| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core |
Course Coordinator(s) : प्रो. सत्यकेतु सांकृत, डॉ.निकिता जैन
Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
How does the course link with the vision of AUD?
प्रस्तुत पाठ्यक्रम में हिंदी कथा साहित्य के जन्म की ऐतिहासिक-सामाजिक परिस्थितियों, विकास-यात्रा, प्रमुख प्रवृत्तियों, विचारधाराओं, कथा-शिल्प आदि से विद्यार्थियों को परिचित कराया जाएगा ताकि वे समाज के विभिन्न पक्षों व आधुनिक समाज की जटिलताओं के प्रति संवेदनशील हो सकें। पाठ्यक्रम में सम्मिलित साहित्यिक कृतियों का उद्देश्य समाज में मामूली, साधारण, संघर्षशील चीजों के साथ साहित्य के संबंध को प्रकट करना होगा ताकि न्यायपूर्ण, आधुनिक व भेदभावहीन समाज की स्थापना के लिए चल रहे प्रयासों के प्रति गंभीरता को सुनिश्चित शिक्षण पद्धति के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा सके।
How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
यह पाठ्यक्रम हिंदी विषय में स्नातकोत्तर स्तर के अध्यापन तथा साहित्य अध्ययन पीठ (SOL) की अंतर्भाषी, अंतरानुशासनिक तथा तुलनात्मक साहित्यिक पद्धति के अनुरूप है। इसमें कथा साहित्य के माध्यम से हिंदी समाज की सामाजिक-ऐतिहासिक बनावट, अस्मितागत समस्याएं, राष्ट्रीय संकट को समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया जा सकेगा। हिंदी कथा-साहित्य में किस प्रकार हाशिए के वर्गों की अभिव्यक्ति हुई है, इसके बारे में विद्यार्थियों को सजग किया जाएगा। साहित्य में जनजीवन की अभिव्यक्ति व उसकी ऐतिहासिकता के विषय में शिक्षण किया जा सकेगा।
पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)
प्रस्तुत पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को आधुनिक हिंदी कथा साहित्य के दो प्रमुख रूपों यानी आधुनिक कहानी और आधुनिक उपन्यासों से परिचित कराया जाएगा। भारत में आधुनिकता का आगमन बेहद जटिल परिस्थितियों में बहुस्तरीय प्रक्रियाओं के मध्य हुआ था तथा कथा-साहित्य में उसकी विविध रूपों में अभिव्यक्तियां हुई थीं। साहित्य में आधुनिकता का आधार उपनिवेशवाद विरोधी संघर्षों, सामंतवाद का विरोध, जातिगत भेदभाव का खंडन, साधारण मनुष्य की स्थापना तथा गद्य के सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ है। गांव के साधारण किसान, नौजवान,बच्चे-बूढ़े, क्रांतिकारी, समाज-सुधारक, स्त्रियां, शिक्षक, नौकरीपेशा, कारीगर व मजदूर आदि समाज के सभी वर्गों की कथाएं हमारे साहित्य में हैं। उनमें अपने पाठक की कल्पनाशीलता तथा संवेदनशीलता को भव्यतम ऊंचाइयों पर पहुंचाने की अपार क्षमता है। आधुनिक कथा-साहित्य का पाठ्यक्रम विभिन्न वर्गों की जीवन संबंधी चुनौतियों, संघर्षों, पराजयों व जीवट उत्साहो के विस्तृत संसार के प्रति जिज्ञासु बनाएगा। उन्हें कालक्रम के अनुसार कथा व उपन्यास के बदलते सरोकारों तथा बदलते ढांचे से अवगत कराएगा। विगत सदी का कथा-साहित्य मुक्ति संघर्षों, समाजवादी विचारधारा के प्रसार तथा लोकतांत्रिक चेतना के विस्तार से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। नाना प्रकार के पाखंड, विद्रूप, ढोंग व नैतिक गिरावट की कथाएं भी इसमें उपस्थित हैं। खासतौर पर स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण की समस्याओं तथा मोहभंग की कथा-साहित्य में जो अभिव्यक्तियां हुई हैं, उसे प्रमुखता प्रदान की जाएगी। समाज के प्रति लेखकों के दृष्टिकोण में बदलाव आया और साथ ही लेखक होने की कसौटी में भी परिवर्तन दर्ज किया गया। इस तथ्य को कथा साहित्य के केंद्र में रखकर व्याख्यायित किया जाएगा ।
पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
- विद्यार्थियों को साहित्यिक पाठों के माध्यम से सामाजिक यथार्थ का विश्लेषण करने हेतु सक्षम बनाना।
- भारतीय समाज की बहुलता, विविधता, ग्रामीण-शहरी विभाजन तथा शहरीकरण की जटिलताओं के प्रति विद्यार्थियों में सम्यक् समझ विकसित करना।
- हिन्दी गद्य के विभिन्न रूपों, उनके परिवेशगत आयामों तथा स्थानीय विशेषताओं की गहन पड़ताल करने की क्षमता विकसित करना।
- गद्य साहित्य के अध्ययन के माध्यम से विद्यार्थियों की रचनात्मकता, कल्पनाशीलता एवं अभिव्यक्ति-कौशल का संवर्धन करना।हिंदी उपन्यास : उदय, ऐतिहासिक परिस्थितियां , स्वरुप, विकास यात्रा
- कथा साहित्य को जेंडर, स्त्री-विमर्श, अस्मितावादी दृष्टिकोण, राष्ट्र-निर्माण तथा विचारधारात्मक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करने के लिए विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करना।
- साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों की आलोचनात्मक समझ विकसित करते हुए विद्यार्थियों में वैचारिक संवेदनशीलता का विस्तार करना।
Course Outcomes: Course Outcomes describe what students are expected to know and be able to do by the end of a specific course. Each CO should be clearly observable and measurable. Mention 4-6 course outcomes. At the end of the course, students will be able to:
- CO1: विद्यार्थी हिन्दी कथा साहित्य की विकास-यात्रा के प्रमुख चरणों, प्रवृत्तियों एवं ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्यों की पहचान एवं व्याख्या कर सकेंगे।
- CO2: विद्यार्थी हिन्दी कथा साहित्य में अंतर्निहित सामाजिक संरचनाओं, वर्गीय विभेदों एवं विविध अस्मिताओं के प्रतिनिधित्व का विश्लेषण कर सकेंगे।
- CO3: विद्यार्थी साहित्य, ज्ञान, तर्क एवं वैचारिकी के अंतर्संबंधों का आलोचनात्मक परीक्षण करते हुए विवेकपूर्ण दृष्टिकोण विकसित कर सकेंगे।
- CO4: विद्यार्थी अर्जित ज्ञान एवं विश्लेषणात्मक समझ का प्रयोग अपने अकादमिक लेखन एवं शोध-कार्य में प्रभावी रूप से कर सकेंगे।
- CO5: विद्यार्थी ज्ञान, तर्क, वैचारिकी एवं साहित्य के पारस्परिक संबंधों का विवेकपूर्ण एवं आलोचनात्मक मूल्यांकन कर सकेंगे।
- CO6: विद्यार्थी नवीन दृष्टिकोणों एवं शोध-प्रवृत्तियों का निर्माण करते हुए हिन्दी साहित्य के शोध-परिदृश्य में सृजनात्मक योगदान दे सकेंगे
माड्यूल 1: हिंदी उपन्यास का परिचय
इस मॉड्यूल में हिन्दी उपन्यास की संकल्पना, स्वरूप एवं प्रकृति का परिचय दिया जाएगा। उपन्यास की उत्पत्ति एवं विकास-क्रम का अध्ययन करते हुए हिन्दी उपन्यास की परंपरा और उसकी विशिष्टताओं को समझने पर बल दिया जाएगा। साथ ही उपन्यास के प्रमुख तत्त्वों—कथानक, चरित्र-चित्रण, परिवेश, कथोपकथन एवं भाषा-शैली का विवेचन किया जाएगा। इस इकाई के माध्यम से हिन्दी उपन्यास को भारतीय समाज, इतिहास एवं संस्कृति के व्यापक संदर्भों में समझने की दृष्टि विकसित की जाएगी।
निर्धारित विषय:
- हिंदी उपन्यास : उदय, ऐतिहासिक परिस्थितियां , स्वरुप, विकास यात्रा
- हिंदी उपन्यास : उदय, ऐतिहासिक परिस्थितियां , स्वरुप, विकास यात्रा
सहायक पुस्तकें :-
- उपन्यास का उदय- आयन वाट, हरियाणा साहित्य अकादमी, 1990
- हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 2004
- मर्चेंट टेल्स एंड द इमरजेंस आफ द नावेल इन हिंदी- वसुधा डालमिया, इकानमिक एंड पालिटिकल वीकली, 43.3-49-60
- हिंदी उपन्यास का विकास- मधुरेश, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, 2014
माड्यूल 2: प्रमुख हिंदी उपन्यास
यह माड्यूल हिंदी के प्रधान उपन्यासों केगहनविश्लेषण, विवेचन आदि को संभव बनाने पर आधारित होगा। इन उपन्यासों के सघन पाठ के माध्यम से हिंदी उपन्यास में ग्रामीण जीवन की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता आंदोलन के प्रभाव, व्यक्तिवाद के विकास, सामाजिक समस्याओं की अभिव्यक्ति आदि की दिशा में शिक्षण कार्य को संपन्न किया जा सकेगा।छात्रोंकेभीतरसाहित्यिकसंवेदनशीलता को उत्पन्न करते हुए उन्हें उत्तर भारत के समाज की ऐतिहासिकता, घटनाओं-दुर्घटनाओं, हलचलों, उथलपुथल व जड़ताओं से जुड़े विविध प्रश्नों से जोड़ा जा सकेगा। उपन्यासों का एक बड़ा काम जीवन को महाकाव्यात्मक रूप से प्रस्तुत करना रहा है जिसमें चरित्र किसी विराट यथार्थ की अनुगूंज होते हैं। इसलिए उपन्यासों का पाठ जीवन की सूक्ष्म सचाइयों के साथ-साथ उसकी विशालता की दिशा में भी विद्यार्थियों को सोचने, समझने तथा बहस में शामिल होने के लिए प्रवृत्त करेगा। आधुनिक समाज में जाति, जेंडर, वर्ग व क्षेत्र के सवालों पर संवेदनशीलता को दर्ज किया जा सकता है। साहित्यिक कृतियों के अस्मितावादी, हाशिए की वैचारिकी पर आधारित तथा पर्यावरण के दृष्टिकोण से आधारित पाठों पर विशेष बल दिया जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए उपन्यासों की कथा को किसी निश्चित व्याख्या या दृष्टिकोण के अधीन रखने के स्थान पर उन्हें विभिन्न किस्म की संवादी बहसों तथा विमर्श के लिए खोला जाएगा। उपन्यासों के अध्ययन में पाठगत अर्थों की बहुलता से विद्यार्थी को परिचित कराने पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा और वर्तमान सामाजिक परिवेश में उन कथाओं, चरित्रो, शिल्प की प्रासंगिकता को उभारा जा सकेगा। इसमें कुल मिलाकर दस उपन्यास प्रस्तावित किए जा रहे हैं जिनमें शिक्षक व विद्यार्थियों के बीच सहमति से 4 उपन्यासों का चयन किया जाएगा। विभिन्न सत्रों में उपन्यासों की दी गई सूची में से अलग उपन्यास चुनकर उन्हें शिक्षण कार्य के लिए उपयोग किया जाएगा। हिंदी में उपन्यासों की सुधारवादी, आदर्शवादी, मनोविश्लेषणात्मक, यथार्थवादी, ऐतिहासिक उपन्यास, रोमांटिक उपन्यास, आंचलिक उपन्यास की पारंपरिक श्रेणियां रही हैं। इन श्रेणियों की ऐतिहासिकता से अवगत कराते हुए उपन्यास आलोचना के नए सिद्धांतों विशेषकर अस्मितावादी सिद्धांतों, उत्तर औपनिवेशिक सिद्धांतों, विखंडनवादी सिद्धांत, समाजशास्त्रीय पद्धित का भी उपन्यास के विवेचन-विश्लेषण में प्रयोग किया जाएगा
निर्धारित विषय: (कोई चार उपन्यास)
- देवरानी जेठानी की कहानी (पंडित गोरीदत्त)
- शेखरः एक जीवनी, भाग-1 (अज्ञेय)
- बाणभट्ट की आत्मकथा (हजारी प्रसाद द्विवेदी)
- झूठा सच , भाग-1 (यशपाल)
- तमस – भीष्म साहनी
- धरती ना धन अपना – जगदीश चन्द्र
- रागदरबारी – श्रीलाल शुक्ल
- मैला आँचल – फणीश्वर नाथ रेणु
सहायक ग्रन्थ :-
कसौटी पत्रिका का उपन्यास अंक- नंदकिशोर नवल (संपा)
आधुनिक हिंदी उपन्यास( दो खंड)- संपा- भीष्म साहनी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2010
हिंदी उपन्यास का इतिहास- गोपाल राय, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2000
उपन्यास और लोकजीवन- राल्फ फाक्स, पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली, 1957
रागदरबारीः आलोचना की फांस- रेखा अवस्थी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2014
अठारह उपन्यासः राजेंद्र यादव, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली, 1999
उपन्यास और लोकतंत्र- मैनेजर पांडे, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2011
मॉड्यूल 3 हिन्दी कहानी का परिचय
