| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core | 4 |
Course Coordinator(s) हिंदी संकाय
Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
How does the course link with the vision of AUD?
यह पाठ्यक्रम आधुनिक हिंदी कविता के अध्ययन के माध्यम से विद्यार्थियों में आलोचनात्मक, मानवीय एवं बहुविषयक दृष्टि का विकास करता है। कविता में निहित राष्ट्रवाद, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, अस्मिता तथा मानवीय मूल्यों से जुड़े प्रश्नों की समझ विकसित करते हुए यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को समाज, संस्कृति और साहित्य के अंतर्संबंधों पर संवेदनशील एवं विश्लेषणात्मक दृष्टि प्रदान करता है।
How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
प्रस्तुत पाठ्यक्रम एम.ए. हिंदी कार्यक्रम में आधुनिक हिंदी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियों, काव्य आंदोलनों तथा वैचारिक बहसों के अध्ययन को सुदृढ़ करता है। यह विद्यार्थियों को आधुनिक हिंदी कविता की भाषा, शिल्प, संवेदना और आलोचनात्मक व्याख्या की समझ प्रदान करते हुए अकादमिक लेखन, शोध तथा तुलनात्मक साहित्यिक अध्ययन की क्षमता विकसित करने में सहायक है।
पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)
यह पाठ्यक्रम हिंदी कविता में आधुनिकता के उदय की पृष्ठभूमि की चर्चा करने के साथ-साथ आधुनिकता की अवधारणा पर भी केंद्रित है। हिंदी साहित्य में आधुनिकता के उदय के समय और स्वरूप को लेकर जो बहसें रही हैं, उन्हें प्रतिनिधि कविताओं के माध्यम से समझने का प्रयास इस पाठ्यक्रम में किया गया है। इसके अंतर्गत आधुनिक हिंदी कविता के आरंभिक चरण, राष्ट्र की संकल्पना और उससे जुड़े सांस्कृतिक तथा वैचारिक प्रश्नों का अध्ययन कराया जाएगा।
पाठ्यक्रम में भारतेन्दु युग से लेकर नई कविता और उसके बाद की काव्यधाराओं तक के विकासक्रम को प्रतिनिधि कविताओं के माध्यम से समझाया गया है। छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद तथा नई कविता जैसी धाराओं के माध्यम से विद्यार्थी आधुनिक हिंदी कविता के विविध काव्यात्मक पड़ावों, उनकी वैचारिक बहसों और सामाजिक संदर्भों से परिचित होंगे। इसके साथ ही व्यक्ति और समाज, राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय तथा मानवीय मूल्यों से संबंधित प्रश्नों की काव्यात्मक अभिव्यक्तियों का आलोचनात्मक अध्ययन भी पाठ्यक्रम का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक हिंदी कविता की भाषा, शिल्प, संवेदना और वैचारिक संरचना की समझ विकसित करने के साथ-साथ काव्य-पाठ के विश्लेषण और आलोचनात्मक व्याख्या के औज़ार भी प्रदान करता है।
पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
आधुनिक हिंदी कविता राष्ट्रवाद से अपनी यात्रा शुरू करके विभिन्न अस्मिताओं तक की आवाज़ों से निर्मित हुई है। इस दौर में अनेक साहित्यिक आंदोलन उभरे, जो मूलतः काव्य आंदोलन थे। प्रस्तुत पाठ्यक्रम के अध्ययन के माध्यम से विद्यार्थियों में आधुनिक हिंदी कविता के विभिन्न स्वरों की पहचान करने, उसकी वैचारिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझने तथा मानवीय गरिमा और मानव-मूल्यों के प्रति संवेदनशील दृष्टि विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक हिंदी कविता की विविध काव्य प्रवृत्तियों, सौंदर्यबोध और वैचारिक बहसों के आलोचनात्मक अध्ययन के लिए सक्षम बनाएगा।
Course Outcomes
Course Outcomes describe what students are expected to know and be able to do by the end of a specific course. Each CO should be clearly observable and measurable. Mention 4-6 course outcomes. At the end of the course, students will be able to:
- CO1: विद्यार्थी आधुनिक हिंदी कविता के उद्भव, विकासक्रम तथा आधुनिकता की अवधारणा से जुड़े ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों को समझ सकेंगे तथा उनकी व्याख्या कर सकेंगे।
- CO2: विद्यार्थी आधुनिक हिंदी कविता में राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और मानव-मूल्यों की अभिव्यक्तियों का विश्लेषण कर सकेंगे तथा विभिन्न काव्य प्रवृत्तियों के साथ उनके संबंध स्थापित कर सकेंगे।
- CO3: विद्यार्थी छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद और नई कविता जैसी प्रमुख काव्यधाराओं की विशेषताओं, वैचारिक आधारों और काव्य-दृष्टियों का तुलनात्मक अध्ययन कर सकेंगे।
- CO4: विद्यार्थी आधुनिक हिंदी कविता में व्यक्ति, समाज, लोकतंत्र, अस्मिता और सामाजिक न्याय से जुड़े प्रश्नों की काव्यात्मक अभिव्यक्तियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कर सकेंगे।
- CO5: विद्यार्थी आधुनिक हिंदी कविता की भाषा, शिल्प, बिंब, प्रतीक एवं संवेदना का मूल्यांकन करते हुए विभिन्न कवियों और काव्यधाराओं के बीच अंतर्संबंधों को स्पष्ट कर सकेंगे।
- CO6: विद्यार्थी आधुनिक हिंदी कविता के अध्ययन के आधार पर स्वतंत्र आलोचनात्मक लेखन, प्रस्तुतीकरण तथा अकादमिक व्याख्या करने में सक्षम होंगे।
Modules and Readings
In this section, provide the name of the modules along with a brief description and references (Core and Suggested)
मॉड्यूल -1: आरंभिक आधुनिक हिंदी कविता
हिंदी की आरंभिक आधुनिक कविता को भारतेन्दु युगीन काव्य और द्विवेदी युगीन कविता में विभाजित किया जाता है। ब्रज भाषा से अलग आधुनिकता का वहन करने वाली काव्यभाषा की खोज से शुरू हुआ हिंदी का आधुनिक काल एक तरफ रीतिकाल से आधुनिकता में संक्रमण का गवाह है, दूसरी तरफ वह नए राष्ट्र के निर्माण और परंपरा के पुनर्मूल्यांकन के काम को भी अपने हाथ में लिए हुए है। इस मॉड्यूल में विद्यार्थी भारतेन्दु की विभिन्न प्रकार की कविताओं के माध्यम से कविता के आधुनिकता में संक्रमण को समझ सकेंगे। साथ ही प्रिय प्रवास और भारत भारती के चयनित अंशों के माध्यम से वे खड़ी बोली के काव्यभाषा के रूप में विकसित होने की प्रक्रिया तथा औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय चेतना के उभार को समझ सकेंगे।
निर्धारित विषय:
- भारतेन्दु हरिश्चंद्र - कवित्त, मुकरियाँ और ग़ज़लें
- अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ - प्रिय प्रवास (चयनित अंश)
- मैथिलीशरण गुप्त - भारत भारती (चयनित अंश)
सहायक पुस्तकें एवं सामग्री:
- भारतेन्दु हरिश्चंद्र, भारतेन्दु ग्रंथावली (सं. रामविलास शर्मा), राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली।
- अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, प्रिय प्रवास, लोकभारती प्रकाशन, प्रयागराज।
- मैथिलीशरण गुप्त, भारत-भारती, साहित्य सदन / लोकभारती संस्करण।
- रामविलास शर्मा, भारतेन्दु युग और हिंदी भाषा की विकास परंपरा, राजकमल प्रकाशन।
- नामवर सिंह, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, लोकभारती प्रकाशन।
माड्यूल - 2: छायावाद और उसका विस्तार
बीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक तक आते-आते खड़ी बोली हिंदी काव्यभाषा के रूप में स्थापित हो चुकी थी। छायावाद के आगमन ने हिंदी की काव्यात्मक संभावनाओं को नए रूप में सामने रखा। छायावादी काव्य को लेकर रोमांटिकता, रहस्यवाद, स्वाधीनता चेतना तथा आत्मकेंद्रित संवेदना जैसी बहसें लगातार होती रही हैं। इस मॉड्यूल में विद्यार्थी जयशंकर प्रसाद, निराला, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा की कविताओं के माध्यम से छायावादी काव्य की विशेषताओं से परिचित होंगे। साथ ही दिनकर, बच्चन और सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं के माध्यम से छायावादोत्तर काव्य के स्वर और राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्तियों को भी समझ सकेंगे।
निर्धारित विषय:
- जयशंकर प्रसाद - कामायनी (श्रद्धा सर्ग)
- निराला - राम की शक्तिपूजा, सरोज स्मृति तथा चयनित गीत
- सुमित्रानंदन पंत - चयनित कविताएँ
- महादेवी वर्मा - चयनित कविताएँ
- रामधारी सिंह दिनकर - रश्मिरथी (चयनित अंश)
- हरिवंशराय बच्चन - मधुशाला से चयनित रुबाइयाँ
- सुभद्रा कुमारी चौहान - चयनित कविताएँ
सहायक पुस्तकें एवं सामग्री:
- जयशंकर प्रसाद, कामायनी, लोकभारती प्रकाशन, दिल्ली।
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, निराला रचनावली (सं. नंदकिशोर नवल), राजकमल प्रकाशन।
- सुमित्रानंदन पंत, पल्लव, लोकभारती प्रकाशन, दिल्ली।
- महादेवी वर्मा, यामा, लोकभारती प्रकाशन, दिल्ली।
- रामधारी सिंह दिनकर, रश्मिरथी, लोकभारती प्रकाशन।
- हरिवंशराय बच्चन, मधुशाला, राजपाल एंड संस, दिल्ली।
- नामवर सिंह, छायावाद, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली।
माड्यूल 3 : प्रगतिवाद और प्रयोगवाद
छायावाद के भीतर से ही प्रगतिवादी कविता के अंकुर विकसित हुए। प्रगतिवादी कविता ने हिंदी कविता को गाँव, श्रम और सामाजिक यथार्थ की ओर मोड़ा तथा कविता की भाषा और संवेदना में व्यापक परिवर्तन किए। प्रगतिवाद के कवियों के बीच वैचारिक विविधता होने के बावजूद उनके भावबोध में गहरी समानता दिखाई देती है। प्रयोगवादी कविता सामाजिकता और वैयक्तिकता के अंतर्संबंधों को नए ढंग से प्रस्तुत करती है तथा ‘राहों के अन्वेषण’ की कविता के रूप में सामने आती है। इस मॉड्यूल में विद्यार्थी प्रगतिवादी और प्रयोगवादी कविता की वैचारिक बहसों और काव्य प्रयोगों से परिचित होंगे।
निर्धारित विषय:
- त्रिलोचन - नगई महरा
- नागार्जुन - हरिजन गाथा, प्रेत का बयान
- केदारनाथ अग्रवाल - हे मेरी तुम, टूटी हुई बिखरी हुई
- शमशेर बहादुर सिंह - लेकर सीधा नारा
- मुक्तिबोध - अँधेरे में, ब्रह्मराक्षस
- अज्ञेय - असाध्य वीणा, कलगी बाजरे की
सहायक पुस्तकें एवं सामग्री:
- त्रिलोचन, त्रिलोचन संचयिता, वाणी प्रकाशन।
- नागार्जुन, नागार्जुन रचनावली, राजकमल प्रकाशन।
- केदारनाथ अग्रवाल, केदारनाथ अग्रवाल: प्रतिनिधि कविताएँ, राजकमल प्रकाशन।
- शमशेर बहादुर सिंह, कुछ कविताएँ, राजकमल प्रकाशन।
- गजानन माधव मुक्तिबोध, चाँद का मुँह टेढ़ा है, भारतीय ज्ञानपीठ।
- अज्ञेय, तार सप्तक, भारतीय ज्ञानपीठ।
- मुक्तिबोध, नई कविता का आत्मसंघर्ष तथा अन्य निबंध, राजकमल प्रकाशन।
माड्यूल 4: नई कविता और उसके बाद
प्रगतिवादी कविता के भीतर से ही नई कविता का उभार हुआ। नई कविता ने पुराने प्रतिमानों को अस्वीकार करते हुए नए मूल्यबोध और नए काव्य प्रतिमानों की स्थापना का प्रयास किया। इस दौर की कविता में लघुमानव, लोकतंत्र, मोहभंग, विद्रोह, आपातकाल, सामाजिक संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता जैसे प्रश्न प्रमुखता से उभरते हैं। नई कविता के बाद की कविता में स्वर और वैचारिक स्थितियाँ अत्यंत विविध हैं। इस मॉड्यूल में विद्यार्थी इस दौर के कवियों की वैचारिक प्रतिबद्धताओं तथा उनके काव्यात्मक प्रतिफलनों को समझ सकेंगे।
निर्धारित विषय:
- श्रीकांत वर्मा - मगध
- रघुवीर सहाय - आत्महत्या के विरुद्ध, आपकी हँसी
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - कुआनो नदी
- राजकमल चौधरी - मुक्ति प्रसंग
- भवानी प्रसाद मिश्र - गीत फरोश
- शकुंत माथुर - दोपहरी, इतनी रात गए
सहायक पुस्तकें एवं सामग्री:
- श्रीकांत वर्मा, मगध, राजकमल प्रकाशन।
- रघुवीर सहाय, लोग भूल गए हैं, राजकमल प्रकाशन।
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, प्रतिनिधि कविताएँ, राजकमल प्रकाशन।
- राजकमल चौधरी, मुक्ति प्रसंग, राजकमल प्रकाशन।
- भवानी प्रसाद मिश्र, बुनी हुई रस्सी, किताबघर प्रकाशन।
- अज्ञेय (सं.), दूसरा सप्तक, भारतीय ज्ञानपीठ।
- विश्वनाथ त्रिपाठी, आधुनिक हिंदी कविता, लोकभारती प्रकाशन।
Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):
- Response Essay/PPT/Assignment-1 (25 Marks)
- Midterm Exam/PPT/Assignment-2/Project (25 Marks)
- End Term Exam (50 Marks)
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली