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तुलसीदास

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1DS005 4

Course Coordinator(s) :   Prof. Satyaketu Sankrit, Dr. Geeta Pandey   

1. Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No

2. Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

3. No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

4. Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

5. How does the course link with the vision of AUD?

6. How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए प्रस्तावित यह पाठ्यक्रम मध्यकालीन राम भक्तिधारा के श्रेष्ठ कवि तुलसीदास की प्रमुख कृतियों से परिचय कराने के लिए बनाया गया है। तुलसी अद्भुत प्रतिभा सम्पन्न कवि थे। महाकवि तुलसी  ने अपनी कालजयी कृतियों के माध्यम से जो उपदेश दिए, वे लोकमंगल का विधान करने वाले हैं। तुलसीदास का विषय क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है, उन्होंने जीवन के किसी अंग विशेष का चित्रण न करते हुए उसकी समग्रता का चित्रण किया। तुलसी मर्यादावादी कवि थे, अतः उनकी कृतियों में लोकधर्म एवं मर्यादा का निर्वाह किया है। उनकी रचनाओं में भक्ति, धर्म, संस्कृति एवं साहित्य का अद्भुत संगम हुआ है। यद्यपि उन्होंने अपनी काव्य रचना का उद्देश्य ‘स्वान्तः सुखाय’  माना है, तथापि वे लोकमंगलकारी कविता को ही श्रेष्ठ मानने के पक्षधर हैं।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • इस पाठ्यक्रम के माध्यम से तुलसीदास के जीवन और काव्य का परिचय मिलेगा।      
  • स्नातक के  विद्यार्थियों में मध्यकालीन भक्तिकाव्य की सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक एवं धार्मिक परिस्थितियों को समझने का समुचित विवेक प्राप्त होगा।    
  • राम काव्य के सृजन की प्रेरणा भूमि और भक्तिकाव्य के अध्ययन का संस्कार भी प्राप्त होगा।   
  • इस पाठ्यक्रम के अध्ययन से विद्यार्थी साहित्य ज्ञान को विस्तार देगा तथा तुलसीदास पर अपनी एक समझ विकसित कर सकेगा।  

Course Outcomes:  Course Outcomes describe what students are expected to know and be able to do by the end of a specific course. Each CO should be clearly observable and measurable. Mention 4-6 course outcomes.  At the end of the course, students will be able to:

  • CO1:भक्तकाल की युगीन परिस्थितियां को व्यापक रूप में समझने का अवसर  प्राप्त होगा।
  • CO2:भक्तिकाल में तुलसीदास तथा उनके काव्य के महत्व को समझा जा सकेगा।
  • CO3:कवि तुलसीदास को लेकर समुचित समझ विकसित होगी। अवधी भाषा की समझ विकसित होगी। 
  • CO4:अवधी भाषा की समझ विकसित होगी
  • CO5:भक्ति, शांत आदि रसों, विविध छंदों, अलंकारों तथा काव्यशास्त्रीय लक्षणों से परिचय प्राप्त होगा।

In this section, provide the name of the modules along with a brief description and references (Core and Suggested)

मॉड्यूल1 (Lecture Hours = 16) भक्ति साहित्य और रामचरितमानस का अध्ययन

प्रस्तुत इकाई में रामचरितमानस के निर्धारित पाठ का अध्ययन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी को रामचरितमानस महाकाव्य को जानने और समझने का अवसर प्राप्त होगा। रामचरितमानस हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है। इसकी भाषा अवधी है, यह राम-कथा पर आधारित महाकाव्य है। जिसकी रचना 1574 ई. में अयोध्या में प्रारंभ हुई तथा अंतिम भाग काशी में समाप्त किया गया। यह ग्रंथ सात काण्डों में विभक्त है। इसमें मात्रिक और वर्णिक छन्दों का यथास्थान प्रयोग हुआ है। तुलसी ने प्रमुखतः दोहा और चौपाई छंद में मानस की रचना की है। इसमें राम का उत्तम चरित्र चित्रित है। मानस का मुख्य रस शांत है, लेकिन श्रृंगार , वीर, करुण आदि सभी रसों का परिपाक अनेक स्थलों पर देखने को मिलता है। विभिन्न भावों का यह ग्रंथ विशेष भण्डार है। मानस एक चरित्र प्रधान ग्रंथ है। इसमें संवादों की सजीवता, चरित्र का सूक्ष्म चित्रण, वार्तालाप की उत्कृष्टता परिलक्षित होती है

 निर्धारित पाठ/ निर्धारित पाठ/ विषय :

  • भक्ति का उदय, भक्तिकाल में सगुण काव्यधारा का महत्व। 
  • तुलसीदास का जीवन परिचय तथा रचनाएँ 
  • रामचरित मानस: अयोध्याकाण्ड (दोहा संख्या 67 से 185 तक) गीताप्रेस, गोरखपुर

सहायक पुस्तकें :

  • तुलसी दर्शन - डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र
  • तुलसी का मानस - डॉ. मुंशीराम शर्मा
  • तुलसीदास - डॉ. माताप्रसाद गुप्त ।
  • श्रीरामचरित मानस - गीता प्रेस, गोरखपुर
  • हिन्दी साहित्य का वृहत इतिहास - नागरी प्रचारिणी सभा, काशी

माड्यूल 2 (Lecture Hours = 16)    तुलसीदास कृत ‘कवितावली’

प्रस्तावित इकाई में तुलसीदास कृत ‘कवितावली’ का निर्धारित पाठ पढ़ाया जाएगा। कवितावली में तुलसीदास ने रामचरित की महिमा के साथ-साथ अपने देशकाल को भी बड़ी ही मार्मिकता के साथ प्रस्तुत किया है। यह एक मुक्तक काव्य है, इसका प्रत्येक पद अपने-आप में पूर्ण है। कवितावली के उत्तर काण्ड में तुलसीदास के जीवन से संबंधित अनेक पद हैं, साथ ही कवि ने तत्कालीन समय के जीवन तथा युग का भी चित्रण किया है। इसमें कवित्त, सवैया, घनाक्षरी, छप्पय आदि छंदों का वर्णन किया गया है।

निर्धारित पाठ/विषय  : 

कवितावली (उत्तर काण्ड 30 छंद, पद संख्या 29, 35, 37, 44, 45, 60, 67,73, 74, 84, 88, 89, 102, 103, 108, 119, 122, 126, 132, 134, 136, 140, 141, 146, 153, 155, 161, 165, 182, 229) गीताप्रेस गोरखपुर।

सहायक पुस्तकें : 

  • तुलसीदास और उनका काव्य - डॉ. रामनरेश त्रिपाठी ।
  • गोस्वामी तुलसीदास - आ. रामचन्द्र शुक्ल ।
  • तुलसी दर्शन मीमांसा - डॉ. उदयभानु सिंह

माड्यूल 3 (Lecture Hours = 16 hours)    तुलसीदास कृत ‘गीतावली’

प्रस्तुत इकाई में तुलसीदास कृत ‘गीतावली’ रचना का अध्ययन किया जाएगा। तुलसी की यह रचना ब्रज भाषा में लिखी गई है। इस रचना में राग-रागिनियों का भरपूर प्रयोग किया गया है। इसमें बाल-लीलाओं तथा राम-राज्य के सुख और ऐश्वर्य का विस्तार से वर्णन किया गया है। कथानक की दृष्टि से गीतावली उनके ग्रंथ रामचरितमानस से भिन्न रचना है। इसमें भाव को अधिक महत्ता दी गई है। साथ ही इसमें श्रृंगार, वीर, करुण आदि रसों की भी बड़ी सुंदर अभिव्यक्ति हुई है।

निर्धारित पाठ / विषय :

  • गीतावली (बालकाण्ड, 20 पद, पद संख्या 7, 8, 9, 10, 18, 24, 26, 31, 33, 36, 44, 73, 95, 97, 101, 104, 105, 106, 107, 110 ) गीताप्रेस गोरखपुर

सहायक पुस्तकें :

  • तुलसी और उनका काव्य-रामनरेश त्रिपाठी      
  • तुलसी ग्रंथावली- सं. रामचन्द्र शुक्ल
  • तुलसीदास – चंद्रबली पाण्डेय

 
माड्यूल 4 (Lecture Hours = 16 hours)    तुलसीदास कृत ‘विनय पत्रिका’

प्रस्तुत इकाई में तुलसीदास द्वारा रचित प्रसिद्ध कृति ‘विनय पत्रिका’ का अध्ययन किया जाएगा। विनय पत्रिका तुलसीदास का पत्रात्मक शैली में लिखित गीतात्मक प्रबन्ध काव्य है। विनय पत्रिका के माध्यम से तुलसीदास ने तत्कालीन राजनीति, समाज, धर्म तथा संस्कृति और साहित्य में फैली भीषण दुर्व्यवस्था और उच्छृंखलता से जब सब अव्यस्थित हो उठा, तब कलियुग का अभिशाप समझ कर एक पत्री में उस व्यथा को तुलसीदास ने राजा राम के दरबार में उपस्थित होकर व्यक्त किया है। राम जगत् के नियन्ता हैं, अतः उनके दरबार में उनके पास अर्जी पहुंच जाये, इसलिए उनके दरबारी गणेश, सूर्य, शिव, देवी, गंगा, यमुना, काशी, चित्रकूट, हनुमान, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता आदि की स्तुति कर प्रार्थना (विनय) की गई है कि वे तुलसी की ओर से मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम का ध्यान आकृष्ट करें। तुलसी अपनी निजी पीड़ा और आत्मकथ्य को श्रीराम तक पहुंचाना चाहते हैं। विनय पत्रिका इसलिए भी लिखी गई है कि जीव का अज्ञान ईश्वर को केवल एक बार देख लेने मात्र से भी दूर हो जाता है। जीव का विरह, अपनी तुच्छता और अज्ञान से मुक्त करके अपनाने की कामना इस पत्रिका में व्यक्त की गई है। ईश्वर का जीव को क्षणभर के लिए देख लेना या अपनत्व व्यक्त कर देना ही इस पत्रिका का उद्देश्य है।

निर्धारित पाठ/विषय  :

  • विनय पत्रिका (40 पद, पद संख्या 1, 5, 17, 30, 36, 41, 45, 72, 78, 79, 85, 89, 90, 94, 100, 101, 102, 103, 104, 105, 111, 113, 114, 115, 121, 159, 160, 164, 165, 166, 167, 182, 201, 269, 272) गीताप्रेस गोरखपुर

सहायक पुस्तकें-

  • विनय पत्रिका गीता प्रेस- गोरखपुर
  • गोस्वामी तुलसीदास कृत विनय पत्रिका - डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह
  • हिन्दी साहित्य कोश- डॉ.धीरेन्द्र वर्मा डॉ. माताप्रसाद गुप्त की विनयपत्रिका पर टिप्पणी

Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Response Essay (25 Marks)
  • Midterm Exam (25 Marks)
  • End Term Exam (50 Marks)
     
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