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दिल्ली और साहित्य

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Elective SOL2HN307 4

Course Coordinator(s) :  Dr. Mahendra Parajapati, Dr. Vijay Yadav

Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No 

Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

How does the course link with the vision of AUD? 

How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered? 

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य भारत की राजधानी दिल्ली की विशिष्ट साहित्य-परंपरा, साहित्य लेखन तथा साहित्यिक संस्थानों के इतिहास से अवगत कराना होगा। साहित्य की विभिन्न विधाओं में दिल्ली की उपस्थिति के विविध आयामों के बारे में विश्लेषणात्मक-तुलनात्मक रूपों में अवगत कराया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थी दिल्ली में भाषिक प्रयोगों, हिंदी में कविता के विकास, बोलियों की समृद्धि, विविध विधाओं के विकास, रंगमंच-पत्रकारिता के उदय आदि को व्यापक इतिहास दृष्टि से समझ सकेंगे। दिल्ली के सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sphere) तथा दिल्ली में नागरिक समाज (Civil Society) के उदय व विकास को व्यक्त एवं प्रेरित करने वाले साहित्य से संवाद स्थापित करेंगे। आधुनिक काल में राजनीतिक व समाजशास्त्रीय परिवर्तनों के परिणामस्वरूप साहित्य लेखन व संस्थान-निर्माण के केंद्र में दिल्ली के आने की वस्तुस्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

मुख्य रूप से हिंदी साहित्य काशी, प्रयाग, आगरा, मथुरा, पटना, भोपाल, जयपुर आदि स्थानों पर रचे गए साहित्य से पहचाना जाता रहा है। दिल्ली को भारत का महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक शहर मानने के बावजूद साहित्य में दिल्ली की छवियों पर अलग से विस्तारपूर्वक विचार व अध्यापन नहीं किया जाता है। हिंदी की बोलियों जैसे ब्रज, अवधी, कुमाउंनी, राजस्थानी, मैथिली, भोजपुरी आदि में रचित साहित्य के बारे में स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों को ज्ञानसंपन्न बनाते समय सहज ही उनके मस्तिष्क में हिंदी साहित्य जगत के भूगोल के बारे में खास तरह का बोध भी उत्पन्न कर दिया जाता है, जिसमें दिल्ली को विशेष जगह नहीं प्राप्त होती। दिल्ली को केवल लेखकों के आप्रवास और प्रवास से जोड़कर देखा व समझा जाता है।मध्यकाल के बाद उर्दू शायरी और अदब में मीर, सौदा, मुसहफी, गालिब, जौक के नाम हैं जिन्होंने दिल्ली की फारसी-उर्दू विरासत को परवान चढ़ाया। दिल्ली और आसपास बोली जाने वाली खड़ी बोली से हिंदी भाषा का मानकीकरण हुआ है। उर्दू तथा पंजाबी भाषाओं के असर से दिल्ली की हिंदी के प्रत्यय, परसर्ग, सर्वनाम, बहुवचन के प्रयोग में भिन्नता है, पर दिल्ली का भाषातंत्र खड़ी बोली साहित्य के लोकप्रिय रूपों को विकसित करता रहा है।

दिल्ली में 19वीं सदी में रंगमंच तथा पत्रकारिता का विकास हो रहा था। स्वतंत्रता के बाद साहित्य का केंद्र बनती चली गई। दिल्ली की इस विविधतापूर्ण साहित्यिक परंपरा के अध्यापन से दिल्ली के मूल निवासी अथवा यहाँ पर लंबे समय से बसे व शिक्षा प्राप्ति के लिए आने वाले वर्गों के विद्यार्थियों को महानगरीय संस्कृति से नया समृद्धकारी जुड़ाव का अनुभव होगा।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • यह कोर्स साहित्य लेखन में दिल्ली के विविध आयामों की अभिव्यक्ति के विश्लेषणात्मक, तुलनात्मक और ऐतिहासिक अध्ययन को प्रोत्साहित करेगा। 
  • विद्यार्थियों को दिल्ली की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना। 
  • साहित्य और दिल्ली के परस्पर संबंधों का अध्ययन। 
  • राजनीतिक-सामाजिक परिवर्तनों और साहित्य के संबंध को समझना। 
  • दिल्ली की साहित्यिक छवियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन। 
  • विद्यार्थियों में आलोचनात्मक दृष्टि का विकास करना।

Course Outcomes:  Course Outcomes describe what students are expected to know and be able to do by the end of a specific course. Each CO should be clearly observable and measurable. Mention 4-6 course outcomes.  At the end of the course, students will be able to:

  • CO1:  साहित्य परंपरा में दिल्ली के बहुलतापूर्ण चित्रण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
  • CO2:  दिल्ली में साहित्य की नई विधाओं के बारे में ज्ञान प्राप्त करना।
  • CO3:  हिंदी, हिंदुस्तानी, उर्दू के विकसित होते स्वरूप का अध्ययन।
  • CO4:  स्वातंत्र्योत्तर दिल्ली की महानगरीय छवि को समझना।
  • CO5:  दिल्ली के बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक स्वरूप की पहचान।
  • CO6:  साहित्यिक विश्लेषण में बहुस्तरीय दृष्टिकोण विकसित करना।

मॉड्यूल-1- दिल्ली का भाषा-जगत व भाषाशास्त्रीय स्वरूप

दिल्ली और साहित्य का संबंध दिल्ली में विभिन्न किस्म के भाषिक प्रयोगों के इतिहास के साथ जुड़ा है। उर्दू, पंजाबी, ब्रज, खड़ी बोली के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रीय बोलियों का यहां व्यापक प्रयोग होता है। भारतीय भाषाओं की विविधता को दिल्ली का सार्वजनिक जीवन प्रतिबिंबित करता है। भाषावैज्ञानिक दृष्टि से हिंदी-उर्दू को दो अलग भाषाएं नहीं माना जाता है। दिल्ली में उर्दू साहित्य के विकास का संबंध दिल्ली की सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। इस माड्यूल में दिल्ली की ऐतिहासिकता, भाषिक इतिहास, भाषा व आव्रजन के संबंध, भाषा व ऐतिहासिक परिवर्तनों के संबंध का समेकित रूप में विश्लेषण किया जाएगा। अध्ययन व अध्यापन की प्रक्रिया में दिल्ली के भाषायी मानचित्र का भाषावैज्ञानिक तथा साहित्यिक दृष्टि से मूल्यांकन किया जाएगा। इस माड्यूल में दिल्ली के इतिहास को पंजाबी व खड़ी बोली आदि भाषाओं की रचनाओं के संदर्भ में प्रस्तुत किया जाएगा। दिल्ली की साहित्यिक संस्कृति जिस प्रकार से हिंदू-मुस्लिम तहजीब के साथ-साथ विभिन्न भाषाओं के मिलेजुले रूप में विकसित हुई है, उसका अध्ययन होगा। दिल्ली की अराजकता व पतन के बीच उर्दू साहित्य का उत्थान हुआ। विभिन्न शैलियों व विधाओं जैसे शहरे आशोब, कसीदे, कित्तआत, मुसल्लस, मुखम्मस आदि का अध्यापन करते हुए उर्दू भाषा की देहलवियत का भी परिचय प्रदान किया जाएगा।

निर्धारित विषय:- 

  • दिल्ली का सांस्कृतिक-साहित्यिक इतिहास
  • मध्यकाल में खड़ी बोली का उदय व विकास
  • उर्दू का विकास, देहलवियत और प्रमुख लेखक
  • स्थानीय बोलियां और हिंदी का अंतर्सम्बन्ध 

सहायक पाठ्य सामग्री: 

  • हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में दिल्ली का योगदान, डा. नगेंद्र (संपादक), हिंदी बुक सेंटर, नई दिल्ली, 1995.
  • हिंदी साहित्य का इतिहास रामचंद्र शुक्ल, नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी, संस्करण-1999.
  • उर्दू साहित्य का इतिहास- एहतिशाम हुसैन, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 1996
  • दीवान-ए-गालिब- अली सरदार जाफरी (संपा), राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2018
  • दीवान-ए-मीर- अली सरदार जाफरी (संपा), राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2018
  • The Last Mushairah of Delhi (English Translation of Delhi kiAakhiriShama)-FarhatullahBaig. Orient Longman, Delhi
  • Ghalib: Life, Letters and Ghazals- Ralph Russell OUP, Delhi. 20017
  • दिल्ली जो एक शहर है, महेश्वर दयाल, हिन्दी अकादमी, दिल्ली, 2013. 
  • दिल्ली और हिन्दी साहित्य, रामशरण गौड़ और निशा निशांत, हिन्दी अकादमी, दिल्ली, 2001.

मॉड्यूल-2-दिल्ली और आधुनिक साहित्य

इस माड्यूल में देश के इतिहास को प्रभावित करने वाली घटना 1857 के हिंदी साहित्य पर प्रभाव का विशेष अध्ययन होगा। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का हिंदी साहित्य पर जो प्रभाव पड़ा उसका जातिगत, लैंगिक, क्षेत्रीय आयामों का अध्यापन किया जाएगा। इसी माड्यूल में दिल्ली के आसपास के इलाकों में उपन्यास विधा के जन्म का विवेचन होगा। साथ ही दिल्ली को केंद्र में रखकर विभिन्न विषयों पर रचित उपन्यासों का पाठगत विश्लेषण-विवेचन किया जाएगा। प्रमुख उपन्यासों के साथ ही कहानियां भी सम्मिलित होंगी जो दिल्ली के विविध रूपों तथा एक महानगर के रूप में उसकी चुनौतियों के बारे में विद्यार्थियों को परिचित कराएंगी। अकेलेपन तथा मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाओं पर केंद्रित साहित्य के विषय मे परिचित कराया जाएगा। प्रमुख घटनाओं जैसे आपातकाल व 1984 की सांप्रदायिक हिंसा पर केंद्रित साहित्य का सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाएगा। शहर के हाशिए के वर्गों जैसे मिस्त्री-मजदूर, निर्वासित, हिंसा के शिकार, वेश्या, मनोरोगी, भिखारी आदि की साहित्य में उपस्थिति का मूल्यांकन होगा।

निर्धारित विषय

  • उपन्यास साहित्य (कोई दो उपन्यास)
  • बसंती (भीष्म साहनी)
  • अंधेरे बंद कमरे (मोहन राकेश)
  • पचपन खंभे लाल दीवारें (ऊषा प्रियंवदा)
  • रात का रिपोर्टर (निर्मल वर्मा )
  • कनॉट प्लेस (जगदीश चतुर्वेदी )

कहानियों में दिल्ली

  • काली सलवार (मंटो),
  • खोई हुई दिशाएं व दिल्ली में एक मौत (कमलेश्वर), -दिल्ली की दीवार (उदय प्रकाश)
  • क्षय (मन्नू भंडारी)

सहायक पाठ्य सामग्री:

माड्यूल- 3 हिंदी कविता और अन्य गद्य विधाएं

हिंदी की आधुनिक कविता में दिल्ली की उपस्थिति, उसकी विविध छवियां, आतंक व संशय से जुड़े मनोविज्ञान की अभिव्यक्ति हिंदी कविता तथा अन्य गद्द्य विधाओं में निरंतर होती रही है। इस माड्यूल में आधुनिक हिंदी कविता में देश की राजधानी व महानगर के रूप में हिंदी कविता पर कैसी छाप डाली, इसका विस्तृत विवेचन-विश्लेषण किया जाएगा। दिल्ली के बाहर से आए रचनाकारों के मन में दिल्ली को लेकर किस प्रकार का संशय व अलगाव बोध रहा, इसका अध्ययन करते हुए प्रवास, विस्थापन, निर्वासन, अवगाव व विडंबना आदि से जुड़ी साहित्यिक प्रतीक शैली व तत्संबंधी अनुभूतिगत विशिष्टताओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया जाएगा। वर्ग, लैंगिक स्थिति व जाति के प्रश्न को केंद्र में रखा जाए। इसी खंड में संस्मरण, आत्मकथा, निबंध, नाटक व पत्रलेखन की विधा में व्यक्त दिल्ली के अंतरंग व बहिरंग का भी अध्यापन किया जा सकेगा।

निर्धारित विषय

-कविता

  • रामधारी सिंह दिनकर की काव्यकृति, दिल्ली और मास्को, भारत का यह रेशमी नगर।
  • दाराशिकोह (रामविलास शर्मा)
  • कुंभनदास के प्रति तथा जेएनयू में हिंदी (केदारनाथ सिंह)

-अन्य गद्य विधाएं

  • धर्मवीर भारती की व्यंग्य रचना डाकखाना मेघदूत शहर दिल्ली
  • राजेंद्र यादव द्वारा संपादित पुस्तक 'अभी दिल्ली दूर है' में भीष्म साहनी, कृष्णा सोबती, रघुवीर सहाय, अजित कुमार, शानी व हंसराज रहबर के दिल्ली संबंधी संस्मरणात्मक आलेख ।
  • 'दिल्ली टी हाउस' (संपा बलदेव वंशी) में संकलित दिल्ली के काफी हाउस से जुड़े संस्मरण।

सहायक पाठ्य सामग्री:

  • अभी दिल्ली दूर है- राजेंद्र यादव (संपादक), प्रवीण प्रकाशन, नई दिल्ली, 1995
  • दिल्ली टी हाउस बलदेव वंशी (संपादक), नेशनल पब्लिशंग हाउस, नई दिल्ली, 2009
  • हिंदी हास्य व्यंग्य संकलन- श्रीलाल शुक्ल (संपादक), एनबीटी, नई दिल्ली, 2002
  • दिल्ली और मास्को रामधारी सिंह दिनकर https://kavitakosh.org/
  • भारत का यह रेशमी नगर, https://kavitakosh.org/ 

माड्यूल-4 दिल्लीः पत्रकारिता, रंगमंच, संस्थाएं

दिल्ली में देश के दूसरे हिंदी भाषी हिस्सों की तुलना में हिंदी पत्रकारिता का आरंभ में धीमी गति से विकास हुआ। पर धीरे-धीरे कई महत्त्वपूर्ण पत्र यहीं से प्रकाशित होने लगे। इस माड्यूल में दिल्ली को केंद्र में रखकर खड़ी बोली हिंदी की पत्रकारिता के विकास का शिक्षण किया जाएगा। साथ ही रंगमंच पर पौराणिक, देशभक्ति, समाजसुधार के विषयों पर केंद्रित नाटक परंपरा के विकास का अध्यापन किया जाएगा। भारत की राष्ट्रीयता के विभिन्न पक्षों व अंतर्विरोधों पर इन नाटकों के असर का विवेचन होगा। इसी माड्यूल में स्वतंत्रता के पश्चात दिल्ली में समाजवादी नेहरूवादी विचारधारा के प्रभाव, नई साहित्यिक संस्थाओं, पत्र-पत्रिकाओं तथा आंदोलनों के माध्यम से साहित्य की नवीन इबारत लिखे जाने के इतिहास का वस्तुगत अध्यापन होगा।

निर्धारित विषय-

  • दिल्ली में पत्रकारिता का उदय और विकास
  • पारसी रंगमंच, शौकिया रंगमंच, बाल एकांकी और रेडियो नाटक
  • काफी हाउस संस्कृति, नवीन साहित्यांदोलन, साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं का इतिहास
  • स्वतंत्रता के पश्चात दिल्ली में साहित्यिक संस्थाओं की स्थापना का इतिहास

सहायक पाठ्य सामग्री: 

  • हिंदी नाटक, उद्भव और विकास दशरथ ओझा, राजपाल एंड सन्स, दिल्ली, 2008
  • पारसी हिंदी रंगमंच लक्ष्मीनारायण लाल, राजपाल एंड सन्स, दिल्ली, 1973
  • रंग साक्षी- जयदेव तनेजा, तक्षशिला प्रकाशन, दिल्ली, 2015

Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Response Essay/PPT/Assignment-1 (25Marks)
  • Midterm Exam/PPT/Assignment-2/Project (25 Marks)
  • End Term Exam (50 Marks)
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