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इंटर्नशिप

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1IN102 2 or 4

Course Coordinator(s) :      डॉ.निकिता जैन

1. Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No

2. Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

3. No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

4. Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

5. How does the course link with the vision of AUD?

6. How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् जब विद्यार्थी कहीं साक्षात्कार देता है तो सर्वप्रथम नियोक्ता व्यावहरिक अनुभव की मांग करते हैं |  अधिकांश नियोक्ताओं का यह विचार होता है कि किसी विशिष्ट कार्यस्थल (नौकरी या व्यवसाय) के लिए केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही आवश्यक नहीं है, व्यावहारिक दक्षता की भी आवश्यकता होती है जो केवल पाठ्यपुस्तकों के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती | इंटर्नशिप या प्रशिक्षुता एक ऐसा प्रशिक्षण है जिसमें विद्यार्थी विश्वविद्यालय में रहते हुए व्यावसायिक एवं व्यावहारिक ज्ञान की प्राप्ति कर सकता है और अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकता है | इंटर्नशिप के द्वारा विद्यार्थी को न केवल भविष्य में रोज़गार के नए-नए अवसर उपलब्ध होते हैं बल्कि आत्मविश्लेषण द्वारा विद्यार्थी नये तरह के व्यवसाय/अनुसन्धान के क्षेत्र में भी बेहतरीन कार्य कर सकते हैं | प्रस्तावित इंटर्नशिप/प्रशिक्षुता पाठ्यक्रम भी विद्यार्थियों को किसी विशिष्ट कार्यस्थल पर व्यावहारिक एवं व्यावसायिक दक्षता में प्रवीण बनाने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया जा रहा है जिससे विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय शिक्षा के पश्चात् रोज़गार से सम्बन्धित बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें, साथ ही विद्यार्थी अपने गुणों, अवगुणों, कार्य पद्धति से भी परिचित हो पाएं जो किसी भी क्षेत्र में कार्य करनी की पहली शर्त होती है |

पाठ्यक्रम में न्यूनतम 120 और अधिकतम 180 घंटे का इंटर्नशिप अनुभव अनिवार्य है। विद्यार्थियों को सार्वजनिक और निजी संगठनों, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थानों, परोपकारी संगठनों, सरकारी एजेंसियों,  कानूनी संगठनों, कारीगर उद्यमों, अनुसंधान एवं  सहकारी समितियों या विशेषज्ञों सहित विभिन्न प्रकार के संगठनों/संस्थाओं के साथ इंटर्नशिप करने का अवसर मिलेगा।

प्रस्तावित पाठ्यक्रम मुख्य रूप से उन विद्यार्थियों के लिए निर्मित किया गया है जो दूसरे,चौथे या छठे सत्र में कार्यक्रम से प्रस्थान (Exit) करना चाहेंगे |  दूसरे सत्र के पश्चात् प्रमाण-पत्र (Certificate) प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 120 घंटे (4 क्रेडिट) का इंटर्नशिप अनुभव अनिवार्य होगा।

चौथे सत्र के पश्चात् डिप्लोमा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए भी न्यूनतम 120 घंटे (4 क्रेडिट) की इंटर्नशिप पूर्ण करना आवश्यक होगा। इस स्तर पर विद्यार्थियों को यह सुविधा होगी कि वे इन 4 क्रेडिट्स को एक ही सत्र में पूर्ण कर सकते हैं अथवा 2+2 क्रेडिट के रूप में विभाजित कर पूर्ण कर सकते हैं।

छठे सत्र के पश्चात् बी.ए. (हिन्दी) की डिग्री प्राप्त करने हेतु विद्यार्थियों को न्यूनतम 180 घंटे (6 क्रेडिट) का इंटर्नशिप अनुभव प्राप्त करना अनिवार्य है। विद्यार्थी इसे क्रमशः 2+2+2 क्रेडिट के रूप में विभिन्न सत्रों में भी पूर्ण कर सकते हैं।

बी.ए. (चतुर्थ वर्ष) के विद्यार्थियों के लिए भी 6 क्रेडिट (180 घंटे) की इंटर्नशिप पूर्ण करनी अनिवार्य होगी। वे इन क्रेडिट्स को चार वर्षीय कार्यक्रम के दौरान द्वितीय, चतुर्थ अथवा षष्ठम सत्रों में से किसी उपयुक्त सत्र/सत्रों में (2+2+2) पूर्ण कर सकते हैं।

इस प्रकार इंटर्नशिप का प्रस्तुत पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को चरणबद्ध रूप से व्यावहारिक अनुभव अर्जित करने तथा अपने अकादमिक ज्ञान को वास्तविक कार्य-परिस्थितियों में लागू करने का अवसर प्रदान करता है।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • स्नातक के विद्यार्थियों को ‘कार्य-जगत की वास्तविक दुनिया’ के अनुभवों एवं चुनौतियों की सम्यक् समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करना, तथा उनकी अपेक्षाओं और व्यवहार को वर्तमान एवं उभरती रोजगार-परिस्थितियों की मांगों, कार्य-संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप परिष्कृत करना।
  • विद्यार्थियों को यह समझ प्रदान करना कि सतत विकास के लिए संगठन एवं उद्यम किस प्रकार स्थापित और संचालित किए जाते हैं, ताकि उनके भीतर स्टार्ट-अप एवं उद्यमशीलता संबंधी क्षमताओं का सुदृढ़ विकास हो तथा वे रोजगार-प्राप्तकर्ता के साथ-साथ रोजगार-सृजक बनने के लिए प्रेरित हों।
  • समस्या-समाधान एवं निर्णय-निर्माण कौशलों के विकास हेतु टीम-वर्क और सहयोगात्मक कार्य-संस्कृति को प्रोत्साहित करना, साथ ही अनुसंधान, शैक्षणिक तथा व्यावसायिक उन्नति के अवसरों को सुदृढ़ करना।
  • स्नातक विद्यार्थियों में सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता तथा बहुआयामी परोपकारी दृष्टि का विकास करना |
  • विद्यार्थियों को यह समझ प्रदान करना कि सतत विकास के लिए संगठन एवं उद्यम किस प्रकार स्थापित और संचालित किए जाते हैं, ताकि उनके भीतर स्टार्ट-अप एवं उद्यमशीलता संबंधी क्षमताओं का सुदृढ़ विकास हो तथा वे रोजगार-प्राप्तकर्ता के साथ-साथ रोजगार-सृजक बनने के लिए प्रेरित हों।
  • समस्या-समाधान एवं निर्णय-निर्माण कौशलों के विकास हेतु टीम-वर्क और सहयोगात्मक कार्य-संस्कृति को प्रोत्साहित करना, साथ ही अनुसंधान, शैक्षणिक तथा व्यावसायिक उन्नति के अवसरों को सुदृढ़ करना।
  • स्नातक विद्यार्थियों में सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता तथा बहुआयामी परोपकारी दृष्टि का विकास करना |

Course Outcomes:  Course Outcomes describe what students are expected to know and be able to do by the end of a specific course. Each CO should be clearly observable and measurable. Mention 4-6 course outcomes.  At the end of the course, students will be able to:

  • CO1: विद्यार्थी कार्य-जगत की वास्तविक परिस्थितियों, संरचनाओं एवं प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे।
  • CO2: विद्यार्थी समकालीन एवं उभरते रोजगार-परिदृश्य की मांगों, कार्य-संस्कृति और मूल्यों की पहचान कर सकेंगे।
  • CO3: विद्यार्थी संगठनात्मक कार्य-प्रणालियों एवं उद्यमशीलता के मूलभूत सिद्धांतों को व्यावहारिक संदर्भों में लागू कर सकेंगे।
  • CO4: विद्यार्थी समस्या-समाधान एवं निर्णय-निर्माण की प्रक्रियाओं का विश्लेषण करते हुए टीम-वर्क में सहयोग प्रदान कर सकेंगे।
  • CO5: विद्यार्थी व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास का मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • CO6: विद्यार्थी सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करते हुए उत्तरदायित्वपूर्ण एवं नैतिक व्यवहार का प्रदर्शन कर सकेंगे।

Modules and Readings इंटर्नशिप प्रक्रिया एवं प्रतिवेदन (Report) संरचना

इंटर्नशिप की प्रक्रिया, एक इंटर्नशिप पुस्तिका (Internship Brochure) के निर्माण से प्रारंभ की जा सकती है, जिसमें इंटर्नशिप के उद्देश्यों, विद्यार्थियों की प्रोफ़ाइल, कार्यक्रम की संरचना, कार्यक्रम एवं इंटर्नशिप के बीच संबंध, संभावित संस्थानों/संगठनों से संपर्क स्थापित करने हेतु पूर्व छात्रों (Alumni) का विवरण तथा इंटर्नशिप के संभावित कार्य-क्षेत्रों का उल्लेख किया जाएगा।
स्कूल स्तर पर, अधिष्ठाता (Dean) के पर्यवेक्षण में एक इंटर्नशिप प्रकोष्ठ (Internship Cell) इस पाठ्यक्रम के संचालन में सहायक हो सकता है |  प्रत्येक कार्यक्रम के लिए एक या अधिक इंटर्नशिप समन्वयक (Internship Coordinator) नियुक्त किए जाएंगे, जो विभिन्न संगठनों से संपर्क स्थापित करने तथा विद्यार्थियों को इंटर्नशिप उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सुगम बनाएंगे।
इंटर्नशिप प्रस्ताव प्राप्त होने पर विद्यार्थी के लिए यह आवश्यक होगा कि वह औपचारिक रूप से संस्थान में सम्मिलित होने से पूर्व इंटर्नशिप समन्वयक से परामर्श एवं अनुमोदन प्राप्त करे। तत्पश्चात विद्यार्थी संबंधित संगठन में निर्धारित समय-सारणी के अनुसार इंटर्नशिप प्रारंभ करेगा तथा वहाँ के इंटर्नशिप पर्यवेक्षक (Supervisor) के निर्देशन में कार्य करेगा।

इंटर्नशिप की अवधि के दौरान, कार्यक्रम के समन्वयक एवं संबंधित संगठन के पर्यवेक्षक द्वारा विद्यार्थियों की गतिविधियों एवं प्रदर्शन की निरंतर निगरानी की जाएगी, जो विद्यार्थियों द्वारा समय-समय पर प्रस्तुत की जाने वाली प्रगति-रिपोर्ट्स के आधार पर होगी।
इंटर्नशिप के पूर्ण होने के उपरांत विद्यार्थी को एक विस्तृत प्रतिवेदन (Report) प्रस्तुत करना होगा तथा उसकी प्रस्तुति (Presentation) भी देनी होगी। प्रतिवेदन/प्रस्तुति में निम्नलिखित बिंदुओं को सम्मिलित किया जाएगा—

परिचय (Introduction):

संगठन का संक्षिप्त परिचय तथा इंटर्नशिप के संदर्भ का विवरण; साथ ही इंटर्नशिप के दौरान किए गए कार्य/परियोजना का संक्षिप्त परिचय

कार्य एवं दायित्व (Work Done and Responsibilities):

इंटर्नशिप के दौरान किए गए विशिष्ट कार्यों, परियोजनाओं एवं दायित्वों का विवरण; प्रमुख उपलब्धियों, सामने आई चुनौतियों तथा उनके समाधान का उल्लेख।

अनुप्रयुक्त अधिगम (Applied Learning):

  • अकादमिक कार्यक्रम के दौरान अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग का विवरण; साथ ही इंटर्नशिप के दौरान अर्जित नए कौशलों का उल्लेख।
  • इस प्रतिवेदन के माध्यम से विद्यार्थी अपने इंटर्नशिप अनुभव को प्रभावी रूप से  प्रस्तुत कर सकेंगे। उपर्युक्त संरचना संकेतात्मक है तथा
  • इंटर्नशिप के स्वरूप एवं आवश्यकताओं के अनुसार इसमें परिवर्तन संभव है।

सहायक पाठ्य सामग्री :

  • इंटर्नशिप की प्रकृति एवं आवश्यकताओं के अनुसार पठन-सामग्री भिन्न-भिन्न हो सकती है। इसमें संबंधित संगठन/क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्ट्स, नीतिगत दस्तावेज, कार्य-मार्गदर्शिकाएँ तथा संदर्भ-सामग्री सम्मिलित की जा सकती हैं।

Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Performance at Workplace:   – (30%Marks)
  • Supervisor’s Evaluation – (20%)
  • Final Report (50 Marks)
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