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भारतीय एवं विश्व साहित्य

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1EL303 4

Course Coordinator(s) :      हिन्दी संकाय

1. Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No

2. Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

3. No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

4. Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

5. How does the course link with the vision of AUD?

6. How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को साहित्य की व्यापक दुनिया से परिचित कराने के उद्देश्य से निर्मित है। अतः इसमें स्वाभाविक रूप से साहित्य की विभिन्न विधाओं की विविधता, उसे प्रभावित करने वाली प्रमुख विचारधाराओं की उपस्थिति तथा विश्व के सामाजिक-भौगोलिक संदर्भों की बहुलता को समाहित किया गया है। इस पाठ्यक्रम में हिंदी के साथ जुड़ी हुई उर्दू तथा हिंदी-उर्दू की मुश्तरका सांस्कृतिक भूमि को प्रतिबिंबित करने वाले साहित्य का समावेश किया गया है। इसके माध्यम से विद्यार्थी हिंदी और उर्दू, दोनों के भीतर ऐसे साहित्य से परिचित होंगे, जिनके द्वारा वे नवजागरण, विभाजन तथा स्वातंत्र्योत्तर काल में मानव अस्तित्व से संबंधित समस्याओं को समझ सकेंगे। इसके साथ ही हिंदी-उर्दू भाषी क्षेत्र के बाहर विकसित भारतीय साहित्य की उपलब्धियों के माध्यम से विद्यार्थी अपने परिचित साहित्य के ताने-बाने की जटिलताओं और उनके समाधान से भी परिचित हो सकेंगे। इससे उन्हें भारतीय समाज की विषमताओं से उत्पन्न विक्षोभ की अभिव्यक्तियों को समझने में भी सहायता मिलेगी। भारत विकासशील देशों की उपनिवेशवाद-विरोधी चेतना का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है। अतः इस पाठ्यक्रम में इस संदर्भ से संबंधित साहित्य का भी समावेश किया गया है। विकासशील देशों का यह उपनिवेशवाद-विरोधी परिदृश्य सांस्कृतिक अभिव्यक्ति में बहुस्वरीयता से युक्त है, जिसे विद्यार्थी पाठ्यक्रम में सम्मिलित पाठों के माध्यम से पहचान सकेंगे। इसके अतिरिक्त, इस पाठ्यक्रम में विश्व साहित्य के ऐसे पाठों को भी शामिल किया गया है, जो आधुनिकता की विडंबनाओं से परिचित कराते हैं, ताकि विद्यार्थी साहित्य की देशगत एवं कालगत विविधताओं के साथ-साथ उसके शाश्वत प्रश्नों का भी सम्यक् बोध प्राप्त कर सकें।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • विद्यार्थियों को हिंदी क्षेत्र की मुश्तरका साहित्यिक तहजीब से परिचित कराना तथा उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक आधार को समझने की क्षमता विकसित करना।
  • भारतीय साहित्य की परिकल्पना, उसकी बहुभाषिकता एवं बहुसांस्कृतिक स्वरूप की आलोचनात्मक पड़ताल करने की क्षमता विकसित करना।
  • उपनिवेशवाद-विरोधी चेतना से संबंधित साहित्यिक अभिव्यक्तियों का परिचय कराते हुए उनके सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों को समझने में सक्षम बनाना।
  • विश्वयुद्धोपरांत उत्पन्न मानवीय संकट तथा आधुनिकता की आलोचना से जुड़े साहित्यिक पाठों के माध्यम से समकालीन मानवीय प्रश्नों की समझ विकसित करना।
  • साहित्य के माध्यम से भारतीय एवं वैश्विक समाज की विविधताओं, अंतर्विरोधों और सांस्कृतिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करना।

इस पाठ्यक्रम के सफल समापन के बाद विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • CO1 :विद्यार्थी हिंदी क्षेत्र की मुश्तरका साहित्यिक तहजीब को समझ सकेंगे, उसकी प्रमुख विशेषताओं की पहचान कर सकेंगे तथा उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों की व्याख्या कर सकेंगे।
  • CO2:    विद्यार्थी भारतीय साहित्य की परिकल्पना, उसकी बहुभाषिकता एवं बहुसांस्कृतिक स्वरूप का विश्लेषण कर सकेंगे तथा ‘विविधता में एकता’ के सिद्धांत को साहित्यिक उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट कर सकेंगे।
  • CO3:    विद्यार्थी उपनिवेशवाद-विरोधी चेतना से संबंधित साहित्यिक अभिव्यक्तियों का आलोचनात्मक अध्ययन कर सकेंगे तथा उनके सामाजिक एवं राजनीतिक संदर्भों को समझ सकेंगे।
  • CO4:    विद्यार्थी विश्वयुद्धोपरांत उत्पन्न मानवीय संकट एवं आधुनिकता की आलोचना से जुड़े साहित्य का विश्लेषण कर सकेंगे तथा उसके वैचारिक आयामों की व्याख्या कर सकेंगे।
  • CO5:    विद्यार्थी भारतीय एवं वैश्विक साहित्य में निहित सामाजिक विषमता, संघर्ष एवं सांस्कृतिक अंतर्विरोधों का मूल्यांकन कर सकेंगे तथा तुलनात्मक दृष्टि विकसित कर सकेंगे।
  • CO6:    विद्यार्थी साहित्य के अध्ययन के आधार पर आलोचनात्मक एवं तुलनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत कर सकेंगे, तथा विविध सांस्कृतिक संदर्भों को समन्वित रूप से समझते हुए अकादमिक लेखन एवं प्रस्तुतीकरण कर सकेंगे।

Modules and Readings

मॉड्यूल 1 - हिंदी-उर्दू की साझा साहित्यिक परंपरा

हमारे विद्यार्थियों के परिचित साहित्य की एक अनदेखी विशेषता है: उसकी मुश्तरका ज़मीन। यह ज़मीन केवल समन्वय पर ही आधारित नहीं है बल्कि इसमें हिंदी और उर्दू, दोनों ही भाषाओं की विशेषताएँ भी झलकती हैं। बोध के स्तर पर इस साहित्य का निर्माण उपनिवेशवाद विरोधी माहौल से होता है लेकिन फिर वह देश के विभाजन की भयंकर त्रासदी में बदलता है। विभाजन के उपरांत दोनों ही देश अपने-अपने तरह की विशेष समस्याओं से गुज़रते हैं जिनका प्रतिबिम्बन दोनों ही देशों के रचनाकारों की रचनाओं में हुआ है। माड्यूल में दिए गए पाठों के ज़रिए विद्यार्थी  इसका परिचय प्राप्त कर सकेंगे।

निर्धारित पाठ:

  • टोबा टेक सिंह – सआदत हसन मंटो
  • तराना – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
  • अंधेर नगरी – भारतेंदु हरिश्चंद्र
  • नदी के द्वीप – अज्ञेय

Suggested Readings:

  • नामवर सिंह, इतिहास और आलोचना, राजकमल प्रकाशन
  • अली जावेद, हिंदुस्तानी तहजीब और साहित्य, वाणी प्रकाशन
  • रामविलास शर्मा, भारतेंदु युग, राजकमल

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माड्यूल 2 - भारतीय साहित्य: विविधता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति

विभाजन के उपरांत बचे हुए भारत में विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों ने अलग-अलग तरह से अपनी-अपनी भाषाई परम्परा को व्यापक प्रश्नों से जूझते हुए समृद्ध किया है। समग्र भारतीय समाज के यथार्थ की झलक अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी अपनी विशेषताओं के साथ उस भाषा के साहित्य में मिलती है। इसका विस्तार सांकृतिक वैभव के उत्सवीकरण से लेकर मानवेतर जगत की करना तथा सामाजिक पदानुक्रम के विरुद्ध विद्रोह तक फैला हुआ है। इस माड्यूल में दिए गए पाठों से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति को व्याख्यायित करने वाले पद-बंधों, 'विविधता में एकता' तथा 'सामंजस्य और तनाव' की आलोचनात्मक पड़ताल का अवसर प्राप्त होगा। 

निर्धारित पाठ:

  • कठफोड़वा – अय्यप्पा पणिक्कर
  • घटश्राद्ध – यू. आर. अनंतमूर्ति
  • अक्करमाशी – शरण कुमार लिंबाले
  • एक मुलाकात – अमृता प्रीतम
  • ईश्वर के निकट प्रस्ताव  – नवारूण भट्टाचार्य

Suggested Readings:

  • उत्तर औपनिवेशिकता के स्रोत और हिंदी साहित्य, प्रणय कृष्ण, हिंदी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद, 2008
  • भारतीय साहित्य की पहचान, डॉक्टर सियाराम तिवारी, वाणी प्रकाशन, दिल्ली, 2015
  • अज्ञेय (संपा.), भारतीय साहित्य की भूमिका

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माड्यूल3 - विकासशील देशों का साहित्य और उपनिवेशवाद विरोध

विकासशील देशों का साहित्य विशिष्ट ऐतिहासिक प्रक्रिया की उपज है। इस प्रक्रिया की लाक्षणिक विशेषता साम्राज्यवाद और उसके साथ स्थानीय कुलीन समुदाय का ऐसा संश्रय था जिसने इन देशों की भौतिक और मानवीय सम्पदा को गहरी क्षति पहुँचायी थी। इस विध्वंश के निशानात इन समाजों में तो मौजूद ही हैं, इन्हें सम्बंधित देशों के साहित्यकारों ने भी अपनी रचनाओं में जगह दी है। विकासशील देशों के साहित्य की विशेषता इन देशों की मनवीय त्रासदी और उससे संघर्ष करके अपनी अस्मिता को हासिल करने का प्रयत्न से सम्वलित रही है। हमारे विद्यार्थी अपने देश-काल के अनुभवों के साथ इस विराट उपनिवेशवाद विरोधी परम्परा को इस माड्यूल में समझ सकेंगे।

निर्धारित पाठ:

  • एक पागल की डायरी – लू शुन
  • एक मिनट का मौन – इमानुएल ओर्तीज़
  • एक क्लर्क की मौत – अंतोन चेखव
  • शब्द – पाब्लो नेरुदा

Suggested Readings:

  • विश्व कविता संचयन, मंगलेश डबराल, साहित्य अकादमी, दिल्ली, 2016
  • फ्रांत्ज़ फैनन, धरती के अभिशप्त (The Wretched of the Earth का हिंदी अनुवाद), ग्रंथशिल्पी/राजकमल (उपलब्ध संस्करण अनुसार)
  • नगूगी वा थ्योंगो, मन का उपनिवेशमुक्तिकरण (Decolonising the Mind का हिंदी अनुवाद), वाणी प्रकाशन
  • एमे सेज़र, उपनिवेशवाद पर वक्तव्य (Discourse on Colonialism का हिंदी अनुवाद), विभिन्न संस्करण उपलब्ध

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माड्यूल 4 -विश्व साहित्य: आधुनिकता और मानवीय संकट

सम्पूर्ण विश्व के आधुनिक जीवन की वास्तविकता का निर्माण विश्व-युद्धों की विभीषिका से हुआ है। इन युद्धों ने पहली बार मनुष्य को पूरी तरह से ऐतिहासिक परिस्थितियों के सामने निरीह साबित कर दिया। व्यक्ति की व्यक्तित्व-हीनता का विस्तार मानवीय सम्बन्धों तक हुआ। जिसके चलते समाज को टिकाए रखने वाली संस्थाओं पर भयंकर दबाव पड़ने लगा। बीसवीं सदी के इस भयावह यथार्थ को पश्चिमी जगत के लेखकों ने सबसे अधिक महसूस किया और उसे अपनी रचनाओं में अभिव्यक्ति दी। यह समूचा साहित्य अकर्मण्यता का नहीं वरन मनुष्य को निरीह बना देने वाली ऐतिहासिक-सामाजिक परिस्थितियों के विरुद्ध प्रतिकार का साहित्य है। विद्यार्थी इस माड्यूल में हमारे समय तक विस्तारित होते हुए बीसवीं सदी के इस यथार्थ तथा उससे उपजे मानवीय संकट का सम्वेदनात्मक ज्ञान प्राप्त करेंगे।

निर्धारित पाठ:

  • अजनबी – अल्बेयर कामू
  • आख़िरी पत्ता – ओ. हेनरी
  • आवेदन पत्र – विस्लावा शिंबोर्सका
  • झाड़-फूँक – टॉमस ट्रांस्ट्रोमर

Suggested Readings:

  • अल्बेयर कामू, सिसिफस की मिथक (The Myth of Sisyphus का हिंदी अनुवाद), राजकमल प्रकाशन
  • फ्रांज काफ्का, रूपांतरण (The Metamorphosis का हिंदी अनुवाद), राजकमल/लोकभारती
  • जॉर्ज ऑरवेल, 1984 (हिंदी अनुवाद), राजकमल/वाणी प्रकाशन
  • एरिच फ्रॉम, स्वस्थ समाज (The Sane Society का हिंदी अनुवाद), विभिन्न हिंदी संस्करण

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Assessment (Including Skills to be tested as per NCRF):

  • Response Essay/ Assignment-1  (25 Marks)
  • Midterm Exam/PPT/Assignment-2 (25 Marks)
  • End Term Exam (50 Marks)
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