| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core | SOL2HN302 | 4 |
Course Coordinator(s) : हिन्दी संकाय
Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
How does the course link with the vision of AUD?
यह पाठ्यक्रम अंबेडकर विश्वविद्यालय के विजन के अनुसार अंतरानुशासनिक और ऐतिहासिक-समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप होगा। इसमें जनसंचार के विविध ऐतिहासिक तथा समकालीन रूपों से विद्यार्थियों को इस प्रकार से परिचित कराया जाएगा ताकि वे जनसंचार के प्रभाव, महत्त्व, प्रयोगों तथा परिवर्तनों के विषय में प्रचलित सैद्धांतिक तथा व्यवहारिक ज्ञान को आत्मसात करें। इसमें जनसंचार की विभिन्न अवधारणाओं तथा व्यवहारिक प्रयोगों की बहुस्तरीयता तथा बहुपक्षीयता के बोध को विकसित किया जा सकेगा।
How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
जनसंचार की अवधारणा और विकास विषयक पाठ्यक्रम के माध्यम से रोजाना के जीवन में दिखने वाले जनसंचार रूपों के प्रति जागरूक बनाया जा सकेगा। हिंदी साहित्य के अन्य विषयों के साथ इसका एक अंतःसंबंध इस रूप में होगा कि इसमें साहित्य की भांति ही विद्यार्थी में जनसंचार से जुड़े हस्तक्षेपकारी व्यवहार व चेतना को विकसित किया जा सकेगा। जिस प्रकार साहित्य का सामाजिक पक्ष महत्त्वपूर्ण होता है, उसी प्रकार जनसंचार की सामाजिकता के बारे में पद्धतिगत ज्ञान-प्रशिक्षण प्रदान किया जा सकेगा।
पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)
जनसंचार एक निरंतर विकासमान और आधुनिक अनुशासन है। इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत हम 19वीं सदी में भारत में विकसित हुई पत्रकारिता की परम्परा, उसमें आए परिवर्तन एवं जनसंचार के वर्तमान स्वरूप का ऐतिहासिक व तुलनात्मक नज़रिए से अध्ययन कर सकेंगे। प्रिंट, रेडियो, टीवी, इंटरनेट व सोशल मीडिया आदि के रूप में पत्रकारिता एक बहुमुखी अनुशासन बन चुका है। विद्यार्थी प्रतिदिन इसके किसी न किसी रूप से रूबरू होते हैं। यह हमारे राष्ट्रीय परिदृश्य को प्रभावित करनेवाले प्रधान अनुशासन के रूप में हमारे सामने है। मीडिया में विभिन्न प्रकार की यौनिक लैंगिक, जातिगत, वर्गगत या इलाकाई समीकरणों की राजनीति इसके चेहरे का निर्धारण करती है। पाठ्यक्रम में महिला, दलित तथा अन्य हाशिए के समुदायों से संबंधित समाचारों के प्रस्तुतिकरण के तरीकों का विश्लेषणात्मक विवेचन किया जाएगा। इसी प्रकार से सत्ता, पूँजी व पत्रकारिता के गठजोड़ का अध्ययन स्वतंत्र अध्ययन की माँग करता है जो इस पाठ्यक्रम के माध्यम से सम्भव हो सकेगा। यह पाठ्यक्रम डिजिटल, ऑनलाइन व सोशल मीडिया के रूप में पत्रकारिता के अधुनातन स्वरूप के बारे में विद्यार्थियों को अनुभव और ज्ञान से लैस करेगा। इस प्रकार पत्रकारिता की समाज में भूमिका तथा कार्यों के बारे में अवधारणात्मक समझ विकसित की जा सकेगी।
पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
- जनसंचार के पारंपरिक रूप से आधुनिक डिजिटल रूप तक की विकास यात्रा का आलोचनात्मक अध्ययन कराना।
- जनसंचार के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा तकनीकी पक्षों की समझ विकसित करना।
- राष्ट्र निर्माण, समाज सुधार तथा जनचेतना में जनसंचार की भूमिका से विद्यार्थियों को परिचित कराना।
- जनसंचार और बाजार, सत्ता तथा सामाजिक-राष्ट्रीय सरोकारों के अंतःसंबंधों का अध्ययन कराना।
- जनसंचार माध्यमों के माध्यम से संस्कृति, विरासत और संप्रेषण की प्रक्रियाओं को समझने की दृष्टि विकसित करना।
- जनसंचार के क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मीडियाकर्मियों की वैचारिक भूमिकाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराना।
Course Outcomes (COs)
- CO1: विद्यार्थी जनसंचार के विविध पारंपरिक एवं आधुनिक रूपों की पहचान करते हुए उनके सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण कर सकेंगे।
- CO2: विद्यार्थी जनसंचार के प्रमुख सिद्धांतों, अवधारणाओं तथा व्यवहारिक पक्षों की समझ विकसित कर सकेंगे
- CO3: विद्यार्थी जनसंचार माध्यमों की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कर सकेंगे।
- CO4: विद्यार्थी पत्रकारिता एवं संचार से जुड़े हस्तक्षेपकारी व्यवहार, जनचेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व को समझते हुए उसका अनुप्रयोग कर सकेंगे।
- CO5: विद्यार्थी पत्रकारिता के क्षेत्र में आवश्यक नैतिक मूल्यों, कानूनों, आचार संहिताओं तथा व्यावसायिक दायित्वों की समझ विकसित कर सकेंगे।
- CO6: विद्यार्थी समाचार लेखन, संप्रेषण तथा मीडिया व्यवहार से संबंधित व्यवहारिक दक्षताओं का उपयोग विभिन्न संचार संदर्भों में कर सकेंगे।
Modules and Readings
Module-1: जनसंचार परिचय और सिद्धांत
इस मॉड्यूल में जनसंचार के मूल तत्व, अवधारणाओं, प्रकार्य व प्रमुख सिद्धांतों का अध्ययन-अध्यापन होगा।
निर्धारित विषय :
जनसंचार के मूल तत्व: इसके अंतर्गत जनसंचार के विविध आयामों और उसके स्वरूप के बारे में विस्तार से अध्यापन होगा। संचार के अंतःवैयक्तिक, अंतर्वैयक्तिक व समूह संचार के साथ-साथ शाब्दिक व शब्दहीन संचार तथा दैहिक संकेतों के महत्त्व आदि को केंद्र में रखा जाएगा। जनसंचार के प्राचीन रूप, वैज्ञानिक क्रांति के प्रभाव से विकसित संचार, स्वाधीनता आंदोलन के दौरान का जनसंचार, स्वातंत्र्योत्तर भारत में विकसित नए किस्म का जनसंचार व डिजिटल जनसंचार का अध्ययन कर सकेंगे.
जनसंचार की अवधारणाएँ, प्रकार्य और सिद्धांत: जनसंचार के पाठ्यक्रम के व्यवस्थित अध्यापन के परिणाम स्वरूप जनसंचार की विभिन्न अवधारणाओं का विकास हुआ है। आधुनिकता, कल्याणकारी राज्य, समाजवाद, पूँजीवाद और भूमंडलीकरण से जुड़े राजनीतिक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप पत्रकारिता को समझने के दृष्टिकोणों में परिवर्तन हुआ है। इस इकाई में भारत जैसे तीसरी दुनिया के देशों में जनसंचार के प्रकार्य का विशेष अध्ययन किया जाएगा। संचार के प्रतिरूपों की व्याख्या के लिए परंपरागत, मध्यवर्ती, संवादात्मक, व्यवहारात्मक प्रतिरूपों का प्रयोग किया जाएगा। इसी प्रकार जनसंचार के विभिन्न मॉडल, मनोवैज्ञानिक तथा समाजशास्त्रीय संचार सिद्धांत, आलोचनात्मक तथा सांस्कृतिक सिद्धांत (फ्रैंकफर्ट स्कूल, हैबरमास, अडोर्नो आदि) तथा सामाजिक अध्ययन व सामाजिक परिवर्तन से संबंधित सिद्धांतों का शिक्षण होगा। मीडिया के विविध प्रभावों का अध्ययन के लिए वर्चस्व प्रतिमान, नवोन्मेष का प्रसार (डिफ्यूसन ऑफ इनोवेशन्स) व स्पाइरल ऑफ साइलेंस आदि के प्रतिमानों का उपयोग किया जाएगा।
सहायक पाठ्य सामग्री पुस्तकें:
- भारत में जनसंचार और प्रसारण मीडिया - मधुकर लेले, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2011
- जनसंचार माध्यमों का वैचारिक परिप्रेक्ष्य - जवरीमल्ल पारेख, ग्रंथशिल्पी, नई दिल्ली, 2000
- सूचना क्रांति की राजनीति और विचारधारा - सुभाष धूलिया, ग्रंथशिल्पी, नई दिल्ली, 2001
- संचार के सिद्धांत - आर्मड मैतलार्त और मिशेल मैतलार्त, ग्रंथशिल्पी, 2010
- जनसंचारः संप्रेषण और विकास - देवेंद्र इस्सर, इंद्रप्रस्थ प्रकाशन, नई दिल्ली, 1995
- जनमाध्यम और मास कल्चर - जगदीश्वर चतुर्वेदी, सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, 1996
- मास कम्युनिकेशन थ्योरीः ऐन इंट्रोडक्शन - डेनिस मैक्वेल, विस्तार पब्लिकेशन, नई दिल्ली
Module-2: भारत में संचार माध्यमों का विकास
इस खंड में प्रमुख संपादकों जैसे भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रतापनारायण मिश्र, महावीर प्रसाद द्विवेदी, गणेशशंकर विद्यार्थी, बाबूराव विष्णु पराड़कर, बनारसीदास चतुर्वेदी, अज्ञेय, रघुवीर सहाय, राजेंद्र माथुर, प्रभाष जोशी और सुरेंद्र प्रताप सिंह के संपादकीय योगदान के विषय में बताया जाएगा। पाठ्यक्रम में विभिन्न समाचार पत्र समूहों तथा संवाद समितियों को भी सम्मिलित किया जाएगा। रेडियो प्रसारण के सिद्धांत व विशेषताओं को बताते हुए रेडियो समाचार लेखन, स्टूडियो रिकॉर्डिंग, साउंड मिश्रण, सामुदायिक रेडियो के उपयोग के बारे में अध्यापन होगा। इसी प्रकार टीवी जैसे माध्यम में समाचार लेखन, प्रोडक्शन, टीवी प्रसारण के सिद्धांत व विशेषताओं के विषय में बताया जाएगा।
निर्धारित विषय:
- प्रिंट पत्रकारिता: प्रथम चरण (सुधार युग), द्वितीय चरण (स्वाधीनता-स्वदेशी संघर्ष), तृतीय चरण (स्वाधीनता के बाद की समस्याएँ)
- रेडियो पत्रकारिता: रेडियो का इतिहास और वर्तमान, प्रसारण के सिद्धांत और विशेषताएं, आज़ादी के पहले और बाद की समस्याएँ, रेडियो समाचार (भाषा, प्रस्तुति और संयोजन)
- टीवी पत्रकारिता: टेलिविजन का इतिहास और वर्तमान, प्रसारण के सिद्धांत और विशेषताएं, टीवी समाचार लेखन के विभिन्न फॉर्मेट
सहायक ग्रन्थ:
- भारत में प्रेसः एक सिंहावलोकन - जीएस भार्गव, National Book Trust, नई दिल्ली, 2010
- हिंदी पत्रकारिताः हमारी विरासत (दो खंड) - शंभूनाथ, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2007
- हिंदी पत्रकारिता का वृहद इतिहास - अर्जुन तिवारी, प्रवीण प्रकाशन, नई दिल्ली
- वक्त गुजरता है - गंगाधर शुक्ल, सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, 2012
- टेलिविजन प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक रूप - रेमंड विलियम्स, ग्रंथशिल्पी, नई दिल्ली, 2010
- जब तोप मुकाबिल हो - प्रभाष जोशी, राजकमल प्रकाशन नई दिल्ली, 2008
- टेलिविजन इन इंडिया चेंजेस एंड चैलेंजेस - गोपाल सक्सेना, विकास पब्लिशिंग, 1996
- द न्यू मीडिया हैंडबुक - एंड्रयू ड्यूडने एंड पीटर राइड, राउटलेज, न्यूयार्क, 2006
- ऑनलाइन जर्नलिज्मः ए क्रिटिकल प्राइमर - जिम हाल, प्लूटो प्रेस, लंदन, 2001
Module-3: जनसंचार: उद्योग के रूप में
इस खंड में पत्रकारिता के आर्थिक ढांचे, media के विज्ञापन पक्ष व अर्थतंत्र, विभिन्न किस्म के राजनीतिक दबावों, दलीय निष्ठाओं, मार्केटिंग, समाचार चैनलों के बदलते आर्थिक आधार, स्वामित्व के स्वरूप, प्रबंधन व संपादकीय विभाग के बीच समन्वय, मानव संसाधन की अवधारणा, सहमति निर्माण/प्रोपगैंडा मॉडल का अध्ययन करते हुए 21वीं सदी में जनसंचार की प्रकृति का अध्ययन किया जाएगा।
निर्धारित विषय:
- प्रिंट और इलेक्ट्रानिक पत्रकारिता का बदलता आर्थिक स्वरूप
- सहमति उत्पादन की प्रक्रिया
- पाठक/दर्शक पर नियंत्रण
- माध्यमों के स्वामित्व का सवाल, क्रॉस ओनरशिप, एफडीआई आदि
सहायक ग्रन्थ:
- संस्कृति, विकास और संचार क्रांति - पी.सी जोशी, ग्रंथशिल्पी, नई दिल्ली
- मैन्युफैक्चरिंग कंसेंट: द पॉलिटिकल इकॉनॉमी ऑफ़ द मास मीडिया - एडवर्ड हरमन और नोआम चोमस्की, पैंथियन बुक्स, न्यूयार्क, 1988
- नेसेसरी इल्यूजंसः थॉट कंट्रोल इन डेमोक्रेटिक सोसाइटीज - नोआम चोमस्की, साउथएंड प्रेस, न्यूयार्क, 1989
- भारत में समाचारपत्र प्रबंधन - गुलाब कोठारी, हिंदी ग्रंथ अकादमी, जयपुर, 1997
- समकालीन पत्रकारिताः मूल्यांकन और मुद्दे - राजकिशोर (संपा), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 1994
Module 4: जनसंचार: व्यावहारिक-तकनीकी पक्ष
इस मॉड्यूल में समाचार पत्रों में समाचार लेखन के तरीकों तथा इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल माध्यमों पर लेखन के लिए व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। समाचार पत्रों के विभिन्न लेआउट, फॉर्मेट, डिजाइनिंग तथा संपादन के सॉफ्टवेयर, ग्राफिक्स (दृश्यांकन) के इस्तेमाल, टैबलॉयड व पत्रिका की छपाई, प्रिंटिंग तकनीक, फोटो फीचर तैयार करने व कैप्शन लिखने की विधि के व्यावहारिक पक्षों पर बल देने के कारण इस खंड में पूर्वनिर्धारित पाठ के स्थान पर कार्यशाला व व्यावहारिक योगदान की शिक्षण प्रविधि का इस्तेमाल होगा।
निर्धारित विषय:
- समाचार लेखन,
- वृत्त चित्र निर्माण
- वीडियो-फ़ोटो सम्पादन आदि से जुड़े व्यावहारिक व तकनीकी पक्षों का अध्यापन व प्रशिक्षण।
सहायक ग्रन्थ:
- समाचार पत्रों का इतिहास - अम्बिका प्रसाद वाजपेयी, ज्ञानमंडल, वाराणसी, 1986
- टेलिविजन प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक रूप - रेमंड विलियम्स, ग्रंथशिल्पी, नई दिल्ली, 2010
- भारत में प्रेसः एक सिंहावलोकन - जीएस भार्गव, नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली, 2010
- समकालीन पत्रकारिताः मूल्यांकन और मुद्दे - राजकिशोर (संपा), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 1994
- भारत की समाचारपत्र क्रांति - रॉबिन जेफ्री, आईआईएमसी, नई दिल्ली, 2004
- भारतीय पत्रकारिता का इतिहास - जे नटराजन, प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली, 2002
- भारतेंदु युग और हिंदी भाषा की विकास परंपरा - रामविलास शर्मा, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2017
- हिंदी पत्रकारिता का वृहद इतिहास - अर्जुन तिवारी, प्रवीण प्रकाशन, नई दिल्ली, 1997
- विकास और संचार क्रांति - पी.सी. जोशी, ग्रंथशिल्पी, दिल्ली, 2002
- संचार माध्यमों का वर्ग चरित्र - रेमंड विलियम्स, ग्रंथशिल्पी, नई दिल्ली, 2004
- भारत में जनसंचार और प्रसारण मीडिया - मधुकर लेले, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2011
- जनसंचार माध्यमों का वैचारिक परिप्रेक्ष्य - जवरीमल्ल पारेख, ग्रंथशिल्पी, नई दिल्ली, 2000
- सूचनाक्रांति की राजनीति और विचारधारा - सुभाष धूलिया, ग्रंथशिल्पी, नई दिल्ली, 2001
- जनसंचार माध्यम और मास कल्चर - जगदीश्वर चतुर्वेदी, सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, 1996
- जनसंचारः संप्रेषण और विकास - देवेंद्र इस्सर, इंद्रप्रस्थ प्रकाशन, नई दिल्ली, 1995
- विकास का समाजशास्त्र - श्यामाचरण दुबे, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 1995
- प्रसारण और समाज - मेहरा मसानी, नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली, 1977
Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF)
- Response Essay/PPT/Assignment-1 (25 Marks)
- Midterm Exam/PPT/Assignment-2/Project (25 Marks)
- End Term Exam (50 Marks)
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली