| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core | NA | 4 |
Semester and Year Offered: 1
Course Coordinator and Team: डॉ.निकिता जैन, डॉ. रुबीना सैफी
Email of course coordinator:
1. Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
2. Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
3. No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
4. Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
5. How does the course link with the vision of AUD?
6. How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)
हिंदी साहित्य की पठन-पाठन प्रक्रिया में अनुवाद का महत्वपूर्ण स्थान है । भारतीय तथा पाश्चात्य साहित्य व सन्दर्भों को पढ़ते समय विद्यार्थी विभिन्न अनुवादित रचनाओं को पढ़ते हैं, किन्तु वह अनुवाद तथा अनुवाद की प्रक्रिया व समस्याओं से परिचित नहीं होते हैं । इसलिए इस पाठ्यक्रम को वैकल्पिक कोर्स के रूप में पढ़ाए जाने से न केवल विद्यार्थियों को अनुवाद को समझने में मदद मिलेगी बल्कि उनमें अनुवाद करने का कौशल भी विकसित किया जा सकेगा । इस कोर्स में विद्यार्थी अनुवाद करने का अभ्यास करेंगे, इस तरह यह एक रोजगारोन्मुख कोर्स भी है । ज्ञान के क्षेत्र में हमेशा से अनुवाद का महत्त्व रहा है । अनुवाद, अन्य भाषा साहित्य और ज्ञान के क्षेत्र के द्वार खोलने में मदद करता है । भारत जैसे बहुभाषीय देश में अनुवाद का महत्त्व और बढ़ जाता है । इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य अनुवाद के सैद्धांतिक पक्ष को समझते हुए व्यावहारिक रूप से अनुवाद का कौशल विकसित करना है । इस पाठ्यक्रम की रूपरेखा का निर्माण करते समय मुख्य रूप से अनुवाद के प्रायोगिक पक्ष पर ज्यादा जोर दिया गया है । इसका उद्देश्य अनुवाद की व्यावहारिक कुशलता विकसित करने के साथ-साथ कार्यालयी अनुवाद का प्रशिक्षण देना, सूचना प्रौद्योगिकी के युग में अनुवाद की उपयोगिता का बोध कराना तथा अनुवाद के क्षेत्रों में रोजगार के लिए प्रशिक्षण देना है। यह कोर्स स्नातक प्रथम सत्र के विद्यार्थियों को अनुवाद से संबंधित विभिन्न सैद्धांतिक पक्षों से अवगत करेगा और इसके साथ-साथ अनुवाद के व्यावहारिक प्रयोगों द्वारा अनुवाद करने का कौशल विकसित करने में भी मदद करेगा । इस पाठ्क्रम की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है जिससे विद्यार्थी सिद्धांत को समझने पर हुए प्रयोग के माध्यम से अनुवाद के व्यावहारिक रूप से अवगत होगा । इस पाठ्यक्रम को ‘क्रियामूलक ज्ञान (Learning by doing)’ के सिद्धांत को ध्यान में रखकर बनाया गया है ।
पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
इस पाठ्यक्रम के सफल समापन के बाद विद्यार्थी सक्षम होंगे:
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CO1 :
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विद्यार्थी अनुवाद की अवधारणा, स्वरूप, प्रकृति एवं उसकी सामाजिक-सांस्कृतिक उपयोगिता को समझ सकेंगे तथा विभिन्न क्षेत्रों में उसकी भूमिका की व्याख्या कर सकेंगे। |
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CO2: |
विद्यार्थी अनुवाद के सैद्धांतिक पक्षों, प्रकारों तथा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों का विश्लेषण कर सकेंगे और उनके बीच संबंध स्थापित कर सकेंगे। |
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CO3: |
विद्यार्थी अनुवाद की विभिन्न प्रविधियों एवं समतुल्यता (equivalence) के सिद्धांतों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से लागू कर सकेंगे। |
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CO4: |
विद्यार्थी सृजनात्मक साहित्य और तकनीकी अनुवाद के भेद को समझते हुए अनूदित कृतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कर सकेंगे। |
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CO5: |
विद्यार्थी अनुवाद प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए उपयुक्त रणनीतियाँ विकसित कर सकेंगे। |
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CO6: |
विद्यार्थी साहित्यिक एवं साहियेतर पाठों का सुसंगत, सटीक एवं संदर्भानुकूल अनुवाद तैयार कर सकेंगे तथा उसे अकादमिक रूप से प्रस्तुत कर सकेंगे। |
Modules and Readings
In this section, provide the name of the modules along with a brief description and references (Core and Suggested)
मॉड्यूल 1 (Lecture Hours = )16
अनुवाद: एक परिचय
भारत जैसे बहुभाषी देश में अनुवाद एक सामाजिक आवश्यकता है । भारत के विभिन्न प्रदेशों के साहित्य में निहित मूलभूत एकता के स्वरूप को निखारने के लिए अनुवाद ही एक मात्र साधन है। भारतीय भाषाओं में रचित साहित्य और ज्ञान-विज्ञान के विकास में अनुवाद का विशेष महत्त्व है । अनुवाद के माध्यम से भारतीय एवं अन्य भाषाओं में किए जा रहे कार्यों का न केवल परिचय प्राप्त होता है बल्कि उनमें निहित साहित्यिक सौन्दर्य का रसास्वादन भी होता है। साहित्य के अतिरिक्त प्रशासन, बैंकिंग, प्रोद्यौगिकी, पर्यटन अन्य क्षेत्रों में भी अनुवाद की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । प्रस्तावित पाठ्यक्रम के प्रथम मॉड्यूल का उद्देश्य है विद्यार्थियों को अनुवाद के अर्थ,प्रकृति,स्वरुप से परिचित कराते हुए वर्तमान समय में अनुवाद की महत्ता एवं आवश्यकता से रूबरू कराना जिससे विद्यार्थी आने वाले समय में अनुवाद की उपादेयता को ध्यान में रखते हुए न केवल इसे एक पाठ्यक्रम के अध्ययन तक सीमित रखें बल्कि इस क्षेत्र में रोज़गार के बेहतर अवसरों की तलाश कर सकें । अनुवाद में दो भाषाओं का प्रस्ताव होता है, इसलिए किसी एक ही पद्धति में अनुवाद करना मुमकिन नहीं है विषयानुरूप अनुवाद की प्रकृति एवं प्रकार परिवर्तित होते रहते हैं अत: इस मॉड्यूल में अनुवाद के भिन्न प्रकारों का अध्ययन भी अपेक्षित रहेगा ताकि विद्यार्थी अनुवाद प्रणालियों के विविध प्रकारों में एक स्पष्ट विभाजक रेखा से परिचित होते हुए भाषा की व्यापकता को समझ सकें ।
निर्धारित पाठ:
- अनुवाद का अर्थ, प्रकृति, स्वरुप
- अनुवाद की आवश्यकता एवं महत्त्व
- अनुवाद के क्षेत्र- कार्यालयी, वैज्ञानिक एवं तकनीकी, साहित्यिक,मानविकी आदि।
- अनुवाद के प्रकार : शाब्दिक अनुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद आदि
Suggested Readings:
- डॉ. कैलाश चन्द्र भाटिया, अनुवाद कला: सिद्धांत और प्रयोग, तक्षशिला प्रकाशन भोलानाथ तिवारी, अनुवाद विज्ञान, किताबघर प्रकाशन
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माड्यूल 2 (Lecture Hours = ) 16
अनुवाद प्रक्रिया एवं प्रविधि
प्रस्तावित मॉड्यूल ‘अनुवाद प्रक्रिया एवं प्रविधि’ पर आधारित रहेगा जिसके अंतर्गत इसके विभिन्न चरणों, प्रकारों एवं प्रायोगिक पक्षों से विद्याथियों को रूबरू कराया जाएगा । इसके अतिरिक्त प्रस्तुत मॉड्यूल में अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर अनुवादक की भूमिका एवं उसके कार्य में होने वाले परिवर्तनों को विभिन्न विद्वानों द्वारा दिए गए सिद्धांतों के जरिये समझने का प्रयास किया जाएगा । इसके साथ ही इन सिद्धांतों में प्रतिपादित अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों की विस्तृत विवेचना भी इस मॉड्यूल में की जाएगी।
निर्धारित पाठ:
- अनुवाद प्रक्रिया का अर्थ और समतुल्यता का सिद्धांत
- अनुवाद प्रक्रिया के चरण
- अनुवाद की विविध प्रविधियाँ
- अनुवाद की भूमिका
Suggested Readings:
- डॉ. श्री नारायण समीर, अनुवाद की प्रक्रिया: तकनीक और समस्याएं, लोकभारती
- डॉ. सुरेश कुमार, अनुवाद सिद्धांत, वाणी प्रकाशन
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माड्यूल3 (Lecture Hours = ) 16
सृजनात्मक साहित्य और अनुवाद
अनुवाद के क्षेत्र में सृजनात्मक साहित्य को लेकर विद्वानों के विभिन्न मत देखने को मिलते हैं । सृजनात्मक साहित्य के अंतर्गत जिस प्रकार की कल्पना, बिम्ब –विधान, भाव और उद्बोधन प्रतीकों तथा अन्य साहित्यिक उपकरणों द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं उन्हें किसी अन्य भाषा में उसी भावबोध के साथ अनूदित करना एक दुष्कर कार्य है । एक प्रकार से यह कार्य अनुवाद की बजाए पुन:सृजन की कोटि में आ जाता है । काव्यानुवाद में यह बात और भी सटीक बैठती है । अत: इस क्षेत्र में अनुवाद की अपेक्षाएं और भी गंभीर हो जाती हैं, साथ ही यह अनुवाद की सीमओं को भी तय करने वाला क्षेत्र बना जाता है । इस मोड्यूल के अंतर्गत सृजनात्मक साहित्य को केंद्र में रखते हुए इसके विभिन्न आयामों में संरचनात्मक भेद को स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा । इसके अलावा तकनीकी अनुवाद से इसकी भिन्नता को विश्लेषित करने का प्रयास किया जाएगा ।
निर्धारित पाठ:
- सृजनात्मक साहित्य की अवधारणा
- सृजनात्मक साहित्य के क्षेत्र में अनुवाद की अपेक्षाएं व सीमाएं
- साहित्यिक एवं तकनीकी अनुवाद में अंतर
- अनूदित कृतियों ( गद्य/पद्य) का समीक्षात्मक अध्ययन
- एलिस इन वंडरलैंड
- गीतांजलि
- उजड़ ग्राम
- अजनबी
Suggested Readings:
- डॉ. सुरेश सिंहल एवं पूरन चंद टंडन (सं.), सृजनात्मक साहित्य और अनुवाद
- डॉ. नगीनचन्द्र सहगल, काव्यानुवाद: सिद्धांत और समस्याएं
- एलिस इन वंडरलैंड (हिंदी अनुवाद)
- रवीन्द्रनाथ टैगोर, गीतांजलि (अनुवाद)
Online Resources
माड्यूल 4 (Lecture Hours = ) 16
प्रायोगिक अनुवाद
प्रस्तुत मॉड्यूल परियोजना आधारित होगा जिसके अंतर्गत किसी एक साहित्यिक/साहियेतर कृति का निर्धारित शब्द-सीमा के भीतर अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद प्रस्तावित होगा ।
Suggested Readings:
-
प्रो. सूरजभान सिंह, अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण, प्रभात प्रकाशन
डॉ. कृष्ण कुमार रत्तु, अनुवाद और मीडिया
Online Resources/Tools
- https://www.zotero.org
- https://translate.google.com (practice support only)
प्रायोगिक अनुवाद
प्रस्तुत मॉड्यूल परियोजना आधारित होगा जिसके अंतर्गत किसी एक साहित्यिक/साहियेतर कृति का निर्धारित शब्द-सीमा के भीतर अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद प्रस्तावित होगा ।
Suggested Readings:
- प्रो. सूरजभान सिंह, अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण, प्रभात प्रकाशन
- डॉ. कृष्ण कुमार रत्तु, अनुवाद और मीडिया
Online Resources/Tools
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली