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हिन्दी सिनेमा और साहित्य

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Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1MI201 4

Course Coordinator(s)  

Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No 

Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

How does the course link with the vision of AUD? 

How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered? 

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

कला के रूप में देखें तो सिनेमा सभी कलाओं का समुचित प्रयास है। सिनेमा और साहित्य एक दूसरे के पूरक हैं। मनुष्य जीवन के साथ उसकी संस्कृति, संवेदना और सामाजिक गतिविधि को दोनों ही माध्यम प्रभावित करते हैं लेकिन साहित्य सिनेमा के माध्यम से अधिक विस्तार पाटा है। वह ऐसी जनता से भी संवाद करने में सुलभ हैं जिनके लिए साहित्य का अध्ययन संभव नहीं है। साहित्य जहाँ शब्दों द्वारा समाज और जीवन का चित्रण करता है वहीँ सिनेमा दृश्य तथा ध्वनि के माध्यम से समाज से जुड़ता है। अभिनय सिनेमा कला की सबसे महत्वपूर्ण अंग है जिसमें दर्शक अपने आपको जोड़ लेता है। भारतीय साहित्य ने सिनेमा को न केवल दिशा दी बल्कि ऐसी फिल्मों के निर्माण का अवसर दिया जिससे समाज विकसित हो सके। साहित्य और सिनेमा दोनों ही मनुष्य जीवन की गतिविधियों को जीवंत बनाते हैं। साहित्य सिनेमा कहानी देता है जिससे पात्रों और घटनाओं का सृजन होता है वहीं सिनेमा साहित्य जनसंचार के माध्यम से व्यापक लोगों से जोड़ता है साथ ही दृश्यात्मक विस्तार देता है।

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • हिन्दी सिनेमा और साहित्य के पारस्परिक संबंधों की समझ विकसित करना।
  • साहित्य और सिनेमा के माध्यम से समाज, संस्कृति एवं मानवीय संवेदनाओं के विविध आयामों से विद्यार्थियों को परिचित कराना।
  • साहित्यिक कृतियों के सिनेमाई रूपांतरण तथा उनके सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कराना।
  • साहित्य और सिनेमा की अभिव्यक्ति-प्रणालियों—शब्द, दृश्य और ध्वनि की विशेषताओं को समझाना।
  • अभिनय, कथानक, पात्र और दृश्यात्मक प्रस्तुति के माध्यम से सिनेमा की कलात्मक संरचना का परिचय कराना।
  • विद्यार्थियों में साहित्य और सिनेमा के अध्ययन के माध्यम से आलोचनात्मक, सृजनात्मक एवं संवेदनशील दृष्टि विकसित करना

Course Outcomes:  

  • CO1 : विद्यार्थी हिन्दी सिनेमा और साहित्य के पारस्परिक संबंधों को समझ सकेंगे।
  • CO2 : विद्यार्थी साहित्य और सिनेमा के माध्यम से समाज, संस्कृति एवं मानवीय संवेदनाओं के विविध आयामों से परिचित हो सकेंगे।
  • CO3 : विद्यार्थी साहित्यिक कृतियों के सिनेमाई रूपांतरण और उनके सामाजिक प्रभाव का विवेचन कर सकेंगे।
  • CO4 : विद्यार्थी साहित्य और सिनेमा की अभिव्यक्ति-प्रणालियों की विशेषताओं को समझ सकेंगे।
  • CO5 : विद्यार्थी दृश्यात्मक प्रस्तुति के माध्यम से सिनेमा की कलात्मक संरचना से परिचित हो सकेंगे।
  • CO6 : विद्यार्थी साहित्य और सिनेमा के अध्ययन के आधार पर आलोचनात्मक, सृजनात्मक एवं संवेदनशील दृष्टि विकसित कर सकेंगे।

Modules and Readings

मॉड्यूल – 1 हिंदी सिनेमा और साहित्य का अन्तःसम्बन्ध

साहित्य और सिनेमा एक दूसरे जुड़कर समाज की वास्तविकता को थोडा सहज करके अभिव्यक्त करते हैं। दोनों मिलकर समाज की गहरी अनुभूति को सामाजिक यथार्थ तक ले जाते हैं। साहित्य के शब्द सिनेमा के दृश्य में बदलते ही रोचक और ग्रहणीय हो जाते हैं। इस माड्यूल में सिनेमा का संक्षिप्त परिचय देते हुए उसकी वैचारिकी और समाज पर उसके प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही विद्याथियों को साहित्य और सिनेमा में अंतर भी समझाने का प्रयास किया जाएगा। सबसे आवश्यक है यह समझाना कि, साहित्य और सिनेमा एक दूसरे से जुड़े होने के बाद भी अपनी संरचना में बिलकुल भिन्न हैं। ऐसे में दोनों में कुछ ऐसे सूत्रों को समझना आवश्यक है जो इन्हें एक साथ खड़ा करते हैं।  

निर्धारित विषय:-

  • सिनेमा का परिचय और संरचना 
  • साहित्य की वैचारिकी और समाज   
  • सिनेमा और साहित्य का अंतर्संबंध 
  • साहित्य और सिनेमा की सैद्धांतिकी में अंतर 

 सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें  :- 

  • साहित्य और सिनेमा, शत्रुघ्न प्रसाद, रुद्रा प्रकाशन, दिल्ली
  • साहित्य और सिनेमा: बदलते परिदृश्य में संभावनाएँ और चुनौतियाँ, सं. डॉ. शैलजा भारद्वाज, चिंतन प्रकाशन, कानपुर 
  • साहित्य और सिनेमा : रूपांतरण के आयाम, विजय मिश्र, शिवालिक प्रकाशन, दिल्ली 
  • सिनेमा और साहित्य, भारती गोरे, नई किताब प्रकाशन, दिल्ली 

मॉड्यूल 2 :  साहित्य का सिनेमाई रूपांतरण : चुनौतियाँ और समाधान

इस माड्यूल में साहित्य का सिनेमा में रुपंतारित की प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया जाएगा। जब कोई साहित्य सिनेमा में बदलता है तो उसकी कुछ शर्ते होती हैं साथ ही कुछ चुनौतियाँ भी। इन्हीं चुनौतियों की बारीकी को समझना पहला उद्देश्य होगा। साहित्य का सिनेमाई रूपांतरण मात्र कहानी से पटकथा में बदलना नहीं है बल्कि चरित्र निर्माण की प्रक्रिया, शब्द से दृश्य रूपांतरण की प्रक्रिया और रचना से सिनेमा बनने प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। इस माड्यूल में साहित्य के सिनेमाई रूपांतरण की तकनीकि को विद्यार्थियों को समझना भी महत्वपूर्ण बिंदु है।  

 निर्धारित विषय: 

  • कहानी से पटकथा 
  • पटकथा लेखन की सैद्धांतिकी
  • चरित्र निर्माण में अंतर  
  • कृति से सिनेमा की निर्माण प्रकिया 
  • शब्द से दृश्य की यात्रा 
  • संवाद, नाटकीयता और अभिनय

सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :-

  • साहित्य का धर्म, श्रीधर पराड़कर, अखिल भारतीय साहित्य न्यास, दिल्ली  
  • हिन्दी सिनेमा और उसका अध्ययन, प्रो. रमा हंस प्रकाशन, दिल्ली
  • भारतीय सिनेमा: एक अनंत यात्रा, प्रसून सिन्हा, श्री नटराज प्रकाशन, दिल्ली 
  • हिंदी सिनेमा में साहित्यिक विमर्श, डॉ. रमा, हंस प्रकाशन, दिल्ली 
  • हिंदी सिनेमा का इतिहास, मनमोहन चढ्ढा, सचिन प्रकाशन, दिल्ली 
  • सिनेमाई भाषा और हिंदी संवादों का विश्लेषण, डॉ. किशोर वासवानी, हिंदी बुक सेंटर, दिल्ली 

माड्यूल 3: हिंदी उपन्यासों पर आधारित फिल्में

इस माड्यूल में हिंदी के प्रमुख उपन्यासों के सिनेमाई रूपांतरण की प्रक्रिया के विभिन्न तकनीकि बिंदु, समाज पर उसके प्रभाव आदि का अध्ययन किया जाएगा। यह माड्यूल यह समझना भी महत्वपूर्ण होगा कि हिंदी सिनेमा भारत की साहित्यिक विरासत को कितना सजोंपाता है। उपन्यास एक वृहद् विधा है। मुख्य घटना और पात्रों के साथ तमाम घटनाएँ और पात्रों को समेट कर चलता है। निर्देशक को इस चुनौती को ही समझना होता है कि कौन सी घटना और पात्र  को कितना महत्त्व देना होता है। इस माड्यूल में इन्हीं बिन्दुओं पर गहराई से विचार किया जाएगा जिससे विद्याथियों के अन्दर सिनेमा बनाने की तकनीकी का विकास हो सके।    

निर्धारित विषय

  • गोदान 
  •  गबन 
  • तमस
  • चित्रलेखा 
  • सूरज का सांतवा घोड़ा 

सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :- 

  • साहित्य का धर्म, श्रीधर पराड़कर, अखिल भारतीय साहित्य न्यास, दिल्ली 
  • डॉ. रमा, हिंदी सिनेमा में साहित्यिक विमर्श, हंस प्रकाशन, दिल्ली

माड्यूल 4 :  हिंदी कहानी  पर आधारित फिल्में

इस माड्यूल में कहानियों के सिनेमाई रूपांतरण की चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। ढाई से तीन घंटे की फिल्म के लिए उपन्यास में यह स्पेस मिलता है कि क्या छोड़ा जा सकता है लेकिन कहानी जैसी छोटी विधा को तीन तक विस्तार देना अधिक चुनौतीपूर्ण है। इस माड्यूल में विभिन्न निर्देशकों द्वारा कहानी के सिनेमाई रूपांतर को समझने का प्रयास किया जाएआ साथ ही हिंदी की प्रमुख कहानियो पर बनी फिल्मों पर चर्चा भी जाएगी।

निर्धारित विषय :- 

  • उसने कहा था 
  • तीसरी कसम 
  • रजनीगंधा (यही सच है) 
  • सद्गति 
  • शतरंज के खिलाड़ी

सहायक पाठ सामग्री एवं पुस्तकें :- 

  • शेक्सपियर और सिनेमा :महान रचनाकार की कृतियों पर निर्मित फिल्मों का आकलन, विजय पाडलकर, अनुवादक, डॉ. कृष्ण कुमार उपाध्याय, संवाद प्रकाशन, दिल्ली 
  • जवरीमल्ल पारख, जनसंचार माध्यमों का वैचारिक परिप्रेक्ष्य, ग्रंथशिल्पी प्रकाशन, दिल्ली
  • सिनेमा: कल, आज, कल, विनोद भारद्वाज, वाणी प्रकाशन, वाणी प्रकाशन दिल्ली
  • भारत में हिंदी सिनेमा, डॉ. दीनानाथ साहनी, बिहार हिंदी ग्रन्थ अकादमी, पटना  

   
Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Response Essay/Assignment-1 (25 Marks)
  • Midterm Exam/PPT/Assignment-2 (25 Marks)
  • End Term Exam (50 Marks)
     
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