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लोक साहित्य

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1DS001 4

Course Coordinator(s)    Dr. Vijay Yadav

1 Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No 

2.Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

3. No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

4 Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

5 How does the course link with the vision of AUD? 

6 How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered? 

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए प्रस्तावित यह पाठ्यक्रम लोक साहित्य का व्यापक अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया है। लोक साहित्य का तात्पर्य ऐसे साहित्य से है, जिसका प्रतिनिधित्व केवल एक व्यक्ति नहीं करता वरन् सामान्य लोक समूह उसे अपनाता है। सामूहिकता ही उसका मूल स्वर है। भारत में प्रत्येक स्थान की अपनी भाषा व संस्कृति होती है। भारत एक विविधतावादी और बहुभाषी देश है, अतः प्रत्येक स्थान की अपनी भिन्न संस्कृति व भाषा होती है। भिन्न संस्कृति होने के कारण प्रत्येक समुदाय की मान्यताएं, अंधविश्वास, लोकरूढ़ियाँ, लोक-कथाएं, लोकसंगीत व लोकनाट्य की अलग- अलग शैलियां हमें दिखाई देती हैं। इनका अध्ययन उपर्युक्त पाठ्यक्रम में प्रस्तावित है।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • लौकिक साहित्य हिंदी साहित्य की आधार भूमि है। लोककथाओं को आधार बनाकर ही  
  • लिखित साहित्य का लेखन होता है। इसके माध्यम से लौकिक साहित्य व लिखित साहित्य के 
  • अंतरसंबंध का  अध्ययन किया जाएगा।
  • लोक साहित्य को लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है, क्योंकि इसमें लोक-संस्कृति सभी पक्ष उपस्थित रहते हैं। 
  • किसी भी समाज की मान्यताएं, अंधविश्वास, त्योहार, रीति- रिवाज, गीत, कथा-कहानियां, लोकोक्तियां, कहावतें, आदि लोकसाहित्य का आधार होता है। 
  • इन सभी पहलुओं का अध्ययन लोक साहित्य के अंतर्गत किया जाएगा।

Course Outcomes: Course Outcomes describe what students are expected to know and be able to do by the end of a specific course. Each CO should be clearly observable and measurable. Mention 4-6 course outcomes.  At the end of the course, students will be able to:

  • CO1:  लोक साहित्य और  मुख्य साहित्य के बीच के अंतर को समझना और समझाना  होगा
  • CO2:  हिन्दी साहित्य के लोक साहित्य को प्रकाश में लाना 
  • CO3:  विद्यार्थियों को बोलियों  के इतिहास को जानने और उनमे  हो रहे काम के प्रति सजग  करना और इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करना
  • CO4:  विद्यार्थियों को लोक भाषा, लोक गीत आदि से परिचित कराना
  • CO5:  सिनेमा और लोक साहित्य का क्या संबंध है सिनेमा में किन-किन भाषाओं, बोलियों  के साहित्य को  उपयोग में लाया गया है
  • CO6:  समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप संवेदनशीलता विकसित करना तथा सामुदायिक स्तर पर लोगों की स्थिति में बेहतरी  की कोशिशों  में शामिल होना

Modules and Readings

मॉड्यूल-1 लोक : अवधारणा व स्वरूप :

इस इकाई में लोक की अवधारणा से विद्यार्थियों को परिचित कराया जाएगा। इसमें लोक-संस्कृति,लोक के तत्व, लोक-परम्परा, लोकवार्ता व लौकिक साहित्य जिसे मौखिक साहित्य भी कहा जाता है के सिद्धांतों के प्रतिपादन पर बल दिया जाएगा। लोक के विभिन्न रूपों व उसकी विविधता पर प्रकाश डाला जाएगा।

निर्धारित विषय :

  • अवधारणा व परिभाषाएं
  • लोक व लोकवार्ता / लोक मिथक
  • लोक संस्कृति और लोक जीवन का अंतः संबंध
  • लौकिक साहित्य और लिखित साहित्य का सम्बन्ध : अध्ययन की समस्याएं

सहायक ग्रंथ (पुस्तकें):

  • लोक-साहित्य की भूमिका : कृष्णदेव उपाध्याय, लोकभारती प्रकाशन, इलहाबाद, 2019
  • लोक संस्कृति  की रूपरेखा  : कृष्णदेव उपाध्याय, लोकभारती प्रकाशन, इलहाबाद, 2020
  • भारतीय लोक साहित्य परंपरा और परिदृश्य   :  विद्या सिन्हा, प्रकाशन विभाग-भारत सरकार, नई दिल्ली , 2011  

माड्यूल- 2  लोकगीत - वाचिक और मुद्रित :

इस इकाई में भारतीय समाज के प्रमुख लोकगीतों व उनके प्रकारों का अध्ययन किया जाएगा। लोकगीत किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे समाज का प्रतिनिधित्व करता है। लोकगीतों द्वारा रचनाकार अपने व्यक्तित्व को लोक में परिवर्तित कर पूरे लोक समाज की आवाज बना देता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुख त्योहार, उत्सवों, सामाजिक जीवन, धार्मिक व लौकिक आधार पर लोकगीतों का विस्तार हुआ है।

निर्धारित विषय :

  • संस्कार गीत : सोहर, यज्ञोपवीत, विवाह, मंगल गीत 
  • ऋतु सम्बन्धी गीत : बारहमासा, होली, चैती, कजरी इत्यादि 
  • श्रम सम्बन्धी गीत : कटनी, जँतसर, दँवनी, रोपनी इत्यादि 
  • विविध गीत : ग्रामगीत

सहायक ग्रंथ (पुस्तकें):

  • लोक साहित्य एवं लोक संस्कृति (परम्परा  प्रासंगिकता एवं सामाजिक परिप्रेक्ष्य)   :  डॉ वीरेंद्र सिंह यादव , ओमेगा पब्लिकेशन, नई दिल्ली , 2012
  • लोक साहित्य विज्ञान  :  डॉ सत्येंद्र  , राजस्थानी ग्रंथगार, जोधपुर  2023    
  • हिन्दी साहित्य का बृहत् इतिहास (षोडश भाग) लोक साहित्य : महापंडित राहुल सांकृत्यायन - डॉ कृष्णदेव उपाध्याय, नागरी प्रचारिणी सभा, काशी, 1960

माड्यूल 3 लोककथाएं - लोकभाषाएं : सामान्य परिचय एवं इतिहास : 

इस इकाई में लोककथा व लोकभाषा का अध्ययन किया जाएगा। लोककथा व लोकभाषा के माध्यम से ही अभिव्यक्त होता है, इसलिए इनमें पारस्परिक संबंध होता है। लोककथाएं मानव समुदाय की साझी अभिव्यक्ति होती है,जो कथाओं को विभिन्न रूपों में लौकिक भाषा में अभिव्यक्त करती है। लोककथाएं कथानक रूढ़ियों और विभिन्न शैलियों में स्थानकिता के आधार पर ढलने के कारण विभिन्न प्रवृत्तियों और चरित्रों से युक्त होती है।

निर्धारित विषय :

  • लोककथा : व्रतकथा, परिकथा, नाग-कथा, कथा रूढ़ियाँ और अंधविश्वास
  • लोकभाषा : लोकोक्तियां, मुहावरें, कहावतें, पहेलियां
  • लोकनृत्य : छऊ, महारास
  • लोकसंगीत : आल्हा / पांडवानी / बाउल / रागिनी

सहायक ग्रंथ (पुस्तकें):

  • सम्मलेन पत्रिका - लोक संस्कृति विशेषांक : सम्पादक - रामनाथ सुमन, प्रयागराज, 1953  
  • समसामयिक सृजन पत्रिका - हिंदी के लोक पर केंद्रित : सम्पादक - महेंद्र प्रजापति , दिल्ली, जनवरी - जून 2014
  • भारतीय लोकनाट्य : डॉ वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 200


माड्यूल 4 लोकनाट्य - विविध भाषा क्षेत्रों के नाट्यरूप और शैलियां

इस इकाई में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और भिन्न भाषाओं में प्रस्तुत होने वाले लोकनाट्य का अध्ययन किया जाएगा। लोकनाट्य में संवाद के माध्यम से मंच पर अभिनय तथा गीत-संगीत के साथ प्रस्तुत होता है, जिसका निश्चित आलेख नहीं रहता और यह परम्परा से मौखिक रूप से चला आ रहा है।

निर्धारित विषय :

  • रामलीला / रासलीला 
  • बिदेसिया / नौटंकी / स्वांग
  • कीर्तनियां / यक्षगान
  • माच / खयाल

सहायक ग्रंथ (पुस्तकें):

  • कविता-कौमुदी (पांचवा भाग )  ग्राम-गीत : सम्पादक-रामनरेश त्रिपाठी, हिन्दी मंदिर,  प्रयाग, 1986
  •  भिखारी ठाकुर रचनावली : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना, 2011
  • भारतीय लोक साहित्य कोश (नौ खंड) : सम्पादक, सुरश गौतम-वीणा गौतम, संजय    प्रकाशन, दिल्ली, 2021

Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Response Essay (30 Marks)
  • Midterm Exam (30 Marks)
  • End Term Exam (40 Marks)
     
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