| Course Type | Course Code | No. Of Credits |
|---|---|---|
| Discipline Core | SOL2HN309 | 4 |
Course Coordinator(s) : डॉ.निकिता जैन, डॉ. सुनील कुमार यादव
Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? No
Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: None (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)
No. of students to be admitted (with justification if lower than the usual cohort size is proposed): विश्वविद्यालय नियमानुसार
Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Semester long
How does the course link with the vision of AUD?
यह पाठ्यक्रम अंबेडकर विश्वविद्यालय के विजन के अनुसार अंतरानुशासनिक और ऐतिहासिक-समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप होगा। प्रस्तुत पाठ्यक्रम में बाल साहित्य की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को इसके इतिहास से इस प्रकार रूबरू कराया जाएगा ताकि वह भारत की मौखिक और लिखित साहित्य की समृद्ध विरासत से परिचित हो सकें | इसके साथ ही वह बाल साहित्य के महत्व को भलीभांति समझते हुए देश की ऐतिहासिक,सामाजिक,साहित्यिक,भाषाई संस्कृति के प्रति अपनेपन का भाव साझा करने में भी सक्षम हो सकेंगे
How does the course link to the specific programme(s) in which it is offered?
एम.ए (हिंदी) के प्रथम सत्र में विद्यार्थी विशेष रूप से हिंदी साहित्य का इतिहास, आधुनिक हिंदी कविता तथा आधुनिक हिंदी कथा साहित्य’ का पठन – पाठनपहले ही कर चुके होंगे जिसके अंतर्गत वह विभिन्न लेखकों और कवियों के साहित्य को जानने और समझने के साथ-साथ समकालीन परिस्थितियों को विभिन्न संदर्भों में विश्लेषित करने के योग्य भी हो चुके होंगे | इस पूर्व निर्मित पृष्ठभूमि के कारण विद्यार्थी तत्कालीन युगीन परिस्थितियों और साहित्यिक प्रवृत्तियों के आईने में प्रस्तावित पाठ्यक्रम में निर्धारित लेखकों और उनकी रचनाओं का न केवल नयी दृष्टि के साथ अध्ययन करेंगे बल्कि साहित्य के अन्य रचनाकारों की कृतियों से सहसम्बन्ध स्थापित करते हुए उसका विश्लेषण प्रस्तुत करने में भी सक्षम हो सकेंगे | इस प्रकार ‘बाल साहित्य और हिंदी’ पाठ्यक्रम एम.ए. (हिंदी) में पढ़ाये जाने वाले अन्य पाठ्यक्रमों से पूरी तरह सम्बद्ध रहेगा |
पाठ्यक्रम विवरण (Course Description)
प्रस्तुत पाठ्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है बाल साहित्य की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए हिंदी में उसके उद्भव एवं विकास पर प्रकाश डालना ताकि विद्यार्थी इस बात से रूबरू हो सकें कि हिंदी में बाल साहित्य का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना स्वयं हिंदी साहित्य का | ऐसा माना जाता रहा है कि भारत में प्राचीन काल से ही हितोपदेश, कथासरित्सागर एवं पंचतंत्र की कहानियों आदि के रूप में बाल साहित्य की समृद्ध परम्परा रही है | इसके साथ ही लोक कथाओं और दन्त कथाओं के माध्यम से भी हमारे पास बाल साहित्य का अथाह भण्डार है जो कई पीढ़ियों से हस्तानांतरित होता आ रहा है | इसी तारतम्य में अकबर बीरबल, तेनालीराम, आदि के नाम से प्रचलित कई किस्से-कहानियाँ तो हर बच्चे को ज़बानी पता हैं | इन सबका सीधा सम्बन्ध हिंदी साहित्य से है या ये कहा जाए कि इन प्राचीन लोक कथाओं और दन्त कथाओं का सीधा लाभ हिंदी साहित्य को मिला है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी | प्रस्तावित पाठ्यक्रम के द्वारा हिंदी के आईने