| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core | NSOL1HN115 | 4 |
Course Coordinator(s) Dr. Geeta Pandey, Dr. Anant Vijay Paliwal
Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
How does the course link with the vision of AUD?
How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)
हिंदी रंगमंच न केवल एक कला है, बल्कि यह समाज के विकास और परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम भी है। यह हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखता है और नए विचारों और सोच को बढ़ावा देता है। वर्तमान समय में भी हिंदी रंगमंच का महत्व कम नहीं हुआ है, और इसे नई पीढ़ी को जानने और समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। हिंदी रंगमंच का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। भारतीय नाट्य परंपरा की शुरुआत भरतमुनि के "नाट्यशास्त्र" से मानी जाती है। प्राचीन काल में संस्कृत नाटकों का प्रमुख स्थान था, जिनमें कालिदास, भास, और शूद्रक जैसे महान नाटककारों के नाटक प्रमुख हैं। मध्यकाल में भक्ति आंदोलन के दौरान धार्मिक नाटकों और लोकनाट्य परंपराओं जैसे रामलीला, रासलीला, नौटंकी, स्वांग, और भवाई ने हिंदी रंगमंच को नया स्वरूप दिया। वहीं आधुनिक हिंदी रंगमंच का आरंभ उन्नीसवीं सदी में हुआ। इस काल में भारतीय रंगमंच पर पश्चिमी प्रभाव पड़ा, और आधुनिक तकनीकों व शैलियों का समावेश हुआ। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को हिंदी रंगमंच का पितामह माना जाता है, जिन्होंने हिंदी रंगमंच को सामाजिक मुद्दों और जनजागरण से जोड़ा ।
पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
- हिंदी रंगमंच पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय रंगमंच की परंपरा, इतिहास, स्वरूप और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना है
- इसके माध्यम से विद्यार्थियों को नाटकों के साहित्यिक और कलात्मक पक्ष की जानकारी दी जाएगी
- मंचन की तकनीकी, दृश्यात्मक और अभिनय संबंधी कौशल से भी उन्हें अवगत कराया जाएगा ।
- अभिनय, निर्देशन और मंचन की प्रक्रियाओं से छात्रों को परिचित कराना।
- छात्रों की रचनात्मक एवं सृजनात्मक सोच को विकसित करना।
- लोक रंगमंच एवं पारंपरिक रंग शैलियों के सांस्कृतिक महत्व से विद्यार्थियों को परिचित कराना।
- नाट्य मंचन के माध्यम से विद्यार्थियों में टीमवर्क एवं नेतृत्व क्षमता का विकार करना।
Course Outcomes:
- CO1: हिंदी रंगमंच के विकास, उसके विभिन्न चरणों और भारतीय समाज पर उसके प्रभाव की समझ होना।
- CO2: विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की समझ के साथ ही सांस्कृतिक संवेदनशीलता का विकास।
- CO3: छात्रों में लेखन, अभिनय, निर्देशन और रंगमंच के अन्य पहलुओं द्वारा रचनात्मकता और सृजनात्मकता का विकास होना।
- CO4: अभिनय और मंचन के माध्यम से छात्रों की संवाद शैली, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता में सुधार होना।
- CO5: नाटकों के मंचन में सामूहिक कार्य के जरिये छात्रों में टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता का विकास होना।
Modules and Readings
मॉड्यूल1 रंगमंच की अवधारणा
इस पाठ्यक्रम के प्रथम मॉड्यूल में विद्यार्थी को रंगमंच के अर्थ और स्वरूप के विषय में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही रंगमंच के सैद्धांतिक पक्ष जिसके अंतर्गत वस्तु, नेता, रस, तत्व आते हैं, इन पर पर्याप्त चर्चा की जाएगी । साथ ही विद्यार्थियों को पाश्चात्य मत के अनुसार नाटक के जो तत्व बताए गए हैं उनकी जानकारी भी दी जाएगी। नाटक के तकनीकी पक्ष की विस्तृत जानकारी से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया जाएगा। नाटक में निर्देशक, अभिनेता और दर्शक की क्या भूमिका होती है ,इस पर चर्चा की जाएगी।
निर्धारित विषय- आचार्य भरतमुनि की रंगमंच की अवधारणा: अर्थ और स्वरूप
रंगमंच के विविध पक्ष:
- सैद्धांतिक पक्ष- वस्तु, नेता, रस (पश्चिम मत की चर्चा)
- तकनीकी पक्ष- दृश्यबंध, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था, रंगलेपन, वेशभूषा
- निर्देशक ,अभिनेता, दर्शक
सहायक पुस्तकें-
- भारतीय रंगमंच सिद्धांत और स्वरूप, डॉ रघुवर दयाल वार्ष्णेय , के. एल.पचौरी प्रकाशन गाजियाबाद, संस्करण 2015
- नाटक और रंगमंच, डॉ सीताराम झा ‘श्याम’ बिहार राष्ट्रीय भाषा परिषद पटना, संस्करण 2012
- नाटक चिंतन और रंग प्रयोग, डॉ.मांधाता ओझा, डॉ .शशि सरदाना, कला मंदिर दिल्ली, संस्करण 2003
- नाटक के सौ वर्ष, संपादक अजित पुष्कल, हरिश्चंद्र अग्रवाल , शिल्पायन प्रकाशन,दिल्ली संस्करण 2004
माड्यूल 2 हिंदी रंगमंच की पूर्व-पीठिका
इस माड्यूल में विद्यार्थियों को रंगमंच की पूर्व-पीठिका के विषय में बात करते हुए संस्कृत रंगमंच, लोक रंगमंच और विभिन्न पारम्परिक रंगमंच तथा उनकी शैलियों का परिचय दिया जाएगा। नाटक और रंगमंच दोनों के अंतर्संबंध की विस्तृत जानकारी यहां दी जाएगी।
निर्धारित विषय-
- संस्कृत रंगमंच
- लोक रंगमंच उदय एवं पारंपरिक रंगमंच (सामान्य परिचय)
- हिंदी रंगमंच तथा नाटक का अंतर्संबंध
सहायक पुस्तकें-
- नाटक के सौ वर्ष, संपादक अजित पुष्कल, हरिश्चंद्र अग्रवाल, शिल्पायन प्रकाशन, दिल्ली संस्करण 2004
- रंगमंच के सिद्धांत, संपादक महेश आनंद, देवराज अंकुर, राजकमल प्रकाशन दिल्ली, संस्करण 2014
- रंग कर्म और नाटककार, डॉ लक्ष्मण सहाय, तरुण प्रकाशन गाजियाबाद, संस्करण 2015
- समसामयिक हिंदी नाटकों में चरित्र सृष्टि, जयदेव तनेजा, तक्षशिला प्रकाशन नई दिल्ली
माड्यूल 3 हिंदी रंगमंच के उदय की विकास यात्रा
इस माड्यूल में विद्यार्थियों को हिंदी रंगमंच के प्रारंभ और उसकी विकास यात्रा की जानकारी दी जाएगी। भारतेंदु युगीन रंगमंच, माधव शुक्लयुगीन रंगमंच, प्रसाद युगीन रंगमंच, प्रसादोत्तर रंगमंच और स्वातंत्र्योत्तर रंगमंच की विकास-यात्रा की समग्र जानकारी विद्यार्थियों को दी जाएगी। साथ ही समकालीन रंगमंच में नवाचारों से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया जाएगा।
निर्धारित विषय-
- भारतेन्दु युगीन रंगमंच (व्यावसायिक तथा अव्यावसायिक रंगमंच)
- प्रसादयुगीन युगीन रंगमच
- प्रसादोत्तर रंगमंच
- स्वातंत्र्योत्तर रंगमंच तथा समकालीन रंगमंच
सहायक पुस्तकें-
- हिंदी नाटकों का उद्भव और विकास,डॉ. दशरथ ओझा, राजपाल एंड सन्स, नई दिल्ली
- हिंदी नाटक आज तक, डॉ वीणा गौतम, शब्द सेतु दिल्ली, संस्करण 2001
- हिंदी नाटक और रंगमंच समकालीन परिदृश्य, बृजराज किशोर, जनप्रिय प्रकाशन दिल्ली, संस्करण 1988
माड्यूल 4 हिंदी की प्रसिद्ध रंग संस्थाएँ व प्रमुख रंग व्यक्तित्व
इस माड्यूल में विद्यार्थियों को हिंदी रंगमंच की प्रसिद्ध रंग संस्थाओं और प्रमुख रंग व्यक्तित्वों की परिचयात्मक जानकारी दी जाएगी। जिससे विभिन्न रंग संस्थाओं और रंगकर्मियों के रंगकर्म और उनकी दृष्टि को समझने की क्षमता विकसित हो सके।
निर्धारित विषय-
- इप्टा
- पृथ्वी थियेटर
- राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली
- भारत भवन,भोपाल
- भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ
- इब्राहिम अल्काजी
- ब. व. कारंत
- श्यामनन्द जालान
- सत्यदेव दुबे
- मोहन महर्षि
- त्रिपुरारी शर्मा
सहायक पुस्तकें-
- प्रसाद के नाटक, प्रो.रमेश गौतम, ईशा ज्ञानदीप प्रकाशन दिल्ली, संस्करण 2014
- नई रंग चेतना और हिंदी नाटककार, जयदेव तनेजा, तक्षशिला प्रकाशन नई दिल्ली, संस्करण 1994
- प्रसादोत्तर नाट्य साहित्य, डॉ विनय बापट मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, संस्करण 1971
Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):
- Response Essay (25 Marks)
- Midterm Exam (25 Marks)
- End Term Exam (50 Marks)
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली