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रचनात्मक लेखन

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core SOL2HN303 4

Course Coordinator(s)  :     हिंदी संकाय

Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No 

Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

How does the course link with the vision of AUD? 

How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered? 

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को रचनात्मक लेखन की प्रविधियों, रचना-प्रक्रिया तथा साहित्यिक अभिव्यक्ति के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों से परिचित कराने के उद्देश्य से निर्मित है। इसमें यह मानकर चला गया है कि विद्यार्थी अपने भीतर निहित रचनात्मक क्षमता के प्रति आंशिक रूप से सजग हैं, जिसे एक सुव्यवस्थित दिशा प्रदान कर सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से सार्थक बनाया जा सकता है। पाठ्यक्रम के अंतर्गत रचना-प्रक्रिया, रचनाकार और रचना के अंतर्संबंध, साहित्यिक विधाओं के शिल्प एवं भाषा, तथा विभिन्न आलोचनात्मक दृष्टियों का अध्ययन किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में रचना-पाठ की विविध प्रविधियों की समझ, आलोचनात्मक चिंतन, पर्यवेक्षण क्षमता तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति की दक्षता का विकास होगा। साथ ही, यह पाठ्यक्रम रचनात्मक लेखन के विविध क्षेत्रों—जैसे कविता, कथा, नाटक, सिनेमा, पटकथा एवं संवाद लेखन—में संभावनाओं से परिचित कराते हुए विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान करने का भी लक्ष्य रखता है।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

यह पाठ्यक्रम रचनात्मक लेखन की प्रक्रिया, प्रविधियों एवं सैद्धांतिक आधारों की सम्यक् समझ विकसित करने के साथ-साथ रचनाकार और रचना के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करने पर केंद्रित है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न साहित्यिक विधाओं के शिल्प, भाषा एवं संरचना से परिचित कराते हुए रचना-पाठ की आलोचनात्मक प्रविधियों की समझ प्रदान की जाती है। साथ ही यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में रचनात्मक अभिव्यक्ति, आलोचनात्मक चिंतन एवं पर्यवेक्षण क्षमता का विकास करता है तथा उन्हें साहित्य, सिनेमा, पटकथा एवं अन्य लेखन क्षेत्रों में व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुख कौशल अर्जित करने के लिए सक्षम बनाता है। इस पाठ्यक्रम के सफल समापन के बाद विद्यार्थी सक्षम होंगे:

Course Outcomes:

  • CO1 : विद्यार्थी रचना-प्रक्रिया की अवधारणा, उसके सैद्धांतिक आधारों तथा विभिन्न चरणों को समझ सकेंगे, व्याख्या कर सकेंगे तथा उसका विश्लेषण कर सकेंगे।
  • CO2: विद्यार्थी रचनाकार और रचना के अंतर्संबंधों को विश्लेषित कर सकेंगे तथा विभिन्न दृष्टिकोणों के आधार पर रचना-पाठ की व्याख्या कर सकेंगे।
  • CO3: विद्यार्थी विभिन्न साहित्यिक विधाओं (काव्य, कथा, नाटक, गद्य) के स्वरूप, शिल्प एवं भाषा की विशेषताओं को समझ सकेंगे तथा तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत कर सकेंगे।
  • CO4: विद्यार्थी विभिन्न आलोचनात्मक दृष्टियों (यथार्थवाद, मार्क्सवाद, संरचनावाद, उत्तर-आधुनिकता आदि) का प्रयोग करते हुए साहित्यिक पाठों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • CO5: विद्यार्थी रचना और आलोचना के अंतर्संबंधों का मूल्यांकन कर सकेंगे तथा साहित्यिक प्रविधियों एवं सिद्धांतों की प्रासंगिकता को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • CO6: विद्यार्थी रचनात्मक एवं आलोचनात्मक लेखन सृजित कर सकेंगे तथा उसे प्रभावी, संगठित एवं अकादमिक रूप में प्रस्तुत कर सकेंगे।

Modules and Readings

मॉड्यूल 1: रचना और रचना प्रक्रिया
इस मॉड्यूल में रचना-प्रक्रिया के जटिल स्वरूप का अध्ययन किया जाता है। भावावेग को रचना का स्रोत मानने की परंपरा से आगे बढ़ते हुए विभिन्न साहित्यकारों और आलोचकों द्वारा रचना-प्रक्रिया के वस्तुगत विश्लेषण को समझने पर बल दिया गया है। इसके माध्यम से विद्यार्थी रचना-प्रक्रिया का गहन और विश्लेषणात्मक परिचय प्राप्त करते हैं।

निर्धारित विषय:

  • कविता क्या है – रामचंद्र शुक्ल (gadyakosh.org)
  • पल्लव (भूमिका) – सुमित्रानंदन पंत, राजकमल प्रकाशन (2006)
  • साहित्य सहचर – हजारी प्रसाद द्विवेदी, राजकमल प्रकाशन (चयनित अंश)
  • एक साहित्यिक की डायरी – गजानन माधव मुक्तिबोध, भारतीय ज्ञानपीठ (चयनित अंश)

सहायक ग्रन्थ:

  • रामचंद्र शुक्ल, चिंतामणि, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद
  • हजारी प्रसाद द्विवेदी, साहित्य सहचर, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
  • गजानन माधव मुक्तिबोध, एक साहित्यिक की डायरी, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली
  • सुमित्रानंदन पंत, पल्लव (भूमिका), राजकमल प्रकाशन

Online Resources:

माड्यूल 2 : रचनाकार और रचना

इस मॉड्यूल में लेखक और समीक्षक के बीच कृति की व्याख्या को लेकर चली आ रही बहस के संदर्भ में रचनाकार की दृष्टि को समझने पर बल दिया गया है। रचनाकारों द्वारा अपनी एवं अन्य कृतियों के विश्लेषण के माध्यम से विद्यार्थी रचनाकार के दृष्टिकोण और संवेदनशीलता को समझते हैं।
निर्धारित विषय:

  • प्रबंध पद्मिनी – निराला (चयनित अंश)
  • कुछ गद्य रचनाएँ – शमशेर बहादुर सिंह, राधाकृष्ण प्रकाशन (1992) (चयनित अंश)
  • एक कवि की नोटबुक – राजेश जोशी, राजकमल प्रकाशन (2018) (चयनित अंश)
  • गोलमेज – अरुण कमल, वाणी प्रकाशन (2010) (चयनित अंश)

सहायक ग्रन्थ:

  • सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, प्रबंध पद्मिनी, भारतीय भवन प्रकाशन
  • शमशेर बहादुर सिंह, कुछ गद्य रचनाएँ, राधाकृष्ण प्रकाशन
  • राजेश जोशी, एक कवि की नोटबुक, राजकमल प्रकाशन
  • अरुण कमल, गोलमेज, वाणी प्रकाशन

Online Resources:

माड्यूल 3: रचनात्मक विधाओं का स्वरूप: शिल्प और भाषा
इस मॉड्यूल में रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों एवं साहित्यिक विधाओं के स्वरूप का अध्ययन किया जाता है। परंपरागत रूप से काव्य और गद्य के विभाजन के साथ-साथ आधुनिक साहित्य में विकसित विभिन्न विधाओं की संरचना, शिल्प और भाषा का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है-

निर्धारित विषय:

  • मध्यकालीन हिंदी काव्यभाषा – रामस्वरूप चतुर्वेदी, राजकमल प्रकाशन (चयनित अंश)
  • उपन्यास का शिल्प – डॉ. गोपाल राय, बिहार हिन्दी ग्रंथ अकादमी (1973)
  • साहित्य विधाओं की प्रकृति – देवीशंकर अवस्थी, राधाकृष्ण प्रकाशन (2008) (चयनित अंश)
  • रचना और आलोचना – देवीशंकर अवस्थी, वाणी प्रकाशन (2014) (चयनित अंश)

सहायक ग्रन्थ:

  • रामस्वरूप चतुर्वेदी, मध्यकालीन हिंदी काव्यभाषा, राजकमल प्रकाशन
  • डॉ. गोपाल राय, उपन्यास का शिल्प, बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी
  • देवीशंकर अवस्थी, साहित्य विधाओं की प्रकृति, राधाकृष्ण प्रकाशन
  • देवीशंकर अवस्थी, रचना और आलोचना, वाणी प्रकाशन

Online Resources:

माड्यूल 4: रचना और आलोचना

इस मॉड्यूल में साहित्यिक आलोचना की विभिन्न प्रविधियों एवं सिद्धांतों का अध्ययन कराया जाता है। इसमें यह समझने पर बल दिया गया है कि अलग-अलग आलोचनात्मक दृष्टियाँ पाठ की व्याख्या को किस प्रकार प्रभावित करती हैं तथा उनका सामाजिक संदर्भों से क्या संबंध है-

निर्धारित विषय:

  • साहित्य विधाओं की प्रकृति – देवीशंकर अवस्थी, राधाकृष्ण प्रकाशन (1998)
  • संरचनावाद, उत्तर-संरचनावाद और प्राच्य काव्यशास्त्र – गोपीचंद नारंग, साहित्य अकादमी (1994)
  • आधुनिक हिंदी आलोचना के बीज शब्द – बच्चन सिंह, वाणी प्रकाशन (2015)
  • उत्तर औपनिवेशिकता के स्रोत और हिंदी साहित्य – प्रणय कृष्ण, हिंदी परिषद प्रकाशन (2008)

सहायक ग्रन्थ

  • गोपीचंद नारंग, संरचनावाद, उत्तर-संरचनावाद और प्राच्य काव्यशास्त्र, साहित्य अकादमी
  • बच्चन सिंह, आधुनिक हिंदी आलोचना के बीज शब्द, वाणी प्रकाशन
  • प्रणय कृष्ण, उत्तर औपनिवेशिकता के स्रोत और हिंदी साहित्य, हिंदी परिषद प्रकाशन

Assessment (Including Skills to be tested as per NCRF):

  • Response Essay/ Assignment-1 (25 Marks)
  • Midterm Exam/PPT/Assignment-2 (25 Marks)
  • End Term Exam (50 Marks)
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