में बाल साहित्य के इतिहास की पड़ताल करते हुए विभिन्न हिंदी लेखकों और बाल साहित्यकारों की रचनाओं का एक तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा ताकि विद्यार्थी अलग-अलग रचनाकारों के अनुभव से परिचित होते हुए अपना एक व्यापक दृष्टिकोण बाल साहित्य के प्रति बनाने में सक्षम हो सकें | प्रस्तुत पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को ‘बाल साहित्य’ का अध्ययन कराना ही नहीं बल्कि इसके ज़रिये उन्हें बाल मनोविज्ञान के विभिन्न पहलुओं तथा अवधारणाओ से परिचित कराना भी है | निर्धारित पाठों के ज़रिये विद्यार्थी बालविकास की अलग-अलग अवस्थाओं से परिचित होते हुए बालमन को विभिन्न संदर्भों एवं परिस्थितियों के आईने में सही ढंग से व्याख्यायित कर सकें, इस सम्भावना के तहत ही प्रस्तावित पाठ्यक्रम का निर्माण किया गया है | यहाँ यह बात ध्यातव्य है कि प्रस्तुत पाठ्यक्रम में अधिकतर वही ‘बाल-साहित्य’ शामिल किया गया है जो बच्चों पर केन्द्रित है |
पाठ्यक्रम उद्देश्य (Course Objectives)
- हिंदी बाल-साहित्य की परंपरा, स्वरूप तथा विकासक्रम से विद्यार्थियों को परिचित कराना।
- बाल-साहित्य की वैचारिक एवं साहित्यिक महत्ता के प्रति विद्यार्थियों में व्यापक और संवेदनशील दृष्टि विकसित करना।
- बाल-मनोविज्ञान के प्रमुख सिद्धांतों तथा बाल-जीवन के विविध अनुभवों की समझ विकसित करना।
- हिंदी बाल-साहित्य की प्रमुख विधाओं और रचनाओं के माध्यम से बालमन की अभिव्यक्ति को समझने की क्षमता विकसित करना।
- विद्यार्थियों में बाल-लेखन के प्रति रुचि, सृजनात्मकता और आलोचनात्मक दृष्टि का विकास करना।
- विद्यार्थियों को बाल-साहित्य के सामाजिक, शैक्षिक एवं परामर्शात्मक पक्षों से अवगत कराना,
Outcomes
- CO1: विद्यार्थी हिंदी बाल-साहित्य की परंपरा, स्वरूप तथा विकासक्रम का परिचय प्राप्त कर सकेंगे।
- CO2: विद्यार्थी हिंदी बाल-साहित्य की प्रमुख रचनाओं का विश्लेषण कर सकेंगे।
- CO3: विद्यार्थी बाल-मनोविज्ञान के प्रमुख सिद्धांतों तथा बाल-जीवन के विविध अनुभवों की व्याख्या करने में सक्षम हो सकेंगे।
- CO4: विद्यार्थी बालमन, उसकी संवेदनाओं तथा समस्याओं को समझ सकेंगे।
- CO5: विद्यार्थी बाल-साहित्य के सामाजिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक महत्व का मूल्यांकन कर सकेंगे।
- CO6: विद्यार्थी बाल-लेखन एवं बाल-संबंधी विमर्शों के प्रति सृजनात्मक और आलोचनात्मक दृष्टि विकसित कर सकेंगे।
Modules and Readings
माड्यूल 1: बाल साहित्य का स्वरुप और विकास
प्रस्तावित पाठ्यक्रम का प्रथम मॉड्यूल ‘बाल साहित्य की अवधारणा और हिंदी में इसके उद्भव एवं विकास’ पर मुख्यत: केन्द्रित रहेगा | बाल-साहित्य की विकासयात्रा को विश्लेषित करते हुए विद्यार्थी हिंदी की प्रमुख बाल-पत्रिकाओं से भी रूबरू होंगे जिन्होंने केवल हिंदी क्षेत्रों में ही बाल-लेखन की जड़ों को मजबूत नहीं किया बल्कि पूरे भारत में बाल-साहित्य की नींव को सुदृढ़ बनाया | इस क्रम में विद्यार्थी मुख्य रूप से भारतेंदु हरिश्चंद्र, (बालदर्पण, बालाबोधिनी), पंडित सुदर्शनाचार्य (शिशु), पंडित बदरीननाथ भट्ट (बालसखा), बाल शोरि रेड्डी (चंदा मामा), जयप्रकाश भारती (नन्दन) आदि प्रमुख बाल लेखकों एवं पत्रिकाओं का समालोचनात्मक मूल्यांकन आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करने में सक्षम हो सकेंगे | इसके अतिरिक्त इस मॉड्यूल में विद्यार्थी बाल-साहित्य की विकासयात्रा को जानते हुए समय के साथ बाल साहित्य में आये बदलावों को भी गहनता