• header Image

हिन्दी नाटक एवं एकांकी

Home/ हिन्दी नाटक एवं एकांकी
Course Type Course Code No. Of Credits
Discipline Core NSOL1HN104 4

Course Coordinator(s)    डॉ.निकिता जैन

Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No 

Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार

Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long

How does the course link with the vision of AUD? 

स्नातक स्तर के दूसरे सत्र के लिए प्रस्तावित यह पाठ्यक्रम ‘हिंदी नाटक और एकांकी’ पर केन्द्रित है | प्रस्तावित पाठ्यक्रम में निर्धारित पाठ के ज़रिये विद्यार्थी ‘भारतेंदु युग’ (1857) से लेकर ‘प्रसादोत्तर (1950 के पश्चात्)’ तक हिंदी नाटक एवं एकांकी की विकास यात्रा का अध्ययन विभिन्न ऐतिहासिक, सामाजिक, साहित्यिक तथा सांस्कृतिक संदर्भों के परिप्रेक्ष्य में करेंगे | विद्यार्थी नाटक एवं एकांकी के अध्ययन के माध्यम से देश और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों के प्रति अपनी एक समझ विकसित कर सकेंगे और इसी तारतम्य में सुचिंतित दिशा खोजने का प्रयास भी करेंगे जो कि अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली के विज़न के अनुरूप है |

How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered? 

स्नातक (हिंदी) के प्रथम सत्र में विद्यार्थी ‘हिंदी कहानी (प्रेमचंद पूर्व से लेकर स्वातंत्र्योत्तर तक )’ पाठ्यक्रमों का पठन-पाठन कर चुके होंगे जिसके अंतर्गत भारतेंदु युग से लेकर स्वतंत्रता पश्चात् तक की युगीन परिस्थितियों का खाका उनके ज़ेहन में पहले ही तैयार हो चुका होगा | इस पूर्व निर्मित पृष्ठभूमि के कारण विद्यार्थी तत्कालीन युगीन परिस्थितियों और साहित्यिक प्रवृत्तियों के आईने में, पाठ्यक्रम में निर्धारित नाटक एवं एकांकियों का न केवल भली-भांति अध्ययन कर पायेंगे बल्कि उसका समालोचनात्मक विश्लेषण करने में भी सक्षम हो जायेंगे | 

पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य ‘नाटक और एकांकी’ में अंतर स्पष्ट करते हुए उसके उद्भव और विकास को कालक्रमानुसार रेखांकित करना है ताकि विद्यार्थी भारतेंदु युग से लेकर स्वतंत्रता पश्चात तक के ‘हिंदी नाटक और एकांकी’ के सफ़र के प्रति अपना एक स्पष्ट नजरिया विकसित कर सकें |  इसके अतिरिक्त साहित्य में हिंदी नाटक और एकांकी के सन्दर्भ में समय के साथ-साथ जो परिवर्तन हुए, विभिन्न नाटककारों के नाटकों की रंगमंचीयता को लेकर जो बहसें हुईं, हिंदी एकांकी के सूत्रपात और प्रथम एकांकी को लेकर जो विवाद और मतभेद हैं उनसे भी विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में निर्धारित पाठों की सहायता से परिचित कराया जाएगा ताकि वह हिंदी नाटक एवं एकांकी के इतिहास का बारीकी के साथ विश्लेषण कर सकें | स्वतंत्रता के पश्चात नाटक तथा एकांकियों की विषय-वस्तु एवं शिल्प के चयन में जिस प्रकार बदलाव नज़र आने लगा, रंगमंचीयता और अभिनेयता पर किस प्रकार अब पहले से ज्यादा बल दिया जाने लगा, उपन्यास और कहानी की तरह अब नाटक और एकांकी भी कैसे यथार्थ से अधिक जुड़ गए, इन सभी पहलुओं पर इस पाठ्यक्रम के तहत  प्रकाश डाला जाएगा |

पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)

  • विद्यार्थियों को हिंदी नाटक एवं एकांकी के स्वरूप, विकास, संरचना तथा प्रकृति का स्पष्ट एवं व्यापक ज्ञान प्रदान करना ।
  • विद्यार्थियों में नाटक एवं एकांकी की ऐतिहासिक परम्परा को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समझने की क्षमता विकसित करना।
  • विद्यार्थियों को सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों के संदर्भ में रचनाओं के विश्लेषण के लिए प्रेरित करना 
  • विद्यार्थियों को नाट्य-कला के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराते हुए, उनमें मंचन संबंधी दक्षता विकसित करना।
  • कार्यशालाओं एवं प्रस्तुति-आधारित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी अवसरों के लिए तैयार करना।

Course Outcomes:  

  • CO1:  विद्यार्थी हिंदी नाटक एवं एकांकी के मूलभूत स्वरूप, प्रमुख विशेषताओं एवं विकास-क्रम का वर्णन कर सकेंगे।
  • CO2:  विद्यार्थी नाटक एवं एकांकी की संरचना तथा तत्त्वों को विभिन्न संदर्भों में स्पष्ट रूप से समझ सकेंगे |
  • CO3: विद्यार्थी सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों के संदर्भ में रचनाओं का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • CO4: विद्यार्थी रचना और रचनाकार की प्रासंगिकता का समकालीन संदर्भों में आलोचनात्मक मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • CO5: विद्यार्थी नाट्य-कला के व्यावहारिक पक्ष (संवाद-अभिनय, मंच-संयोजन, निर्देशन आदि) का अनुप्रयोग कर सकेंगे
  • CO6: विद्यार्थी चयनित नाटक या एकांकी के अंशों का सृजनात्मक रूप से मंचन एवं प्रस्तुतीकरण करने में सक्षम हो सकेंगे

Modules and Readings

मॉड्यूल – 1  हिन्दी नाटक एवं एकांकी का उद्भव एवं विकास  

प्रस्तुत पाठ्यक्रम का मॉड्यूल-1  'नाटक तथा एकांकी की अवधारणा',  'हिंदी नाटक और एकांकी के उदय एवं विकास' पर केन्द्रित रहेगा जिसे निर्धारित पाठों के परिप्रेक्ष्य में विद्यार्थियों के समक्ष रखा जायेगा| इस माड्यूल के अंतर्गत हिंदी नाटक एवं एकांकी के बीच क्या अंतर है ? दोनों एक दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं ? इसको लेकर विद्वानों के बीच जो मतभेद हैं इन पर भी विद्यार्थियों का ध्यान आकृष्ट किया जाएगा| कुछ विद्वान या आलोचक एकांकी को नाटक का लघु रूप मानते हैं, यह धारणा कितनी सही है या गलत ? दोनों विधाओं के शिल्प में क्या अंतर है ? इन सभी पहलुओं पर विद्यार्थियों का एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इस माड्यूल में नाटक  ‘भारत दुर्दशा’, ‘अंधेर नगरी’ (कोई एक ) तथा  एकांकी – ‘दीपदान’, ‘पृथ्वीराज की आँखें’ (कोई एक) का अध्ययन एक साथ रखा गया है ताकि विद्यार्थी विषय-वस्तु, शिल्प, रंगमंचीयता आदि दृष्टि से दोनों का तुलनात्मक अध्ययन कर उसमें सहसंबंध भी स्थापित कर सकें |  ‘भारत –दुर्दश’ एवं ‘ अंधेर  नगरी’ जहाँ एक ओर हिंदी नाटक के प्रणेता भारतेंदु के  नाटक है वहीं ‘दीपदान’,’पृथ्वीराज की आँखें’ के रचयिता हैं रामकुमार वर्मा, जिन्हें हिंदी एकांकी के सूत्रपात का श्रेय दिया जाता है | हालाँकि इस सम्बन्ध में अनेक विवाद हैं कि हिंदी की पहली एकांकी किसे कहा जाए लेकिन डॉ. नगेन्द्र के अनुसार – हिंदी एकांकी के जनक डॉ. राम कुमार वर्मा ही हैं | उक्त दोनों रचनाओं के लेखन काल में काफी अंतराल है | इस अंतराल के दौरान हिंदी नाटक की विकासयात्रा कैसी रही, नाटक की इस विकासशील यात्रा के मध्य में एकांकी ने किस प्रकार अपना स्थान बनाया, इन सभी पहलुओं का अध्ययन इस माड्यूल में अपेक्षित रहेगा |

निर्धारित विषय : 

  • नाटक एवं एकांकी की संरचना एवं प्रकृति 
  • नाटक एवं एकांकी उद्भव एवं विकास 
  • नाटक – भारत-दुर्दशा/अंधेर नगरी(भारतेंदु हरिश्चंद्र) – कोई एक 
  • एकांकी -दीपदान/पृथ्वीराज की आँखें (रामकुमार वर्मा) -कोई एक

सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें  :- 

  • हिंदी नाटक : उद्भव और विकास – दशरथ ओझा, राजपाल एंड संस, कश्मीरी गेट, दिल्ली, 2008. 
  • भारत-दुर्दशा : भारतेंदु हरिश्चन्द्र, संपा. लक्ष्मी सागर वार्ष्णेय, विश्वविद्यालय प्रकाशन,गोरखपुर, 1953. 
  • सप्तकिरण – डॉ. रामकुमार वर्मा, नेशनल इंफ़रमेशन एंड पब्लिकेशन लिमिटेड, बम्बई, प्रथम संस्करण -1947. 
  • पृथ्वी राज की आँखें - https://www.hindwi.org/ebooks/pirthavi-raaj-ki-aankhen-ramkumar-verma-ebooks 
  • दीपदान - https://www.hindwi.org/ebooks/mere-shreshth-rang-ekanki-ramkumar-verma-ebooks
  • नाटककार भारतेंदु की रंग-परिकल्पना, सं. सत्येन्द्र तनेजा, राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली, 2002. 
  • हिंदी एकांकी- सिद्धनाथ कुमार, नेहा पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, दिल्ली, 2009. 
  • एकांकी उद्भव और विकास - मंजरी त्रिपाठी, ज्ञान-विज्ञान प्रकाशन दिल्ली | 
  • अंधेर नगरी - https://www.hindwi.org/Play/andher-nagri-chaupatt-raja-take-ser-bhaji-take-ser-khaja-bharatendu-harishchandra-play 

मॉड्यूल 2 :

इस माड्यूल के अंतर्गत प्रसाद एवं प्रसाद के समकालीन रचनाकारों द्वारा कृत रचनाओं को रखा गया है | भारतेंदु ने हिंदी नाटक को जो साहित्यिक भूमिका प्रदान की उसे कालान्तर में प्रसाद ने पल्लवित किया | हालांकि जयशंकर प्रसाद का आगमन नाटक के क्षेत्र में काफी बाद में हुआ लेकिन अपने ऐतिहासिक नाटकों के माध्यम से प्रसाद ने भारत के गौरवशाली अतीत का चित्रण कर राष्ट्रीयता भावना उत्पन्न करने का सफल प्रयास किया | अपने नाटकों में उन्होंने अतीत के पटल पर वर्तमान का चित्रण किया तथा इतिहास एवं कल्पना का संतुलित समन्वय करने में भी वह पूर्णत: सफल रहे | नाट्य शिल्प की दृष्टि से प्रसाद के नाटक बेजोड़ हैं लेकिन रंगमंचीयता की दृष्टि से इनके नाटकों को लेकर आलोचकों में एक बहस है कि ‘प्रसाद के नाटक अभिनय अर्थात रंगमंचीयता की दृष्टि से सफल नहीं हैं |’ प्रस्तुत माड्यूल में प्रसाद एवं उनके समकालीन नाटककारों का अध्ययन करते हुए विद्यार्थी प्रसाद की नाट्य कला, उनके नाटकों की रंगमंचीयता को लेकर जो मतभेद हैं उनसे भली-भांति परिचित होंगे | इसी परिप्रेक्ष्य में जगदीशचन्द्र माथुर एवं भुवनेश्वर की एकांकी भी इस माड्यूल का हिस्सा है | इन रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी रंगमंच को नई दिशा देने का प्रयास किया और इनकी एकांकी अभिनेयता की दृष्टि से काफी सफल मानी जाती हैं | ‘भोर का तारा’ में जगदीशचंद्र माथुर ऐतिहासिक काल्पनिक कथ्य के ज़रिये राष्ट्रीय भावना को जागृत होते हुए दिखाते हैं | राष्ट्र-प्रेम के आगे व्यक्तिगत-प्रेम के कोई मायने नहीं है और खासकर एक कवि के लिए, इसी विषयवस्तु को रचनाकार ने सफलतापूर्वक प्रस्तुत एकांकी में प्रदर्शित किया है | इस माड्यूल में विद्यार्थी रचनाकारो की लगभग समान विषयवस्तु वाली रचनाओं का तुलनात्मक मूल्यांकन कर पायेंगे  ताकि वह नाटक और एकांकी की रंगमंचीयता में आने वाली परेशानियों तथा उसकी बारीकियों से अवगत हो सकें और उनके बीच के अंतर को भी पहचान सकें | 

निर्धारित विषय:  

  • नाटक – स्कन्दगुप्त/ध्रुवस्वामिनी  (जयशंकर प्रसाद)- कोई एक 
  • एकांकी – स्ट्राइक (भुवनेश्वर), भोर का तारा (जगदीशचन्द्र माथुर) – कोई एक

सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :-

  • जयशंकर प्रसाद : रंगदृष्टि (भाग-१ ), महेश आनंद,राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नयी दिल्ली | 
  • नाटककार जयशंकर प्रसाद, सत्येन्द्र कुमार तनेजा,राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली 1997, 
  • स्कन्दगुप्त – जयशंकर प्रसाद, भारती भंडार, बनारस, द्वितीय संस्करण | 
  • स्कंदगुप्त - https://www.scribd.com/document/429200123/Skandagupta-Jaishankar-Prasad-pdf
  • ध्रुवस्वामिनी- https://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=1050&pageno=2
  • भोर का तारा - https://www.hindwi.org/article/bhor-ka-tara-jagdish-chandra-mathur-article

स्ट्राइक

माड्यूल 3:

स्वतंत्रता के पश्चात नाटक जीवन के यथार्थ के साथ अधिक जुड़ गए यद्यपि इस काल में भी नाटक की विषयवस्तु इतिहास –पुराण पर आधारित रही लेकिन अब नाटककार ऐतिहासिक या पौराणिक घटनाओं की सहायता से समसामयिक जीवन की समस्याओं और प्रश्नों को अधिक रूपायित करने लगे | प्रसादोत्तर हिंदी नाटक के सशक्त नाटककारों में मोहन राकेश, धर्मवीर भारती, लक्ष्मीनारायण लाल आदि हैं जिनके द्वारा कृत नाटकों का अध्ययन इस माड्यूल के अंतर्गत कराया जाएगा | इसी तारतम्य में गोविन्द वल्लभ पन्त की एकांकी ‘विषकन्या’ और भारतभूषण अग्रवाल की एकांकी ‘महाभारत की साँझ; के माध्यम से ऐतिहासिक कथानक विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को इस बात का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो कि रचनाकार शिल्प के माध्यम से कैसे इतिहास और वर्तमान के बीच एक संवाद स्थापित करता है | 

निर्धारित विषय :

  • नाटक – आधे अधूरे (मोहन राकेश), अँधा-युग (धर्मवीर भारती) – कोई एक
  • एकांकी – विष कन्या (गोविन्द वल्लभ पन्त), महाभारत की एक सांझ (भारतभूषण अग्रवाल)- कोई एक 

सहायक पाठ्य सामग्री एवं पुस्तकें :- 

  • नए एकांकी – संपा. अज्ञेय, राजपाल एंड संस, नयी दिल्ली, प्रथम संस्करण – 1961. 
  • विष कन्या – गोविन्द वल्लभ पन्त, आत्माराम एंड संस, दिल्ली, प्रथम संस्करण – 1958. 
  • आधे-अधूरे   https://me-l.co/s1uyy3d1 

माड्यूल 4  : हिन्दी नाटक एवं एकांकी : नए प्रयोग और नई संभावनाएं 

स्वतंत्रता के पश्चात् हिंदी नाटकों में जिस तरह के नवीन प्रयोग हुए उसने नाटकों को पुरानी लीक से हटाकर नवीन मार्ग ग्रहण कराया | गद्य की अन्य विधाओं की तरह ‘स्त्री-प्रश्न, नैतिकता का संकट, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था हिंदी नाटक एवं एकांकी के ज्वलंत विषय बनने लगे | इस माड्यूल के तहत कुछ ऐसी ही रचनाओं का अध्ययन कराया जाएगा | ‘माधवी’ तथाकथित पुरुषवादी मानसिकता की खोखली मान्यताओ पर करारा तमाचा है | वहीं शंकर शेष का नाटक ‘एक और द्रोणाचार्य’ आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और नैतिकता के संकट को पौराणिक संदर्भों के माध्यम से चित्रित करता है |  इसी तारतम्य में विष्णु प्रभाकर की एकांकी ‘और वह न जा सकी’ और लक्ष्मीनारायण लाल की एकांकी ‘मम्मी ठकुराइन’ को भी रखा गया है जिसमें आधुनिक भावबोध से उत्पन्न तनाव एवं जीवन संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है | विद्यार्थी इन पाठों के ज़रिये नाटक और एकांकी के कथानक में आने वाले परिवर्तन से परिचित होंगे साथ ही पाठों में उठाये गए प्रश्नों का विश्लेषण ऐतिहासिक एवं आधुनिक संदर्भों में कर पायेंगे |

निर्धारित विषय :

  • नाटक – बकरी (सर्वेश्वरदयाल सक्सेना), एक और द्रोणाचार्य (शंकरशेष) – कोई एक 
  • एकांकी – और वह न जा सकी   (विष्णु प्रभाकर),  मम्मी ठकुराइन (लक्ष्मीनारायण  लाल)

सहायक पाठ सामग्री एवं पुस्तकें :- 

Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):

  • Response Essay/Assignment-1 (25 Marks)
  • Midterm Exam/PPT/Assignment-2 (25 Marks)
  • End Term Exam (50 Marks)

 


 

Top