| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core | NSOL1AE001 | 4 |
Course Coordinator(s) Hindi Faculty
Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
How does the course link with the vision of AUD?
यह पाठ्यक्रम बी.ए. हिंदी कार्यक्रम में साहित्य की सम्यक् समझ विकसित करने की विश्वविद्यालय की दृष्टि से संबद्ध है। हिंदी साहित्य की विविध विधाओं—जैसे नाटक, उपन्यास, एकांकी तथा अलंकार के अध्ययन के माध्यम से यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में साहित्यिक रूपों की संरचना, अभिव्यक्ति और सौंदर्यबोध के प्रति संवेदनशीलता विकसित करता है।
How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
डॉ. बी.आर.अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली का उद्देश्य दिल्ली के विद्यार्थियों में समता मूलक ज्ञान का प्रसार करना है। दिल्ली की राजकीय भाषाओं में हिंदी एक महत्वपूर्ण भाषा है। यहाँ के विद्यालयों में साहित्य की पढ़ाई कर के आते हैं। यहाँ तक कि दिल्ली शहर के शिक्षा और संस्कृति का एक बड़ा केंद्र होने के चलते दैनन्दिन जीवन में विद्यार्थी साहित्यिक अभिव्यक्तियों से रूबरू होते रहते हैं। यह पाठ्यक्रम उनमें इन अभिव्यक्तियों के विविध स्तरों की समझ पैदा करने के नाते अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली की सम्पूर्ण परिकल्पना से जुड़ा हुआ है।
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पाठ्यक्रम विवरण (Course Description) यह पाठ्यक्रम मूल रूप से साहित्य की सामाजिक अवस्थिति, साहित्य की साहित्यिकता, साहित्य के विभिन्न रूपों, काव्य के भीतर उसकी लयात्मकता के विभिन्न तत्वों, गद्य लेखन के विभिन्न रूपों, नाटक की बहुस्तरीयता, कथा साहित्य की विविधता और साहित्यिक आलोचना सम्बंधी प्रश्नों को विद्यार्थियों के लिए बोधगम्य बनाता है। साहित्य के सम्बंध में भारतीय चिंतन काव्यशास्त्र के नाम से लिपिबद्ध हुआ है। कारण यह कि आधुनिक काल से पहले साहित्यिक अभिव्यक्ति का मुख्य रूप कविता ही हुआ करती थी। कविता के सौंदर्य को समझने की दृष्टि से भारतीय चिंतन में जिन प्रमुख उपकरणों का विकास हुआ वे शब्द शक्ति, रस, छंद, अलंकार आदि के नाम से जाने जाते हैं। इन्हीं के इर्द-गिर्द भारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न सम्प्रदायों का भी नामकरण हुआ है। ये उपकरण बहुत हद तक गद्य लेखन के भी विभिन्न रूपों को समझने में भी सहायक होते हैं। पाठ्यक्रम में इनके साथ-साथ अन्य प्रासंगिक तत्वों का भी परिचय कराया जाता है। पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
Course Outcomes:
Modules and Readings मॉड्यूल – 1 साहित्य और उसके विभिन्न रूप सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए साहित्य अपेक्षाकृत नया शब्द है। पहले इसे काव्य ही कहा जाता था। काव्य के अतिरिक्त समस्त लेखन को समाहित करने वाले परिसर का नाम वांगमय था। आधुनिक काल में वांगमय से अतिरिक्त सृजनात्मक लेखन के लिए साहित्य शब्द का प्रयोग शुरू हुआ। इसके भीतर काव्यात्मक और गद्यात्मक दोनों रूप शामिल किए जाते हैं। काव्य के भीतर महाकाव्य, खंडकाव्य, गीत, लम्बी कविता इत्यादि तो गद्य के भीतर कथा, कथेतर साहित्य और नाटक आते हैं। इस माड्यूल में इन सबकी विधागत विशेषताओं का परिचय कराया जाएगा। निर्धारित विषय :
सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :-
मॉड्यूल 2 : काव्य के विभिन्न रूप उपरोक्त सभी धारणाएँ साहित्य की बुनियादी समझदारी से संबंध हैं, काव्य-प्रयोजन साहित्य के उद्देश्य पर विचार करता है। सौभाग्य से इस सिलसिले में प्राचीन चिंतन के अतिरिक्त आधुनिक काल में भी पर्याप्त विचार हुआ है। काव्य-हेतु साहित्य के अंगीभूत कारकों का विश्लेषण करता है। शब्द शक्ति साहित्य के अर्थ ग्रहण की जटिलता को स्पष्ट करती है। रस साहित्य से पड़ने वाले प्रभावों का विवेचन है। छंद साहित्यिक रचना के भीतर के लय का नियम है। अलंकार साहित्य के सौंदर्यपरवर्धक उपकरणों का वर्गीकरण है। प्रतीक, बिम्ब आदि साहित्य को समझने के नए उपकरण हैं। इस माड्यूल में विद्यार्थी इन सबका संक्षिप्त परिचय हासिल करेंगे। निर्धारित विषय:
सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :-
माड्यूल 3: कथा साहित्य कथा साहित्य के भीतर उपन्यास और कहानी आते हैं। जहाँ उपन्यास की विधा आधुनिक काल की उपज है, वहीं कहानी बेहद प्राचीन रूप होते हुए भी साहित्यिक विधा के रूप में आधुनिक काल में ही विकसित-पल्लवित हुई। इसे प्राचीन आखायिका के मुक़ाबले आधुनिक काल में उआपजी हुई शॉर्ट स्टोरी से जोड़कर देखा जाता है। उपन्यास आधुनिक काल का महाकाव्य कहा जाता है। महाकाव्य और उपन्यास के बीच में अमानता और अंतर पर विचार करने के ज़रिए इन दोनों का स्वरूप स्पष्ट होता है। इसी तरह कहानी और उपन्यास के बीच अंतर पर भी विभिन्न विद्वानों ने विचार किया है। इन सबसे विद्याथियों का परिचय इस माड्यूल में कराया जाएगा। निर्धारित विषय :
सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :-
माड्यूल 4 : नाटक और कथेतर गद्य नाटक साहित्य की प्राचीनतम विधाओं में से एक है। इसका रूप मुख्यतः अभिनय से जुड़ा हुआ है लेकिन इसका पाठ्य रूप भी महत्वपूर्ण होता है। नाटक विभिन्न कला विधाओं का समावेश है। उसके अभिनय हेतु बने हुए रंगमंच को लघु ब्रह्मांड भी कहा जाता है। आधुनिक काल में नाटक के एकांकी, रेडियो रूपक और नुक्कड़ नाटक जैसे अन्य रूप भी सामने आए हैं। यहाँ तक कि दूरदर्शन के धारावाहिकों को सामान्य बोलचाल में नाटक ही कहते हैं। रंगमंच की रूढ़ियाँ तथा अभिनय के अंग इस माड्यूल के विचारणीय विषय हैं। गद्य के कथेतर रूपों में निबंध सबसे महत्वपूर्ण और रोचक विधा है। वैचारिक लेख से भिन्न इसकी सृजनात्मकता इसे आधुनिक काल की विशेष साहित्यिक विधा बना देती है। इसी तरह वैयक्तिकता के उदय के साथ आत्मकथा और जीवनी भी साहित्यिक विधा के रूप में प्रकट हुए। संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, डायरी व पत्र लेखन आदि भी कथेतर गद्य की परिधि के भीतर ही आते हैं। इस माड्यूल में विद्यार्थी इन विधाओं का परिचय कराया जाएगा। निर्धारित विषय :
सहायक पाठ सामग्री एवं पुस्तकें :-
Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):
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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली