| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core | 4 |
Course Coordinator(s) : प्रो.सत्यकेतु सांकृत, डॉ.महेन्द्र प्रजापति, डॉ.गीता पांडेय
1. Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
2.Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
3.No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
4. Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
5. How does the course link with the vision of AUD?
यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय की उस शैक्षिक दृष्टि से गहरे रूप में जुड़ा हुआ है जो बहुविषयक अध्ययन, आलोचनात्मक चिंतन, भारतीय समाज और ज्ञान-परंपराओं की समावेशी समझ तथा मानवीय मूल्यों के विकास पर बल देती है। भारतीय ज्ञान परंपरा का यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय बौद्धिक, दार्शनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चिंतन की दीर्घ परंपरा से परिचित कराते हुए उनमें संवेदनशील, विवेकपूर्ण और आलोचनात्मक दृष्टि विकसित करने में सहायक होगा। यह पाठ्यक्रम भारतीय ज्ञान-संपदा को समकालीन संदर्भों में समझने और उसके प्रति सार्थक बौद्धिक संवाद स्थापित करने की क्षमता विकसित करता है, जो विश्वविद्यालय की व्यापक शैक्षिक दृष्टि के अनुरूप है।
6.How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
यह पाठ्यक्रम बी.ए. हिन्दी के चतुर्थ वर्ष तथा एम.ए. हिन्दी के द्विवर्षीय कार्यक्रम के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक साझे पाठ्यक्रम के रूप में प्रस्तावित है
पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)
स्नातकोत्तर प्रथम सत्र के विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परम्परा भाग -1 में विभिन्न भारतीय दर्शनों की अवधारणा एवं स्वरुप से परिचित हुए हैं। इसी पाठ्यक्रम की अगली श्रृंखला 'भारतीय ज्ञान परम्परा भाग -2' के अंतर्गत भारतीय शिक्षण प्रणाली, चिंतन पद्धति का संक्षिप्त अध्ययन अपेक्षित रहेगा। भारतीय शिक्षा के इतिहास पर दृष्टिपात करने से ज्ञात होता है प्राचीन काल में शिक्षा का मूल उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति रहा है। इस उद्देश्य के अनुरुप शिक्षा का स्वरुप और विषय निर्धारित किये जाते थे। आज जरूरत है आध्यात्म को विज्ञान से, परमार्थ को व्यवहार से परंपरा को आधुनिकता से जोड़ते हुए वैयक्तिक सामाजिक एवं वैश्विक जीवन में समरसता के लिये एकता के सूत्र के खोजने की। प्रस्तावित पाठ्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है विद्यार्थियों को वेदों, उपनिषदों, स्मृतियों और भारत की प्राचीन जीवन शैली जानने के लिए प्रेरित करना क्योंकि भारत ने पूरे विश्व को एक परिवार माना है और वसुधैव कुटुंबकम का दर्शन हमेशा से इसके मूल में रहा है।
पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
- भारतीय ज्ञान परम्परा के अंतर्गत भारतीय शिक्षण प्रणाली, चिंतन पद्धति से विद्यार्थियों को परिचित कराना
- वेद, उपनिषद तथा भारतीय जीवन-दर्शन के मूल सिद्धांतों की प्रारंभिक समझ विकसित करना।
- भारतीय शिक्षा परंपरा के उद्देश्यों, स्वरूप और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को समझाना।
- भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित आध्यात्मिक, नैतिक और मानवीय मूल्यों के प्रति विद्यार्थियों में संवेदनशीलता विकसित करना।
- परंपरा और आधुनिकता, आध्यात्म और विज्ञान तथा व्यवहार और परमार्थ के अंतर्संबंधों को समझने की दृष्टि विकसित करना।
- ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसी भारतीय चिंतनधारा के माध्यम से वैश्विक समरसता और मानवीय एकता के भाव को विकसित करना।
Course Outcomes:
- CO1 : विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परम्परा के अंतर्गत भारतीय शिक्षण प्रणाली और चिंतन पद्धति की मूल अवधारणाओं को समझ सकेंगे।
- CO2 : विद्यार्थी वेद, उपनिषद तथा भारतीय जीवन-दर्शन के प्रमुख सिद्धांतों से परिचित हो सकेंगे।
- CO3 : विद्यार्थी भारतीय शिक्षा परंपरा के स्वरूप, उद्देश्यों और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व का विवेचन कर सकेंगे।
- CO4 : विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित नैतिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों को समझ सकेंगे।
- CO5 : विद्यार्थी भारतीय परंपरा और आधुनिक जीवन के मध्य संबंधों का विश्लेषण कर सकेंगे।
- CO6 : विद्यार्थी ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसी भारतीय चिंतनधाराओं के आधार पर वैश्विक समरसता और मानवीय एकता की दृष्टि विकसित कर सकेंगे।
Modules and Readings
माड्यूल 1: भारतीय शिक्षण परम्परा
प्रस्तावित मॉड्यूल में भारतीय शिक्षा परंपरा के अंतर्गत प्राचीन भारत के विभिन्न आचार्य एवं चिंतकों का अध्ययन कराया जाएगा। इस मॉड्यूल के अंतर्गत चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, वराहमिहिर, भास्कराचार्य, पाणिनि, पंतजलि, शंकरदेव, मैत्रेयी एवं गार्गी जैसे अनेक महान विद्वानों द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतो का संक्षिप्त अध्ययन कराया जाएगा। इन विद्वानों द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत वैश्विक स्तर पर मौलिकता के वाहक हैं।
निर्धारित विषय:
- चरक (चिकित्साशास्त्र)
- सुश्रुत ( शल्य चिकित्सा)
- आर्यभट्ट (गणित)
- वराहमिहिर (खगोल)
- भास्कराचार्य ( भौतिकी)
- पाणिनि (व्याकरण)
- पतंजलि (योग और व्याकरण)
- शंकरदेव (ललित कला )
- मैत्रेयी (दार्शनिक)
- गार्गी (ब्रह्मवादिनी)
सहायक पाठ्य सामग्री :-
- भारतीय चिंतन परंपरा : नए आयाम, नई दिशाएं - कृष्णदत्त पालीवाल, सस्ता साहित्य मंडल।
- भारतीय चिंतन - रांगेय राघव, किताब महल।
- भारतीय चिंतन परंपरा - के. दामोदरन, पीपल पब्लिकेशन हाउस
- भारतीय दर्शन - सर्वपल्ली राधा कृष्णन, राजपाल
- भारतीय दर्शन का इतिहास - एस.एन. दास गुप्ता, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी
- भारतीय दर्शन की रूपरेखा - एम. हिरिन्ना, राजकमल प्रकाशन
- भारतीय दर्शन, बलदेव उपाध्याय, चौखम्भा ओरियन्टालिया, वराणसी, 1976
माड्यूल 2:
प्रस्तावित मॉड्यूल में विद्यार्थियों को भारतीय परम्परा एवं संस्कृति से सम्बद्ध जीवन शैली, नैतिक मूल्यों से परिचित कराने की कोशिश की जाएगी जिसका आधार पंचतंत्र ( आचार्य विष्णुशर्मा), जातक कथाएँ (बौद्ध कथाएँ), हितोपदेश (नारायण पंडित), कथासरितसागर (आचार्य सोमदेव) जैसे ग्रन्थ रहेंगे। इन ग्रंथों में केवल नैतिक मूल्यों पर केंद्रित या आदर्शवादी कथा - कहानियाँ ही नहीं हैं बल्कि ये ग्रन्थ भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा का अमूल्य दस्तावेज हैं जिसमें भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के विभिन्न आयामों का रोचक ढंग से उल्लेख किया गया है। ये ग्रन्थ ज्ञान के विभिन्न स्त्रोतों सशक्त उदाहरण पेश करते हैं जिसके माध्यम से विद्यार्थी भारतीय मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में एक नई समझ विकसित कर सकेंगे।
निर्धारित विषय:
- पंचतंत्र - आचार्य विष्णु शर्मा
- जातक कथाएं - बौद्ध कथाएं
- हितोपदेश- नारायण पंडित
- कथासरित्सागर- आचार्य सोमदेव (संक्षिप्त परिचय )
सहायक पुस्तकें एवं सामग्री :
- कथासरितसागर एक सांस्कृतिक अध्ययन https://www.sanskrit.nic.in/books_archive/65_Kathasarit_Sagar_Ek_Sanskrit_Adhyayana.pdf
- पंचतंत्र https://hindikahani.hindi-kavita.com/HK-Panchtantra.php
- हितोपदेश https://mlsu.ac.in/econtents/4424_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%20Hitopadesh%20Mitra%20Labha.pdf
मॉड्यूल 3 -प्रमुख आधुनिक चिन्तक
प्रस्तावित माड्यूल के अंतर्गत विद्यार्थियों को आधुनिक चिंतकों के विचारों और दर्शन से परिचित कराया जाएगा। भारतीय ज्ञान परम्परा में जितना स्थान प्राचीन ज्ञान परंपरा का है वही स्थान आधुनिक चिंतकों का भी है। इन चिंतकों ने प्राचीन परम्पराओं को अपनाते हुए भारतीय जीवन पद्धति के प्रति अपनी एक नई दृष्टि समाज के समक्ष प्रस्तुत की है। प्रस्तुत मॉड्यूल में प्रमुख आधुनिक चिंतकों एवं विचारकों का अध्ययन अपेक्षित रहेगा ताकि विद्यार्थी प्राचीन भारतीय परम्परा से परिचित होते हुए आधुनिक भारतीय विचारों से अवगत हो सकें और दोनों में समन्वय स्थापित कर सकें।
निर्धारित विषय :–
- विवेकानंद
- महर्षि अरविंद
- स्वामी दयानंद सरस्वती
- राजा राममोहन राय
- रवीन्द्र नाथ टैगोर
- महात्मा गांधी
- डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
- मदन मोहन मालवीय
- सहजानन्द
- बाल गंगाधर तिलक
- ईश्वरचंद्र विद्यासागर
सहायक पाठ्य सामग्री एवं ग्रन्थ :-
- आधुनिक भारतीय चिंतन, डॉ.विश्वनाथ नरवणे
- आधुनिक भारतीय राजनीतिक चिंतन, डॉ.विश्वनाथ प्रसाद वर्मा
माड्यूल 4
प्रस्तुत मॉड्यूल में आधुनिक पाठ के माध्यम से बदलती हुई भारतीय परम्परा एवं संस्कृति से विद्यार्थियों को अवगत कराया जाएगा। निर्धारित पाठ के आधार पर विद्यार्थियों को समाज, राजनीति, अर्थ, साहित्य, संस्कृति, नैतिक मूल्यों की बदलती हुई परिभाषा आदि से नए रूप में परिचित कराया जाएगा जिससे विद्यार्थी प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं नई भारतीय ज्ञान परम्परा का न केवल तुलनात्मक अध्ययन करने में सक्षम हों बल्कि इसके प्रति अपनी एक स्पष्ट समझ और दृष्टि का निर्माण भी कर सकें।
निर्धारित विषय :
- संस्कृति के चार अध्याय - रामधारी सिंह दिनकर (भूमिका, भाग -1)
- संपत्तिशास्त्र - महावीर प्रसाद द्विवेदी (चुनिंदा अंश)
- हिन्द स्वराज - महात्मा गांधी
- जातिभेद का उच्छेद अंबेडकर (चुनिंदा अंश)
- कोलम्बो से अल्मोड़ा व्याख्यान - विवेकानंद (चुनिंदा अंश)
- रमणीय वृक्ष - धर्मपाल
- प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक - गुणाकर मुले
- भारतीय संस्कृति के मूलाधार- श्री अरविन्द
सहायक पाठ्य सामग्री :-
- संस्कृति के चार अध्याय - रामधारी सिंह दिनकर, लोकभारती प्रकाशन, दिल्ली, 2011
- संपत्तिशास्त्र-महावीर प्रसाद द्विवेदी, epustkalya.com
- हिंदी स्वराज - महात्मा गांधी, हिंदी पॉकेट बुक्स,2015
- जातिभेद का उच्छेद - डॉ बी. आर.अंबेडकर, epustkalya.com
- कोलम्बो से अल्मोड़ा व्याख्यान - स्वामी विवेकानंद, epustkalya.com
- इतिहास, समाज और परंपरा: धर्मपाल के आलेख, लक्ष्मीनारायण मित्तल (संकलन और संपादन), राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली, 2022
- भारतीय संस्कृति के मूलाधार https://dn710300.ca.archive.org/0/items/in.ernet.dli.2015.443985/2015.443985.Bharatiy-Sanskriti.pdf
Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):
- Response Essay/PPT/Assignment-1 ( 25Marks)
- Midterm Exam/PPT/Assignment-2/Project (25 Marks)
- End Term Exam (50 Marks)
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली