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हिंदी सिनेमा और लोक

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1MI203 4

Course Coordinator(s)    डॉ. सुनील कुमार यादव 

Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No 

Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

How does the course link with the vision of AUD? 

How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered? 
 

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

“हिंदी सिनेमा और लोक” पाठ्यक्रम के माध्यम से हिंदी सिनेमा और भारतीय लोक-संस्कृति के अंतर्संबंधों का आलोचनात्मक एवं सांस्कृतिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी हिंदी सिनेमा में लोकजीवन, लोकभाषा, लोककथाओं, लोकसंगीत, लोकनाट्य तथा लोक-संवेदनाओं के विविध रूपों को समझ सकेंगे। यह पाठ्यक्रम हिंदी सिनेमा द्वारा लोक-संस्कृति को अभिव्यक्त करता है साथ ही उसे संरक्षित, रूपांतरित तथा बाज़ारवादी संदर्भों में पुनर्सृजित भी करता है। यह पाठ्यक्रम हिंदी सिनेमा को केवल मनोरंजन के माध्यम के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श, सामूहिक स्मृति तथा जन-अनुभवों के दस्तावेज़ के रूप में देखने की दृष्टि विकसित करता है। इसके अंतर्गत लोक संस्कृति के अंतर्संबंधो, क्षेत्रीयता, जाति, वर्ग, लैंगिकता तथा ग्रामीण जीवन का अध्ययन किया जायेगा। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में आलोचनात्मक दृष्टि, दृश्य-संस्कृति के विश्लेषण की क्षमता तथा सिनेमा और समाज के पारस्परिक संबंधों को समझने की दक्षता विकसित करेगा।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • हिंदी सिनेमा और भारतीय लोक-संस्कृति के अंतर्संबंधों की समझ विकसित करना।
  • विद्यार्थियों को लोकजीवन, लोकभाषा, लोककला, लोकसंगीत एवं लोकनाट्य की सिनेमाई अभिव्यक्तियों से परिचित कराना।    
  • हिंदी सिनेमा को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक विमर्श के माध्यम के रूप में विश्लेषित करने की क्षमता विकसित करना।   
  • विद्यार्थियों में दृश्य-संस्कृति एवं लोकप्रिय संस्कृति के आलोचनात्मक अध्ययन की दृष्टि विकसित करना।   
  • हिंदी सिनेमा में क्षेत्रीयता, जाति, वर्ग, लैंगिकता तथा ग्रामीण-शहरी अनुभवों के चित्रण का विश्लेषणात्मक अध्ययन कराना। 
  • विद्यार्थियों में सिनेमा, समाज एवं लोक-संस्कृति के पारस्परिक संबंधों को समझने तथा उन पर स्वतंत्र चिंतन एवं शोध की प्रवृत्ति विकसित करना। 

Course Outcomes:  

  • CO1:  हिंदी सिनेमा और भारतीय लोक-संस्कृति के अंतर्संबंधों की पहचान एवं व्याख्या कर सकेंगे।
  • CO2:   हिंदी सिनेमा में लोकजीवन, लोकभाषा, लोककला, लोकसंगीत तथा लोकनाट्य के विविध रूपों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • CO3:   हिंदी सिनेमा को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक विमर्श के माध्यम के रूप में आलोचनात्मक दृष्टि से समझ एवं मूल्यांकित कर सकेंगे।
  • CO4:   हिंदी फिल्मों में क्षेत्रीयता, जाति, वर्ग, लैंगिकता तथा ग्रामीण-शहरी अनुभवों के चित्रण का तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन कर सकेंगे।
  • CO5:   दृश्य-संस्कृति एवं लोकप्रिय संस्कृति के अध्ययन हेतु आलोचनात्मक एवं अनुसंधानपरक दृष्टिकोण विकसित कर सकेंगे।
  • CO6:   सिनेमा, समाज एवं लोक-संस्कृति से संबंधित विषयों पर तार्किक, प्रभावी एवं अकादमिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने में सक्षम होंगे।

Modules and Readings

मॉड्यूल :1. लोक का अर्थ, अवधारणा और स्वरूप

इस मॉड्यूल के अंतर्गत विद्यार्थियों को लोक की परिभाषा, उसके अर्थ, अवधारणा और स्वरूप से विद्यार्थियों को अवगत कराया जायेगा। लोक किसी एक व्यक्ति की नहीं होता बल्कि सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति का परिणाम होता है। सिनेमा के माध्यम से इसकी अवधारणा को न सिर्फ़ विद्यार्थियों को अवगत कराया जायेगा बल्कि उसके साहित्यिक महत्त्व पर भी प्रकाश डाला जायेगा। हिंदी सिनेमा ने भारतीय लोकसंस्कृति को व्यापक स्तर पर प्रभावित किया है। विशेष रूप से ग्रामीण परिवेश, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक जीवन-मूल्यों को अनेक फिल्मों में प्रमुखता मिली है। इस मॉड्यूल के माध्यम से उसकी लोक परंपरा पर प्रकाश डाला जायेगा।
                  
निर्धारित पाठ :

  • लोक की परिभाषा एवं अवधारणा 
  • लोक का साहित्यिक एवं सिनेमाई महत्त्व 
  • हिंदी सिनेमा में लोक : एक परिचय

सहायक सामग्री: 

  • cribd.com/document/1005802063/सिनेमा-का-अर्थ-स्वरूप-एवं-अवधारणायें-1
  • हरीश कुमार, हिंदी सिनेमा और साहित्य, संजय प्रकाशन, दिल्ली  वसुधा, सिनेमा विशेषांक-2009.  https://www.hindivyakran.com/2023/01/lok-sahitya-ka-arth-paribhasha-aur-swaroop-spashta-kijiye.html#google_vignette
  • राही मासूम रज़ा, सिनेमा और संस्कृति, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली  https://www.jansatta.com/entertainment/hindi-cinema-folk/1918734/

