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हिन्दी सिनेमा और भारतीय ज्ञान परम्परा

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1MI202 4

Course Coordinator(s)  

Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No 

Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

How does the course link with the vision of AUD? 

How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered? 

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

हिन्दी सिनेमा और भारतीय ज्ञान परम्परा का यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को सिनेमा के माध्यम से भारतीय ज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक परम्पराओं की समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करेगा। इस पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा से सम्बद्ध विभिन्न दार्शनिक अवधारणाओं, ग्रंथों, शिक्षण संस्थाओं तथा वैचारिक परम्पराओं को हिन्दी सिनेमा के माध्यम से समझने का प्रयास किया जाएगा। सिनेमा एक प्रभावी एवं लोकप्रिय माध्यम होने के कारण जटिल और गूढ़ विषयों को सहज एवं दृश्यात्मक रूप में प्रस्तुत करने की क्षमता रखता है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय दर्शन, ज्ञान-दृष्टि और मानवीय मूल्यों के प्रति एक प्रारंभिक एवं संवेदनशील समझ विकसित करने में सहायक होगा।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • सिनेमा के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा की आधारभूत समझ विकसित करना। 
  • हिन्दी सिनेमा के जरिए जटिल दार्शनिक एवं सांस्कृतिक विषयों को सरल और दृश्यात्मक रूप में समझने की क्षमता विकसित करना। 
  • भारतीय दार्शनिक चिंतन और उससे जुड़े मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील दृष्टि विकसित करना। 
  • सिनेमा और भारतीय ज्ञान परम्परा के अंतर्संबंधों का अध्ययन कर विद्यार्थियों में आलोचनात्मक समझ विकसित करना। 
  • विद्यार्थियों में सिनेमा के अध्ययन के माध्यम से सृजनात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण का विकास करना।

Course Outcomes:  Course Outcomes describe what students are expected to know and be able to do by the end of a specific course. Each CO should be clearly observable and measurable. Mention 4-6 course outcomes.  At the end of the course, students will be able to:

  • CO1 : विद्यार्थी सिनेमा के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा एवं दर्शन परंपरा से परिचित हो सकेंगे।
  • CO2 : विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परंपरा से सम्बद्ध विभिन्न ग्रंथों, शिक्षण संस्थाओं तथा उनसे जुड़े सिद्धांतों की समझ विकसित कर सकेंगे।
  • CO3 : विद्यार्थी हिन्दी सिनेमा के माध्यम से दार्शनिकों और उनसे जुड़े ज्ञान-दर्शनों की परिचयात्मक समझ विकसित कर सकेंगे।
  • CO4 : विद्यार्थी सिनेमा के अध्ययन के आधार पर सृजनात्मक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित कर सकेंगे।

Modules and Readings

In this section, provide the name of the modules along with a brief description and references (Core and Suggested)

मॉड्यूल – 1 हिंदी सिनेमा का इतिहास     

पहले माड्यूल में विद्यार्थी हिदीं सिनेमा के संक्षिप्त इतिहास को समझेंगे। इसमें कला के रूप में सिनेमा का विकास और उसकी ऐतिहासिक यात्रा पर विचार किया जाएगा। मूक सिनेमा से आरंभ हुए सिनेमा की याता आज डिजिटल माध्यम तक आ चुकी है। इस माड्यूल में सिनेमा के इस बदलते स्वरुप को समझने में में सहायता मिलेगी। 
 

निर्धारित विषय : 

क)   कला के रूप में सिनेमा का विकास 

ख)  हिंदी सिनेमा की ऐतिहासिक यात्रा 

  • मूक सिनेमा 
  • सवाक सिनेमा 
  • रंगीन सिनेमा (सिनेमा का नया रंग)
  • आज़ादी के बाद का सिनेमा 
  • समान्तर सिनेमा 
  • वैश्वीकरण के दौर का सिनेमा 
  • डिजिटल युग का सिनेमा

ग) भारतीय समाज और सिनेमा  

घ) हिंदी सिनेमा में भारतीय ज्ञान परम्परा की संकल्पना

सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें  :- 

  • हिंदी सिनेमा का इतिहास, संजीव श्रीवास्तव, प्रकाशन विभाग, दिल्ली  
  • भारतीय ज्ञान परंपरा और साहित्य, संपादक, डॉ.दिलीप मेहरा, लेख, भारतीय ज्ञान परम्परा और सगुण भक्ति, प्रो. विनय कुमार सिंह, विकास प्रकाशन, कानपुर
  • हिंदी सिनेमा की यात्रा, (सं),पंकज शर्मा,अनन्य प्रकाशन, दिल्ली
  • भारतीय सिनेमा: एक अनंत यात्रा, प्रसून सिन्हा, श्री नटराज प्रकाशन, दिल्ली 

मॉड्यूल 2 :  मूक सिनेमा और भारतीय ज्ञान परम्परा  

भारतीय सिनेमा के इतिहास को उठाकर देखें तो आरंभिक सिनेमा महत्वपूर्ण है, जिसे मूक सिनेमा के नाम से भी जाना जाता है। मूक सिनेमा की पृष्ठभूमि भारतीय पौराणिक आख्यानों और पात्रों पर केन्द्रित है। दादा साहब फाल्के पहली ने फिल्म राजा हरिश्चंद का निर्माण किया तो उनके मन में भारत की ज्ञान परम्परा को प्रसारित करने वाले पौराणिक कहानियों का ही ध्यान था। मूक सिनेमा की आरंभिक फिल्मों में भारतीय समाज को प्रभावित करने वाले पात्रों जिसमें राम, कृष्ण, महात्मा बुद्ध आदि प्रमुख पात्र ही केंद्र में। इन फिल्मों में इनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाओं को केन्द्रित कर फिल्म का निर्माण किया गया है। अकेले रामकथा पर लगभग पचास फिल्मों का निर्माण हुआ। इन फिल्मों ने भारत की सद्भावना, नैतिक शिक्षा, पारम्परिक ज्ञान प्रणाली, गुरू शिष्य परम्परा और संस्कृतिबोध का विस्तार किया। इस माड्यूल में विद्यार्थी मूक सिनेमा के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा की वैचारिकी को समझ पाएँगे।

निर्धारित विषय: 

  • रामायण और महाभारत कथा का आधार  
  • पौराणिक पात्रों तथा आख्यानों का समावेश  
  • सत्य, नैतिकता और सद्भावना की अभिव्यक्ति 
  • लोकजीवन, लोकसंस्कृति, लोकभाषा और लोककथाएँ

सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :-

  • साहित्य का धर्म, श्रीधर पराड़कर, अखिल भारतीय साहित्य न्यास, दिल्ली  
  • समाज, संस्कृति और सिनेमा (सं), प्रो. सत्येकेतु सांकृत, हंस प्रकाशन, दिल्ली
  • हिन्दी सिनेमा और उसका अध्ययन, प्रो. रमा हंस प्रकाशन, दिल्ली

माड्यूल 3 हिंदी सिनेमा में भारतीय दर्शन एवं चिन्तन 

भारत की चिंतन परम्परा ने सम्पूर्ण विश्व को गहरे अर्थों में प्रभावित किया है। भारतीय अध्यात्मिक चेतना, धार्मिक मान्यताएं, सामाजिक चिंतन और सांस्कृतिक भावबोध ने सम्पूर्ण संसार को ज्ञान दिया। इस माड्यूल में फिल्मों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की सनातनी चिंतन परम्परा और जीवन में उसकी उपयोगिता को समझने का अवसर मिलेगा। इस माड्यूल में उन फिल्मों का अध्यन किया जाएगा जिन्होंने भारतीय चिंतन परम्परा को आम जनता के बीच सहज भाषा में ले जाने का प्रयास किया।  
      
निर्धारित विषय 

  • आध्यात्मिक चिंतन  - संत ज्ञानेश्वर, मीरा  
  • धार्मिक  चिन्तन – जय माँ संतोषी, रामसेतु 
  • सामाजिक चिंतन – अछूत कन्या, ओह माई गॉड 
  • सांस्कृतिक चिंतन – पद्मावत, छावा  

सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :- 

  • भारत हिंदी सिनेमा में साहित्यिक विमर्श, डॉ. रमा, हंस प्रकाशन, दिल्ली 
  • हिंदी सिनेमा का इतिहास, मनमोहन चढ्ढा, सचिन प्रकाशन, दिल्ली 

माड्यूल 4 : भारतीय ज्ञान परम्परा के नए आयाम और हिंदी सिनेमा

भारतीय ज्ञान परम्परा अब केवल वेदों, पुराणों और अन्य वैदिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है बल्कि अपनी सीमाओं और जड़ताओं को तोड़ते हुए आधुनिक समाज का हिस्सा बन चुकी है। भारतीय ज्ञान परम्परा आधुनिक वैचारिकी से तालमेल हमेशा बना रहा जिसके कारण तमाम अवरोधों के बाद भी यह आज जीवित ही नहीं बल्कि सभी को शिक्षित करने में सक्षम भी है। इस माड्यूल में भारतीय ज्ञान परम्परा के उन पक्षों को समझने का अवसर मिलेगा जिससे उसकी नवीन वैचारिकी का भी पता चलेगा। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, राष्ट्रभक्ति केन्द्रित हिंदी सिनेमा, भारतीय भावबोध को नया स्वर देने वाला सिनेमा, नए राष्ट्र के निर्माण में ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा प्रणाली डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आदि भी ज्ञान परम्परा के नए मानक हैं जिनके माध्यम से हम भारतीय ज्ञान परम्परा के नए स्वरुप को समझ सकेंगे साथ ही युवा से आसानी से जुड़ सकेंगे।

निर्धारित विषय :- 

  • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद – पूरब और पश्चिम, स्वदेश   
  • हिंदी सिनेमा में भारतबोध – गाइड 
  • ज्ञान, विज्ञान और नव राष्ट्रनिर्माण- मिशन मंगल 
  • शिक्षा प्रणाली का नया दृष्टिकोण – तारे जमीं पर, नील बटे सन्नाटा  

सहायक पाठ सामग्री एवं पुस्तकें :- 

  • शेक्सपियर और सिनेमा :महान रचनाकार की कृतियों पर निर्मित फिल्मों का आकलन, विजय पाडलकर, अनुवादक, डॉ. कृष्ण कुमार उपाध्याय, संवाद प्रकाशन, दिल्ली 
  • जवरीमल्ल पारख, जनसंचार माध्यमों का वैचारिक परिप्रेक्ष्य, ग्रंथशिल्पी प्रकाशन, दिल्ली
  • सिनेमा: कल, आज, कल, विनोद भारद्वाज, वाणी प्रकाशन, वाणी प्रकाशन
  • भारत में हिंदी सिनेमा, डॉ. दीनानाथ साहनी, बिहार हिंदी ग्रन्थ अकादमी, पटना  

Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Response Essay/Assignment-1 (25 Marks)
  • Midterm Exam/PPT/Assignment-2 (25 Marks)
  • End Term Exam (50 Marks)
     
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