इस मॉड्यूल में हिन्दी कहानी को एक स्वतंत्र साहित्यिक विधा के रूप में उसकी वैचारिक, सौंदर्यात्मक एवं शिल्पगत जटिलताओं के साथ समझने का प्रयास किया जाएगा। हिन्दी कहानी के उद्भव एवं विकास-क्रम का आलोचनात्मक अध्ययन करते हुए विभिन्न चरणों जैसे —प्रारंभिक, प्रगतिवादी, नई कहानी तथा समकालीन कहानी की प्रमुख प्रवृत्तियों का अनुशीलन किया जाएगा। साथ ही कथ्य एवं शिल्प के अंतर्संबंधों—कथावस्तु, चरित्र-निर्माण, बिंब-योजना, प्रतीकात्मकता, भाषा एवं शैली का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया जाएगा। इस मॉड्यूल के माध्यम से हिन्दी कहानी को सामाजिक यथार्थ, वर्गीय अंतर्विरोधों, जेंडर प्रश्नों, अस्मितामूलक विमर्शों तथा समकालीन संवेदनाओं के संदर्भ में आलोचनात्मक दृष्टि से समझने की क्षमता विकसित की जाएगी |
निर्धारित विषय :
- हिन्दी कहानी : उदय, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, स्वरुप, विकास यात्रा, प्रमुख कहानी आन्दोलन
सहायक ग्रन्थ :-
- हिंदी कहानी का इतिहासः गोपाल राय, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, 2008
- हिंदी कहानी का विकासः मधुरेश, राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली, 2003
- हिंदी की आरंभिक कहानिया- गंगाप्रसाद विमल (चयन व भूमिका), नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली, 2014.
माड्यूल 4: प्रमुख हिंदी कहानियां
इस मॉड्यूल में शामिल कहानियों के अध्ययन के माध्यम से बीसवीं सदी के सामाजिक-सांस्कृतिक द्वंद्वों, चुनौतियों तथा मानवीय स्थितियों का अंतर्दृष्टिपूर्ण मूल्यांकन किया जा सकेगा। आधुनिक हिन्दी कहानी में कथ्य, शिल्प और भाषा के स्तर पर हुए नवाचारों तथा उनके आधुनिकता से संबंध का विश्लेषण किया जाएगा। इन कहानियों के माध्यम से समाज की राष्ट्रीय त्रासदियों, परंपरा के साथ उसके बहुपक्षीय अंतःसंघर्ष, तथा घरेलू जीवन, सांस्कृतिक विविधता, आर्थिक परिस्थितियों, जाति-वर्गीय तनावों और स्त्री-अनुभवों का यथार्थपरक बोध विकसित होगा। साथ ही विद्यार्थियों को लैंगिक, जातिगत, वर्गीय एवं राष्ट्रीय प्रश्नों के संदर्भ में आलोचनात्मक पाठ की क्षमता विकसित करने तथा परंपरा और आधुनिकता के अंतर्द्वंद्वों की संवादात्मक समझ की ओर उन्मुख किया जाएगा।
निर्धारित विषय : (कोई आठ)
- चंद्रदेव से मेरी बातें (राजेंद्र बाला घोष -‘बंग महिला’)
- राही (सुभद्रा कुमारी चौहान)
- दुनिया का अनमोल रतन (प्रेमचंद)
- कानों में कंगना (राधिकामरण प्रसाद सिंह)
- गुण्डा (जयशंकर प्रसाद)
- एक रात (जैनेन्द्र)
- गैंग्रीन (अज्ञेय)
- कोसी का घटवार (शेखर जोशी)
- इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर (हरिशंकर परसाई)
- राजा निरबंसिया (कमलेश्वर)
- मलबे का मालिक (मोहन राकेश)
- परिंदे (निर्मल वर्मा)
सहायक ग्रन्थ :-
कहानी, नई कहानी, नामवर सिंह, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2004
एक दुनिया समानांतर- राजेंद्र यादव, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली, 2003
हिंदी कहानी का विकासः मधुरेश, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली, 2003
हिंदी कहानी का इतिहासः गोपाल राय, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2008
नई कहानी की भूमिकाः कमलेश्वर, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2015
नई कहानीः संदर्भ और प्रकृति- देवीशंकर अवस्थी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2018
Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):
- Response Essay/PPT/Assignment-1 (25Marks)
- Midterm Exam/PPT/Assignment-2/Project (25 Marks)
- End Term Exam (50 Marks)
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली