| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core | 4 |
Course Coordinator(s) :
1. Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
2. Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
3. No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
4. Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
5. How does the course link with the vision of AUD?
6. How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)
'भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र' पाठ्यक्रम स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्य के सैद्धांतिक आधारों और आलोचनात्मक पद्धतियों की एक वैश्विक समझ विकसित करना है। यह पाठ्यक्रम भारतीय संस्कृत आचार्यों द्वारा प्रतिपादित काव्यशास्त्रीय परंपराओं और पश्चिम के शास्त्रीय से लेकर आधुनिक चिंतन तक का एक तुलनात्मक फलक प्रस्तुत करता है। इसके अंतर्गत विद्यार्थी रस, अलंकार और ध्वनि जैसे भारतीय सिद्धांतों के साथ-साथ प्लेटो, अरस्तू और वर्ड्सवर्थ जैसे पाश्चात्य विचारकों के मौलिक सिद्धांतों का गहराई से अध्ययन करेंगे। पाठ्यक्रम का विस्तार नई समीक्षा और उत्तर-औपनिवेशिकता जैसे आधुनिक विमर्शों तक है, जो साहित्य को समाज, संस्कृति और भाषा के अंतर्संबंधों में देखने की दृष्टि प्रदान करता है। इस अध्ययन के माध्यम से विद्यार्थियों में साहित्यिक रचनाओं को केवल पढ़ने के बजाय उन्हें शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रतिमानों पर विश्लेषित और मूल्यांकित करने की अकादमिक दक्षता विकसित होगी।
पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
साहित्य को एक 'सांस्कृतिक विनिर्मिति' और गंभीर 'सामाजिक-राजनीतिक पाठ' के रूप में विश्लेषित करने की सैद्धांतिक एवं आलोचनात्मक क्षमता विकसित करना इस पाठ्यक्रम का प्राथमिक लक्ष्य है । इसके माध्यम से विद्यार्थी भारतीय काव्यशास्त्र के प्रमुख संप्रदायों और उनके सैद्धांतिक स्वरूप को ऐतिहासिक संदर्भों में समझने के साथ-साथ पाश्चात्य काव्यशास्त्र के आधारभूत सिद्धांतों और उनके प्रमुख प्रवर्तकों के योगदान का मूल्यांकन कर सकेंगे। पाठ्यक्रम का उद्देश्य भारतीय और पाश्चात्य काव्य-चिंतन की परंपराओं का तुलनात्मक बोध कराते हुए वैश्विक प्रतिमानों के बीच साम्य और वैषम्य को रेखांकित करना है। छात्र आधुनिक और उत्तर-आधुनिक साहित्यिक विमर्शों के आलोक में समकालीन साहित्य को डिकोड करने की क्षमता प्राप्त करेंगे, जिससे उनमें विभिन्न साहित्यिक विधाओं की आलोचनात्मक व्याख्या और व्यावहारिक समीक्षा प्रस्तुत करने की अकादमिक दक्षता विकसित होगी।
इस पाठ्यक्रम के सफल समापन के बाद विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- CO1 :साहित्य को एक 'सांस्कृतिक विनिर्मिति' (Cultural Construct) और गंभीर 'सामाजिक-राजनीतिक पाठ' (Socio-political Text) के रूप में देखने की दृष्टि विकसित करना तथा उसे शास्त्रीय एवं सैद्धांतिक प्रतिमानों पर विश्लेषित करने की आलोचनात्मक क्षमता अर्जित करना।
- CO2: पाश्चात्य काव्यशास्त्र के आधारभूत सिद्धांतों (अनुकरण, विरेचन, उदात्त, कल्पना आदि) और उनके प्रमुख प्रवर्तक विचारकों के साहित्यिक योगदान का मूल्यांकन करने में।
- CO3:भारतीय और पाश्चात्य काव्य-चिंतन की परंपराओं का तुलनात्मक अध्ययन करने तथा साहित्य के वैश्विक प्रतिमानों के बीच साम्य और वैषम्य को रेखांकित करने में।
- CO4: 20वीं सदी के आधुनिक और उत्तर-आधुनिक साहित्यिक विमर्शों (जैसे संरचनावाद, उत्तर-औपनिवेशिकता और नई समीक्षा) के आलोक में समकालीन साहित्य को डिकोड करने की क्षमता प्राप्त करने में
- CO5:काव्यशास्त्र के सिद्धांतों का प्रयोग करते हुए विभिन्न साहित्यिक विधाओं की आलोचनात्मक व्याख्या, व्यावहारिक समीक्षा और शोधपरक लेखन प्रस्तुत करने
- CO6:काव्यशास्त्र के सिद्धांतों का प्रयोग करते हुए विभिन्न साहित्यिक विधाओं की आलोचनात्मक व्याख्या, व्यावहारिक समीक्षा और शोधपरक लेखन प्रस्तुत करने में।
Modules and Readings
In this section, provide the name of the modules along with a brief description and references (Core and Suggested)
मॉड्यूल 1: भारतीय काव्यशास्त्र - प्रमुख संप्रदाय और सिद्धांत (भाग-1)
प्रस्तुत मॉड्यूल में भारतीय काव्यशास्त्र के आधारभूत संप्रदायों का परिचय देते हुए उनके सैद्धांतिक स्वरूप पर विचार किया जाएगा।
निर्धारित विषय:
- काव्य-लक्षण, काव्य-हेतु और काव्य-प्रयोजन।
- रस सिद्धांत: रस का स्वरूप, रस-निष्पत्ति और साधारणीकरण।
- अलंकार सिद्धांत: अलंकार की अवधारणा और प्रमुख आचार्यों के मत।
- रीति सिद्धांत: रीति की अवधारणा और काव्य के गुण।
Suggested Readings:
- काव्य के तत्व, आचार्य देवेन्द्रनाथ शर्मा,लोकभारती प्रकाशन, दिल्ली।
- भारतीय काव्यशास्त्र, योगेंद्र प्रताप सिंह, लोकभारती प्रकाशन, दिल्ली।
- भारतीय काव्यशास्त्र की परंपरा, डॉ नगेंद्र, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली।
मॉड्यूल 2: भारतीय काव्यशास्त्र - प्रमुख संप्रदाय और सिद्धांत (भाग-2)
इस मॉड्यूल में ध्वनि और वक्रोक्ति जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों के साथ हिंदी काव्यशास्त्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन किया जाएगा।
निर्धारित विषय:
- ध्वनि सिद्धांत: ध्वनि का स्वरूप और उसके प्रमुख भेद
- वक्रोक्ति सिद्धांत: वक्रोक्ति की अवधारणा एवं वर्गीकरण
- औचित्य सिद्धांत एवं अवधारणा
- हिंदी काव्यशास्त्र की विकास यात्रा का सामान्य परिचय
Suggested Readings:
- काव्य में उदात्त तत्व , डॉ नगेंद्र
- भारतीय काव्य सिद्धांत, डॉ. नागेंद्र, डॉ तारक नाथ बाली, हिंदी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय।
माड्यूल 3 पाश्चात्य काव्यशास्त्र - प्रमुख सिद्धांत और सिद्धांतकार
इस मॉड्यूल में यूनानी काव्य-चिंतन से लेकर आधुनिक वैचारिक आंदोलनों का परिचय दिया जाएगा।
निर्धारित विषय:
- प्लेटो, अरस्तू, लॉन्जाइनस के प्रमुख सिद्धांतों का अनुशीलन।
- वर्ड्सवर्थ, कॉलरिज और मैथ्यू अर्नाल्ड के प्रमुख सिद्धांतों का अनुशीलन।
- आई. ए. रिचर्ड्स, टी. एस. इलियट के प्रमुख सिद्धांतों का अनुशीलन।
Suggested Readings:
- पाश्चात्य काव्यशास्त्र, डॉ तारक नाथ बाली, वाणी प्रकाशन
- पाश्चात्य काव्यशास्त्र अधुनातन संदर्भ : सत्यदेव मिश्र, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद
- पाश्चात्य काव्यशास्त्र, देवेन्द्रनाथ शर्मा
माड्यूल 4 आधुनिक एवं उत्तर-आधुनिक पाश्चात्य चिंतन:
प्रस्तुत मॉड्यूल में 20वीं सदी के प्रमुख साहित्यिक सिद्धांतों और दर्शनों को हिंदी साहित्य के संदर्भ में रेखांकित किया जाएगा।
निर्धारित विषय:
- नई समीक्षा
- संरचनावाद
- उत्तर-आधुनिकता
- उत्तर-औपनिवेशिकता।
Suggested Readings:
- नई समीक्षा के प्रतिमान, निर्मला जैन
- पाश्चात्य काव्यशास्त्र अधुनातन संदर्भ : सत्यदेव मिश्र, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद
- भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र तथा हिन्दी आलोचना, डॉ रामचंद्र तिवारी, संजय बुक सेंटर, गोलघर, वाराणसी
Assessment (Including Skills to be tested as per NCRF):
- Response Essay/ Assignment-1 (25 Marks)
- Midterm Exam/PPT/Assignment-2 (25 Marks)
- End Term Exam (50 Marks)
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली