • विज्ञापन का उद्देश्य
  • विज्ञापन के प्रकार

सहायक पुस्तकें-

  • विज्ञापन का जादू, डॉ.आशीष द्विवेदी, किताब घर प्रकाशन नई दिल्ली
  • हिंदी विज्ञापनों का पहला दौर, आशुतोष पार्थेश्वर, अन्नया प्रकाशन नई दिल्ली

माड्यूल 2 - विज्ञापन के विविध माध्यम

इस मॉड्यूल के अंतर्गत विज्ञापन में प्रयुक्त विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, और डिजिटल) की  एक सहज रूपरेखा से विद्यार्थियों को परिचित कराना। विज्ञापन के वर्तमान वृहद परिक्षेत्र में सोशल मीडिया और ऑनलाइन विज्ञापन जैसे क्षेत्रों की भूमिका से विद्यार्थियों को अवगत कराना जिससे विद्यार्थियों में मीडिया और प्रौद्योगिकी की एक विस्तृत समझ  को विकसित किया जा सके। इसके

 साथ ही इन क्षेत्रों में हिंदी भाषा के सर्जनात्मक रूप और उपयोग को भी विस्तार से समझा जा सके।

निर्धारित विषय-

  • प्रिंट माध्यम एवं विज्ञापन ( पत्रिका, पम्पलेट ,समाचार पत्र,होडिंग्स )
  • इलेक्ट्रानिक माध्यम एवं विज्ञापन  ( टेलिविज़न ,मोबाइल, इंटरनेट ,सोशल मीडिया,न्यू मीडिया)

सहायक पुस्तकें-

  • सूचना प्रौद्योगिकी और जन माध्यम, प्रो.हरिमोहन, तक्षशिला प्रकाशन नई दिल्ली, संस्करण, 2002 
  • जनसंचार बदलते परिपेक्ष में, डॉ.बलविंदर कुंद्रा, तक्षशिला प्रकाशन नई दिल्ली, संस्करण, 2009

माड्यूल 3 विज्ञापन और हिंदी भाषा

इस मॉड्यूल के अंतर्गत विद्यार्थी प्रभावी विज्ञापन निर्माण हेतु हिंदी भाषा के प्रभावी  उपयोग का समीक्षात्मक विश्लेषण करना जानेंगे। इसके द्वारा विद्यार्थी भाषाई सर्जनात्मकता से पूरी तरह से परिचित हो सकेंगे। इस मॉड्यूल को मुख्य ध्येय इस बात पर केंद्रित होगा कि विद्यार्थी विज्ञापन की भाषा को सहज, सरल, स्पष्ट, और आकर्षक भाषा में सीख सकें। इसके साथ ही भाषा को व्यावहारिक स्तर पर ब्रांड और उपभोक्ता के बीच प्रभावी संचार का माध्यम किस प्रकार बनाया जा सके इससे विद्यार्थी भली-भांति परिचित हो सकेंगे। सही मायने में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा के महत्व और प्रभाव को हिंदी भाषा और   विज्ञापन के सामंजस्य के जरिए किस प्रकार  जनसामान्य तक पहुंचाया जा सकता है, इसकी एक मुकम्मल पड़ताल इस मॉड्यूल के अंतर्गत की जाएगी। कुल मिलाकर हिंदी भाषा के व्यावसायिक उपयोग और उसकी क्षमता का विकास अध्ययन विद्यार्थी इस मॉड्यूल के अंतर्गत करेंगे।

निर्धारित विषय-

  • विज्ञापन में हिंदी भाषा का स्वरूप
  • हिंदी विज्ञापनों की भाषागत विशेषताएँ
  • मानक और क्षेत्रीय भाषा

सहायक पुस्तकें-

  • विज्ञापन भाषा और संरचना, डॉ. रेखा सेठी, वाणी प्रकाशन नई दिल्ली
  • मीडिया लेखन डॉ चंद्र प्रकाश मिश्र, संजय प्रकाशन नई दिल्ली, संस्करण 2003

माड्यूल 4 हिंदी विज्ञापन निर्माण कार्य

इस मॉड्यूल में हिंदी भाषा की वैश्विक मंच पर प्रभावशीलता के अध्ययन को  समझने का प्रयास किया जाएगा। क्षेत्रीय भाषाएं और हिंदी के समन्वय का

विज्ञापन के क्षेत्र में क्या महत्व है? इसे विश्लेषित करने का भी समुचित प्रयास इस मॉड्यूल के अंतर्गत किया जाएगा। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और व्यावहारिक विज्ञापनों के माध्यम से सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार को तार्किक ढंग से विश्लेषित करने का प्रयास किया जाएगा। विज्ञापनों में नैतिकता, व सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व के रेखांकन को तर्क एवं यथार्थ संगत तरीके से विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत करने का समुचित प्रयास भी  किया जाएगा। यह मॉड्यूल विद्यार्थियों को विज्ञापन लेखन, कॉपीराइटिंग, और ब्रांड प्रचार जैसे व्यावसायिक कौशल सिखाने का भी प्रयास करेगा, जिससे उनमें रोजगारपरक कौशल का विकास हो सके। साथ ही विद्यार्थी विज्ञापन एजेंसियों और मीडिया उद्योग में भी संभावित करियर और विकल्पों की तलाश कर सकें। अतः इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, रचनात्मकता, और सामाजिक जिम्मेदारी का समन्वय करते हुए विज्ञापन के क्षेत्र में हिंदी भाषा के उपयोग और महत्व को  समझ सकेंगे ।

निर्धारित विषय-

  • प्रिंट माध्यम के लिए विज्ञापन
  • इलैक्ट्रानिक माध्यम के लिए विज्ञापन
  • व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं अभ्यास

सहायक पुस्तकें-

  • मीडिया लेखन सिद्धांत और प्रयोग, मुकेश मानस ,स्वराज प्रकाशन नई दिल्ली, संस्करण 2006
  • भारतीय मीडिया अंतरंग पहचान, संपादक डॉ स्मिता मिश्र, भारत पुस्तक भंडार दिल्ली संस्करण 2003
  • जन माध्यमों की लेखन विधाएं, सुष्मिता बाला, कनिष्क पब्लिशर डिस्ट्रीब्यूटर्स नई दिल्ली संस्करण 2011

Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Response Essay (25 Marks)
  • Midterm Exam (25 Marks)
  • End Term Exam (50 Marks)
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