माड्यूल : 2.  क्षेत्रीय सिनेमा में लोकजीवन की अभिव्यक्ति : संक्षिप्त परिचय

वर्तमान समय में भारत की क्षेत्रीय सिनेमा लोकजीवन, संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज, लोकभाषा और सामाजिक संरचना का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इन क्षेत्रीय सिनेमा के माध्यम से क्षेत्र-विशेष की लोकसंस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य और सामाजिक मूल्यों को विद्यार्थियों के मध्य प्रस्तुत किया जायेगा जिससे युवाओं में भारत की विविधता का सिनेमा के माध्यम से ज्ञान हो सके। भोजपुरी, मैथिली, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी तथा हरियाणवी सिनेमा में लोकजीवन की विविध छवियाँ दिखाई देती हैं। इन क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्में न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि लोकसंस्कृति के संरक्षण और प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका का भी निर्वहन करती हैं।
           
निर्धारित पाठ : 

  • भोजपुरी सिनेमा- गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ईबो, गंगा 
  • मैथिली सिनेमा- कन्यादान, गामक घर 
  • राजस्थानी सिनेमा- धरती धोरां री, बालम थारी चुनरी  
  • छत्तीसगढ़ी सिनेमा- घर-द्वार, मोर छैया भुईया  
  • हरियाणवी सिनेमा- चंद्रावल, लाडो बसंती 
  • सहायक सामग्री: https://www.shodhpatra.org/papers/volume-2/issue-10/spijsh45358/
  • https://www.punjabkesari.in/national/news/cinema-is-a-powerful-tool-to-preserve-regional-languages-2065244
  • https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-flight-for-rajasthans-cinema-dug-dug-got-the-support/article-152795


माड्यूल : 3.  हिंदी सिनेमा में लोक : विभिन्न पक्ष

इस  माड्यूल के अंतर्गत सिनेमा में मौजूद विविध क्षेत्रों की लोक संस्कृति, लोक-भाषा, लोक-संस्कार, धार्मिक मान्यताओं, लोकगीत और लोकनृत्य का अवलोकन विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। भाषा एक ऐसा माध्यम है जो क्षेत्र-विशेष की विविधता को अभिव्यक्ति प्रदान करता है। इस  माड्यूल के अंतर्गत पात्रों की सहज अभिव्यक्ति भाषा द्वारा ही संभव हो पाती है। पात्रों की क्रियाविधि, उनके द्वारा अपनाए गए संस्कार, धार्मिक मान्यताओं जैसे विविध पक्षों का ज्ञान विद्यार्थियों को इस  माड्यूल के अंतर्गत कराया जायेगा।
                           
निर्धारित पाठ : 

  • लोक-संस्कृति- नदिया के पार (भोजपुरी एवं अवधी)
  • लोकभाषा- चरणदास चोर (छत्तीसगढ़ी)
  • लोक संस्कार- पहेली (राजस्थानी)
  • धार्मिक मान्यताएं- गाइड, कांजीवरम (दक्षिण भारतीय समाज की सांस्कृतिक-धार्मिक संरचना का चित्रण)
  • लोकगीत एवं लोकनृत्य- दादा लखमी ( हरियाणवी)

सहायक सामग्री: 

  • राही मासूम रज़ा, सिनेमा और संस्कृति, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली 
  • सुधीश पचौरी, जनसंचार माध्यम, भाषा और साहित्य, श्री नटराज प्रकाशन 

माड्यूल : 4.  हिंदी सिनेमा में लोक : वैचारिक पक्ष

हिंदी सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज की वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों को अभिव्यक्त करने का भी माध्यम है। हिंदी फिल्मों में लोकजीवन से जुड़े अनेक प्रश्न- जैसे जातिगत भेदभाव, किसान जीवन का संघर्ष, सामाजिक एवं राजनीतिक शोषण, बेरोजगारी और पलायन- को गंभीरता से प्रस्तुत किया गया है। इन फिल्मों के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याएँ, जनसंघर्ष और परिवर्तन की चेतना अभिव्यक्त होती हुई दिखाई देती हैं। विद्यार्थी इस माड्यूल के अंतर्गत विभिन्न फिल्मों के माध्यम से समाज के विविध पक्षों को जान और समझ सकेंगे। वह यह जान सकेंगे कि फिल्मों ने किस प्रकार जातीय द्वेष, किसानी व्यथा और राजनीतिक अत्याचार को वैश्विक समस्या के रूप में अभिव्यक्त किया है। आज भी भारतीय समाज इन समस्याओं से निजात नहीं पा सका है।              

निर्धारित पाठ : 

  • जातिगत भेदभाव - बैंडिट क्वीन, फैंडी, अछूत कन्या. 
  • किसानी जीवन का संघर्ष- लगान, कड़वी हवा, मंथन, न्यूटन. 
  • सामाजिक और राजनीति शोषण- दामुल, गंगाजल, राजनीति, हजारों ख्ह्वाहिशें ऐसी.
  • बेरोजगारी और पलायन- पीपली लाइव, सिटी ऑफ़ गोल्ड, सलाम बाम्बे, न्यूटन, स्वदेश.

सहायक सामग्री: 

  • जवरीमल्ल पारख, लोकप्रिय सिनेमा और सामाजिक यथार्थ, अनामिका प्रकाशन https://l1nq.com/te1ipi5 

Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Response Essay (30 Marks)
  • Midterm Exam (30 Marks)
  • End Term Exam (40 Marks)
     
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