के साथ रेखांकित कर पायेंगे | पहले की अधिकतर बाल-पत्रिकायें बड़े-बड़े साहित्यकारों की देश प्रेम,नैतिकता,आदर्शपरक रचनाओं द्वारा बच्चों के मनोरंजन के साथ-साथ उन्हें सुसंस्कृत बनाने का भी कार्य करती थीं लेकिन समय के साथ-साथ बाल पत्रिकायें अपनी मौलिकता और उद्देश्य दोनों को खो बैठीं | सूचना क्रांति के इस दौर में हजारों बाल-पत्रिकाओं के प्रकाशन के बावजूद आज शायद ही कोई इक्का-दुक्का पत्रिका होगी जो बच्चों में उतनी लोकप्रिय होगी जितनी कि उस दौर की पत्रिकाएं थीं | बाल-साहित्य एवं पत्रकारिता के इस परिवर्तित स्वरुप के कारणों का अध्ययन भी प्रस्तुत मॉड्यूल में अपेक्षित है |
निर्धारित विषय:
- बाल साहित्य की अवधारणा एवं स्वरुप
- हिंदी बाल साहित्य का उद्भव एवं विकास
- हिंदी बाल पत्रकारिता : एक नज़र
- बाल साहित्य में बाल- रचनाकारों की भूमिका
सहायक पाठ्य सामग्री :-
- आलेख – बचपन की अवधारणा और बाल साहित्य, कृष्ण कुमार. https://www.eklavya.in/magazine-activity/sandarbh-
- magazines/171-sandarbh-from-issue-81-to-90/sandarbh-issue-81/480-bachpan-ki-avdharana-aur-baal-sahitya
- आलेख – बालसाहित्य का विकासयुग : साहित्य में बचपन की दस्तक, ओमप्रकाश कश्यप, https://omprakashkashyap.wordpress.com/
- आलेख – बाल पत्रिकाओं की भूमिका और दायित्व, देवेन्द्र कुमार ‘देवेश’, http://asbmassindia.blogspot.com/2012/01/blog-post_8742.html.
- हिंदी बाल साहित्य का इतिहास, प्रकाश मनु, प्रभात प्रकाशन, दिल्ली, 2019.
- बाल साहित्य : मेरा चिंतन, डॉ. हरिकृष्ण देवसरे, मेधा बुक्स, दिल्ली, 2000.
- हिन्दी बाल पत्रकारिताः उदभव और विकास,सुरेन्द्र विक्रम,साहित्यवाणी, इलाहाबाद.
- हिन्दी बाल साहित्य की रूपरेखा,डा. श्रीप्रसाद,लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद
माड्यूल 2: बाल केन्द्रित हिंदी कथा साहित्य
बाल साहित्य को मोटे तौर पर दो रूपों में देखा जा सकता है पहला –उपयोगी बाल साहित्य और दूसरा रचनात्मक बाल साहित्य | ‘उपयोगी बाल साहित्य’ में जानकारीपूर्ण एवं तथ्यात्मक साहित्य शामिल रहता है जबकि रचनात्मक बाल साहित्य में कहानी, नाटक, कविता आदि | अधिकतर बाल-रचनाकार रचनात्मक बाल साहित्य को ही वास्तविक ‘बाल-साहित्य’ की श्रेणी में रखते हैं क्योंकि बच्चों के लिए रचा गया यह साहित्य मूलत: उनके आनंद के लिए तो होता ही है और उन्हें सहज ही शिक्षा भी प्रदान करता है | प्रस्तुत मॉड्यूल इसी ‘रचनात्मक साहित्य’ पर आधारित है जिसके अंतर्गत हिंदी की बाल कहानियों,उपन्यासों तथा अन्य गद्य विधाओं के साहित्य को शुमार किया गया है | हालांकि एम.ए के विद्यार्थियों के स्तर को ध्यान में रखते हुए इस मॉड्यूल में अधिकतर बाल केन्द्रित कथा साहित्य को ही स्थान दिया गया है| इसके साथ ही प्रस्तुत माड्यूल में हिंदी के अलावा बांग्ला, उर्दू एवं अन्य भाषाओं की अनूदित साहित्य को भी रखा गया है जिससे विद्यार्थी हिंदी के अतिरिक्त अन्य भाषाओं में लिखे गए बाल-साहित्य का अध्ययन कर उसका तुलनात्मक विश्लेषण करने में भी सक्षम हो सकें | इसके अलावा प्रस्तुत मॉड्यूल में स्त्री रचनाकारों के बाल साहित्य को भी रखा गया क्योंकि एक बच्चे के मन के अन्दर चलने वाले द्वंदों को जितनी अच्छी तरह एक स्त्री समझ सकती है उतना शायद ही कोई और समझ पाए क्योंकि स्त्री, स्त्री होने के साथ एक माँ की भूमिका को भी भलीभांति समझती है इसलिए बालमन को स्त्री रचनाकारों ने किस तरह से अपनी रचनाओं के द्वारा रेखांकित किया है इसका अध्ययन प्रस्तुत मॉड्यूल में अपेक्षित रहेगा
निर्धारित विषय:
- बाल केन्द्रित हिंदी कथा साहित्य -
- कहानियाँ :- (कोई छ: कहानी)
- प्रेमचंद – गुल्ली डंडा/नादान दोस्त (कोई एक)
- नलिन विलोचन शर्मा – विष के दांत
- जैनेन्द्र कुमार – अपना-अपना भाग्य
- मार्कंडेय – पानफूल/जूते (कोई एक)
- हरिकृष्ण देवसरे – मैं पढ़ नहीं सका / पापा मम्मी को मत मारो (कोई एक)
- प्रकाश मनु – जादू
- मृदुला गर्ग – बाल गुरु
- अलका सरावगी – कभी शैतानी न करने वाला लड़का
बाल केन्द्रित हिंदी उपन्यास :- (कोई एक)
- रामबृक्ष बेनीपुरी – बगुला भगत
- मन्नू भंडारी – आपका बंटी
- कृष्ण बलदेव वैद – उसका बचपन
अनूदित साहित्य (कहानियाँ) – कोई दो
- अमृता प्रीतम – देवताओं की सभा में लेखक (पंजाबी)
- महाश्वेता देवी – कंजूस मालिक (बांग्ला)
- इस्मत चुगताई – कामचोर (उर्दू)
- गिजूभाई बधेका – सबसे भली चुप्प / चिड़िया (गुजराती)
उपन्यास -
आश्चर्य लोक में एलिस -लुईस कैरोल (एलिस इन वंडरलैंड का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद)
अन्य हिंदी गद्य विधाएं
- महादेवी वर्मा – गिल्लू (संस्मरण)
- विष्णु प्रभाकर – ऐसे -ऐसे (एकांकी)
- हरिकृष्ण देवसरे – बच्चों के सौ नाटक (कोई एक)
- सहायक पुस्तकें एवं सामग्री :
- श्रेष्ठ बाल कहानियाँ,बाल शोरि रेड्डी, भारतीय भाषा परिषद् , कलकत्ता, 1993
- बाल कहानियाँ - प्रकाश मनु - आत्माराम एण्ड संस, नई दिल्ली |
- हिंदी कथा साहित्य में बाल विमर्श- डॉ. प्रीति अग्रवाल, नवजागरण प्रकाशन ।
- उपन्यासों में बाल विमर्श, आलेख https://www.apnimaati.com/2024/12/blog-post_885.html
- बच्चों के सौ नाटक - https://dn710608.ca.archive.org/0/items/in.ernet.dli.2015.464238/2015.464238.Hundred-Plays.pdf
- प्रेमचंद की बाल कहानियाँ https://www.apnimaati.com/2024/12/blog-post_989.html
- ऐसे-ऐसे , एकांकी hindwi.com
मॉड्यूल 3 - बाल केन्द्रित हिंदी कविताएँ
प्रस्तावित मॉड्यूल मुख्यत: ‘हिंदी की बाल कविताओं’ पर केन्द्रित रहेगा | इस मॉड्यूल में कुछ चुनिन्दा बाल-कविताओं का अध्ययन करते हुए विद्यार्थी इस पहलू से परिचित हो पायेंगे कि आज हिंदी के पास जो श्रेष्ठ बाल-साहित्य की धरोहर है उसमें विशेष रूप से साहित्य बाल - कविता के रूप में मौजूद है | इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि साहित्य की अन्य विधाओं में अच्छा बाल साहित्य नहीं मिलता लेकिन कविताओं के माध्यम से स्वाधीनता पूर्व और स्वाधीनता पश्चात् कवियों ने जिस तरह से देश की परिस्थितियों को सरल-सहज शब्दों में रखा उसकी तुलना किसी अन्य विधा में लिखे साहित्य से नहीं की जा सकती | और यह भी एक सच है कि कविताओं और गीतों की पंक्तियाँ एवं धुनें बालमन पर जितना अधिक प्रभाव छोड़ती हैं उतनी प्रभावशाली साहित्य की कोई और विधा नहीं हो सकती | यही वजह है कि 21 वीं सदी में भी सोहनलाल द्विवेदी, रामनरेश त्रिपाठी, दिनकर, रघुवीर सहाय की कविताएँ उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उस समय में थीं | विद्यार्थी निर्धारित पाठ द्वारा तत्कालीन युगीन परिस्थितियों तथा साहित्यिक प्रवृतियों का विश्लेषण आज के सन्दर्भ में करने की कोशिश करेंगे ताकि ‘बाल-कविता’ के विकासक्रम की तस्वीर उनके ज़ेहन में स्पष्ट हो सके तथा समय के साथ बाल कविता की विषयवस्तु, भाषा, शैली में क्या-क्या परिवर्तन हुए हैं इन सभी आयामों को भी विवेचित करने में वह सक्षम हो सकें
निर्धारित विषय :– (कोई चार)
- नज़ीर अकबराबादी – बचपन के मज़े |
- सोहनलाल द्विवेदी – (क) क्यों ? (ख) कोशिश करने वालों की हार नहीं होती |
- सुभद्रा कुमारी चौहान – मेरा बचपन |
- रामधारी सिंह दिनकर – (क) चाँद का कुर्ता (ख) किसको नमन करूँ मैं भारत |
- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना – (क) बतूता का जूता (ख) नेता और गदहा |
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम श्री
- राजेश जोशी – बच्चे काम पर जा रहे हैं
सहायक पाठ्य सामग्री एवं ग्रन्थ :-
- बाल कविता : दशा और दिशा, आलेख https://www.lekhni.net/%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%A8%E0%A5%80-lekhni-%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4-2021/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%83-%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AD/
- बच्चे काम पर जा रहे हैं https://www.hindwi.org/kavita/children-literature/bachche-kaam-par-ja-rahe-hain-rajesh-joshi-kavita?sort=
- ग्राम श्री https://www.hindwi.org/kavita/children-literature/gram-shri-sumitranandan-pant-kavita?sort=
- बतूता का जूता https://www.hindwi.org/kavita/children-literature/batuta-ka-juta-sarveshwar-dayal-saxena-kavita
माड्यूल 4: बाल केन्द्रित सिनेमा : भारतीय एवं वैश्विक परिदृश्य
प्रस्तुत मॉड्यूल में विद्यार्थी साहित्य से इत्तर हिंदी सिनेमा के इतिहास को टटोलते हुए ‘बाल केन्द्रित फिल्मों’ का अध्ययन करेंगे जिससे वह इस पहलू की पड़ताल करने में सक्षम हो सकें कि हिंदी सिनेमा अपने सौ वर्ष के जीवनकाल में बच्चों की समस्याओं को पर्दे पर उतारने में कितना सफल हो पाया है | 900 से 1000 फिल्में प्रतिवर्ष बनाने वाला हिंदी सिनेमा आज भी ‘बाल सिनेमा’ के क्षेत्र में इतना पिछड़ा क्यों है ? ‘बाल-सिनेमा’ के इतिहास में चिल्ड्रेन ऑफ़ हैवेन जैसी एक भी फिल्म आज तक क्यों नहीं बन पायी ? अधिकतर बाल-फिल्मों की कहानियां बच्चों को उपदेश देते हुए ही क्यों दिखाई पड़ती हैं? कार्टून तथा एनीमेशन फिल्मों ने क्या इस स्थिति में कोई सुधार किया है ? निर्धारित फिल्मों द्वारा इन सभी प्रश्नों के जवाबों को गहराई से विवेचित करने का प्रयास किया जायेगा ताकि विद्यार्थी न केवल बाल सिनेमा के महत्त्व और उसकी प्रासंगकिता से परिचित हों बल्कि भविष्य में इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित भी हो सकें
निर्धारित विषय :
- भारतीय हिन्दी परिदृश्य:- (कोई दो)
- किताब – गुलज़ार
- मासूम – शेखर कपूर
- ब्लू अम्ब्रेला - विशाल भारद्वाज
- हिचकी – सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा
- गुठली लड्डू -इशरत खान
वैश्विक सिनेमा :- (कोई एक)
- द किड
- होम अलोन
- द जंगल बुक
- वंडर
- लिटिल मिस शाइन
- सहायक पाठ्य सामग्री :-
- सिनेमा में बाल मनोविज्ञान, तेजस पूनिया https://www.apnimaati.com/2024/12/blog-post_10.html
- बाल मनोविज्ञान केन्द्रित हिन्दी सिनेमा https://www.apnimaati.com/2024/12/blog-post_634.html
- वंडर फिल्म https://rj-palacios-wonder.fandom.com/wiki/Wonder_(film)
- हिन्दी सिनेमा का बाल पक्ष https://l1nq.com/n36d1fw
- द किड https://youtu.be/yiE1mqq5bWk?si=dnlr7ojgr2bCw4z9
- होम अलोन 4 https://youtu.be/X7VLu7drQX4?si=m70tK9cid1EmTO19
Assessment (Including Skills to be tested as per NCrF):
- Response Essay/PPT/Assignment-1 ( 25Marks)
- Midterm Exam/PPT/Assignment-2/Project (25 Marks)
- End Term Exam (50 Marks)
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली